मुंबई में बीएमसी की बड़ी कार्रवाई, सार्वजनिक शौचालय संचालकों को 3 महीने का अल्टीमेटम

उत्तर मुंबई के पे एंड यूज शौचालयों की खस्ताहाल स्थिति पर बीएमसी सख्त, सुधार न होने पर कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने और गंधवेध आईओटी सिस्टम लगाने की दी चेतावनी।

Update: 2026-05-30 13:39 GMT

शनिवार को मुंबई के बीएमसी परिमंडल 7 कार्यालय में उत्तर मुंबई के सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति सुधारने के लिए बुलाई गई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश देते सदन नेता गणेश खणकर (केंद्र में)।

मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में नागरिकों को साफ-सुथरी, सुरक्षित और सम्मानजनक सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने एक बेहद कड़ा और बड़ा कदम उठाया है। उत्तर मुंबई के कुछ इलाकों में संचालित 'पे एंड यूज' शौचालयों की खस्ताहाल और दयनीय स्थिति को देखते हुए बीएमसी प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बीएमसी ने इन शौचालयों का संचालन करने वाली लापरवाह संस्थाओं को व्यवस्था में आमूलचूल सुधार करने के लिए तीन महीने की सख्त मोहलत देते हुए अंतिम अल्टीमेटम जारी कर दिया है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री व उत्तर मुंबई के सांसद पीयूष गोयल की 'स्वच्छ और सुरक्षित सार्वजनिक शौचालय' की परिकल्पना को धरातल पर साकार करने के उद्देश्य से शनिवार को बीएमसी परिमंडल 7 के कार्यालय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई गई। बीएमसी के सदन नेता गणेश खणकर की अध्यक्षता में संपन्न हुई यह बैठक बुनियादी सुविधाओं में व्यापक सुधार लाने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। बैठक के दौरान सदन नेता गणेश खणकर ने सख्त लहजे में साफ किया कि कई क्षेत्रों में शौचालयों की वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है, जिसे अविलंब सुधारना अनिवार्य हो चुका है।

इस उच्च स्तरीय बैठक में बीएमसी ने सभी ऑपरेटरों को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अगले तीन महीनों के भीतर शौचालयों के टूटे हुए कमोड, दरवाजे, खिड़कियां और नल की तमाम फिटिंग्स को बदला जाए। इसके साथ ही खराब हो चुकी टाइल्स की तत्काल मरम्मत की जाए और पूरे शौचालय परिसर का रंग-रोगन कर उसका सुंदरीकरण सुनिश्चित किया जाए। तकनीकी और आधुनिक सुधारों को शामिल करते हुए अब सभी शौचालयों में आम जनता के लिए फीडबैक सिस्टम शुरू करना और हर घंटे होने वाली सफाई का डिजिटल रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इस पूरे अभियान की सबसे खास बात यह है कि सार्वजनिक शौचालयों को बदबूदार होने से बचाने के लिए 'गंधवेध' नाम की अत्याधुनिक आईओटी (IoT) आधारित दुर्गंध निगरानी प्रणाली भी लगानी होगी।

समीक्षा बैठक में मौजूद बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न वार्डों के सहायक आयुक्तों को ऑन-रिकॉर्ड सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे तत्काल इन ऑपरेटर संस्थाओं को नोटिस जारी करें और उनके द्वारा किए जा रहे काम की नियमित एवं कड़ी निगरानी करें। बीएमसी ने पूरी कानूनी और आधिकारिक प्रतिबद्धता के साथ चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तीन महीने की समयसीमा के भीतर शौचालयों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा, तो संबंधित लापरवाह संस्था का कॉन्ट्रैक्ट तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा और उसकी जगह पर नई योग्य एजेंसी की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। बीएमसी का यह कठोर कदम मुंबई की सार्वजनिक स्वच्छता प्रणाली को पूरी तरह बदलने और नागरिकों को विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाएं देने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित होने जा रहा है।

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