राजुरा: आदिवासियों के मुआवजे में 30% कमीशन वसूलने का आरोप, जांच की मांग
अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी से मिले जमीन के मुआवजे में दलाली और फर्जी दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी का आरोप, पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग।
तस्वीर में सफेद कमीज पहने मुस्कुराते हुए विनोद खोब्रागडे काले बैकग्राउंड के सामने दिख रहे हैं।
राजुरा। कुसुंबी के 24 आदिवासियों को आपसी समझौते के तहत तय करार के अनुसार एकड़ के चार लाख रुपये की दर से जमीन का मुआवजा देने के लिए मार्च के अंत तक भारतीय स्टेट बैंक, आवळापूर शाखा के खातों में राशि जमा की गई थी। यह राशि अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के माणिकगढ़ यूनिट की ओर से जमीन के मोबदले के रूप में जमा की गई थी। इसी राशि को लेकर विनोद खोब्रागडे पर किसानों से 30 प्रतिशत रकम वसूलने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
आनंदराव मेश्राम और भारत आत्राम को सामने कर किसानों से 30 प्रतिशत राशि वसूलने का प्रमाण स्वयं विनोद खोब्रागडे ने हीरापुर गांव में किसानों और ग्रामीणों के सामने किया था। आरोप है कि बैंक खातों में पैसे जमा होते ही उन्होंने प्रत्येक किसान से संपर्क कर राशि निकालने के लिए कहा और इस माध्यम से लाखों रुपये जमा किए।
आनंदराव मेश्राम और उनकी बहन सारजा कोटनाके को मिली राशि में से भी खोब्रागडे और उनकी पत्नी स्वयं हीरापुर तथा काकबन जाकर रकम जमा करके ले गए। जाधव से भी गांव के लोगों के सामने तथा प्रत्येक व्यक्ति को वरोरा में बनाकर रकम वसूलने का आरोप लगाया गया है। आनंदराव मेश्राम और भारत आत्राम ने आरोप लगाया कि स्वयं दलाली करने के बावजूद उनके नाम पर खापर फोड़कर लाखों रुपये हड़प किए गए।
आरोपों के अनुसार, आयु सिडाम के खाते से उत्तम पवार ने दो लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से विनोद खोब्रागडे के खाते में ट्रांसफर किए। मेश्राम और आत्राम का कहना है कि कई बार हाईकोर्ट, मानवाधिकार आयोग और अनुसूचित जनजाति आयोग में दर्ज किसी भी प्रकरण का फैसला आदिवासियों के पक्ष में नहीं आया। दस्तुरखुद आनंदराव मेश्राम द्वारा पहले दाखिल किए गए सभी प्रकरण खारिज हो चुके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई किसानों को मृत बताकर तथा बनावटी दस्तावेजों के आधार पर किसानों को लाखों रुपये मिलने का लालच दिखाकर गुमराह किया गया। आरोप है कि लाखों रुपये स्वयं हड़प कर जिले में ब्लैकमेल किए जा रहे विभिन्न प्रकरणों में इन सीधे-सादे आदिवासियों का इस्तेमाल विनोद खोब्रागडे ने किया और पूरे आदिवासी समुदाय के सिर पर रखी लाखों रुपये की मलाई स्वयं खा ली।
शिकायत के अनुसार, मामले की गहन जांच होने पर कंपनी को गुमराह करने और छह करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले ‘झारीतील शुक्राचार्य’ का पर्दाफाश होने की बात कही गई है। मेश्राम और आत्राम ने आरोप लगाया कि कई बार कानून के अध्ययनकर्ता के रूप में तथा प्रशासनिक अधिकारियों के बीच धूल झोंककर खबरें प्रकाशित कराकर उन्हें बदनाम किया गया।
उन्होंने कहा कि गडचांदूर पुलिस के सामने लंबित पूरे प्रकरण की गहन जांच कर वास्तविक दोषी को सामने लाना चुनौतीपूर्ण है। आरोप है कि उन्हें मोहरा बनाकर करोड़ों रुपये स्वयं हड़प किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि एक तलाठी के पास इतनी संपत्ति कहां से आई। साथ ही आरोप लगाया कि वकील और केस के नाम पर पैसे लूटने का गोरखधंधा विनोद खोब्रागडे ने किया।
मेश्राम और आत्राम ने पुलिस से गहन जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी करने की मांग की है। उन्होंने एक पत्र के माध्यम से 24 किसानों को मुआवजा वितरण और करार से संबंधित दस्तावेजों के साथ ही पुलिस के पास लंबित सभी शिकायतों का संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि विनोद खोब्रागडे के पाप का घड़ा भर चुका है और आवश्यक दस्तावेज वे सार्वजनिक करेंगे।