तस्वीर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस किसानों और स्थानीय लोगों से घिरे हुए फसल का मुआयना कर रहे हैं।

बारिश ने मुंह मोड़ लिया है और लातूर जिले के किसान गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। आंखों के सामने जली हुई फसल, पीने के पानी की चिंता, पशुओं के चारे का संकट और सिर पर बढ़ता कर्ज—इन परेशानियों के बीच बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दौरे के दौरान किसानों की व्यथा सामने आई। “मेरा सब कुछ खत्म हो गया… अब मैं क्या करूं?” कहते हुए एक किसान मुख्यमंत्री से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ा। घटना के दौरान मुख्यमंत्री ने उसे ढांढस बंधाया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निलंगा तालुका के जाऊ और औसा तालुका के खरोसा क्षेत्र के खेतों में पहुंचकर सूखे की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जली हुई सोयाबीन की फसल, पानी के अभाव में फसलों की खराब स्थिति और किसानों की परेशानियों को प्रत्यक्ष रूप से जाना। निरीक्षण के दौरान एक किसान ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी व्यथा रखी तो उसकी भावनाओं का बांध टूट गया। वह मुख्यमंत्री से लिपटकर रोने लगा।

किसान की स्थिति देखकर मुख्यमंत्री फडणवीस ने उसे अपने पास लिया और “घबराइए नहीं, हम आपके साथ हैं,” कहते हुए ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि किसानों का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है और सरकार की ओर से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

‘नुकसान सर्वत्र हुआ है; सहायता भी सर्वत्र और तत्काल करेंगे’

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि लातूर और धाराशिव राज्य के उन जिलों में शामिल हैं, जहां बहुत कम बारिश हुई है। बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है। “किसानों का नुकसान सर्वत्र हुआ है। सोयाबीन का बड़ा नुकसान हुआ है। पीने के पानी और चारे का सवाल पैदा हो गया है। लेकिन सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नुकसान के पंचनामे करना कानूनी प्रक्रिया है, इसलिए इसे पूरा करना होगा। हालांकि, इसके बाद किसानों को सीधे, तत्काल और सर्वत्र सहायता देने को लेकर सरकार प्रयासरत है। उन्होंने किसानों को इस संबंध में आश्वासन दिया।

अगले कुछ महीने चुनौतीपूर्ण

सूखे की स्थिति से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर जलसंधारण के काम शुरू किए जाएंगे। रोजगार सृजन से जुड़े काम भी शुरू किए जाएंगे। रबी सीजन के लिए भी आवश्यक सहायता देने का सरकार का प्रयास रहेगा, मुख्यमंत्री ने कहा।

पीने के पानी का सवाल भी गंभीर है और उपलब्ध जलस्रोतों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने को लेकर सरकार विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले कुछ महीने कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन किसानों को हिम्मत नहीं छोड़नी चाहिए। सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है और सभी को एक-दूसरे की मदद करते हुए इस संकट का सामना करना होगा।

महिला किसानों से भी संवाद

दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ महिला किसानों से भी संवाद किया और उनकी परेशानियों की जानकारी ली। उन्होंने एक कुएं का निरीक्षण कर क्षेत्र में पानी की स्थिति की जानकारी भी ली। जली हुई फसलों के बीच किसानों के चेहरों पर चिंता और निराशा साफ दिखाई दे रही थी।

मुख्यमंत्री के इस दौरे में पालकमंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले, सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटील, पूर्व मंत्री संभाजीराव पाटील निलंगेकर, विधायक संजय बनसोडे, विधायक अभिमन्यु पवार, विधायक बसवराज पाटील, अरविंद पाटील निलंगेकर, जिलाधिकारी डॉ. भारत बास्टेवाड, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुलकुमार मीना, पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, किसान कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

जली हुई फसल के बीच खड़े होकर आंसुओं के साथ अपनी व्यथा बताने वाले किसान का आक्रोश लातूर में सूखे की गंभीरता को सामने लाता है। अब मुख्यमंत्री की ओर से दी गई सर्वत्र और तत्काल सहायता की घोषणा पर अमल कब और कितनी मात्रा में होता है, इस पर संकटग्रस्त किसानों की नजर है।

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