लातूर में साहित्यरत्न अण्णाभाऊ साठे की 106वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई, ‘एक घास आपुलकीचा’ बना आकर्षण
लातूर में साहित्यरत्न अण्णाभाऊ साठे की 106वीं जयंती पर सामाजिक कार्यक्रमों की धूम रही। ‘एक घास आपुलकीचा’ अन्नदान अभियान ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया।
तस्वीर में अण्णाभाऊ साठे की प्रतिमा के समीप आयोजित जयंती कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पदाधिकारी, अतिथि और नागरिक दिखाई दे रहे हैं।
लातूर में साहित्यरत्न लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे की 106वीं जयंती अभूतपूर्व उत्साह और जनसहभागिता के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पूरे शहर में विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लोकनायक सामाजिक संघटना की ओर से आयोजित “एक घास आपुलकीचा; लोकनायक संघटनेचा” अन्नदान अभियान सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बना।
कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व सहकार मंत्री दिलीपराव देशमुख के हाथों अण्णाभाऊ साठे की प्रतिमा के समीप ध्वजारोहण से हुई। इसके बाद पूरे दिन शहर में स्कूली विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री वितरण, रक्तदान शिविर तथा विभिन्न सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता दर्ज कराई।
लोकनायक सामाजिक संघटना ने लगातार पिछले तीन वर्षों से जयंती के अवसर पर होने वाले अतिरिक्त और अनावश्यक खर्च को टालते हुए समाजोपयोगी पहल की परंपरा कायम रखी है। इसी कड़ी में आयोजित “एक घास आपुलकीचा; लोकनायक संघटनेचा” अन्नदान कार्यक्रम के तहत साढ़े सात हजार से अधिक समाजबंधुओं ने भोजन ग्रहण किया। इस अनूठे और समाजहितैषी उपक्रम की पूरे लातूर शहर में व्यापक चर्चा रही।
सायंकाल शहर के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 16 मंडलों ने आकर्षक और जनजागरण आधारित झांकियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली। यह शोभायात्रा अण्णाभाऊ साठे की प्रतिमा स्थल पर पहुंचकर संपन्न हुई, जहां बड़ी संख्या में नागरिक और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
इस सफल और उल्लेखनीय आयोजन को संपन्न कराने में लोकनायक संघटना के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में संगठन के अध्यक्ष महादू भाऊ रसाळ, सचिव बंटी गायकवाड, प्रमुख अतिथि अजित घार, विधिक सलाहकार एड. बालाजी कुटवाडे, प्रीती माऊली लातूरकर, समाधान उदार, किसन कदम, सरफराज सय्यद, प्रल्हाद पवार सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सामाजिक सरोकार और जनसहभागिता से जुड़े इन कार्यक्रमों ने अण्णाभाऊ साठे की 106वीं जयंती को लातूर में विशेष रूप से यादगार बना दिया।