अमरावती में पानंद रास्तों के निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप, बरूड तहसील कार्यालय के सामने आमरण उपोषण शुरू
अमरावती के बरूड और मोर्शी तहसील में पानंद रास्तों के निर्माण में भ्रष्टाचार और घटिया काम के आरोप लगे हैं। ठेकेदारों व संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर बरूड तहसील कार्यालय के सामने आमरण उपोषण शुरू हुआ।
तस्वीर में बरूड तहसील कार्यालय के सामने पानंद रास्तों के निर्माण में भ्रष्टाचार के विरोध में आमरण उपोषण पर बैठे किसान और नागरिक दिखाई दे रहे हैं।
अमरावती। किसानों के लिए बनाए गए पानंद रास्तों के निर्माण में भ्रष्टाचार और घटिया काम के आरोपों ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है। बरूड तहसील कार्यालय के सामने पानंद रास्ता भ्रष्टाचार के विरोध में आमरण उपोषण शुरू कर दिया गया है। आंदोलनकारियों ने पानंद रास्तों के निर्माण में कथित भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कराने और संबंधित ठेकेदारों तथा अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
किसानों का आरोप है कि उनके लिए बनाए गए पानंद रास्तों का निर्माण ठेकेदार तथा संबंधित अधिकारियों की कथित मिलीभगत से किया गया। बनाए गए रास्तों का काम निकृष्ट और दर्जाहीन होने का आरोप लगाते हुए किसानों ने कहा कि रास्ते बनाने वाले ठेकेदार तथा संबंधित अधिकारी शासन की ओर से दिए गए पैसे से अपनी तिजोरी भरकर शासन को धोखा दे रहे हैं।
किसानों का कहना है कि यह समस्या केवल बरूड तहसील तक सीमित नहीं है। मोर्शी तहसील में भी बनाए गए पानंद रास्तों में बड़े पैमाने पर लापरवाही बरतने का आरोप संबंधित विभाग पर लगाया जा रहा है। इस मामले में संबंधित विभाग से कई बार संपर्क करने के बावजूद अधिकारियों ने बनाए गए संबंधित रास्तों की जांच नहीं की।
रास्तों की जांच नहीं किए जाने को लेकर जनता की ओर से अधिकारियों पर भी इस कथित भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया जा रहा है। बरूड और मोर्शी में बनाए गए पानंद रास्तों की उच्चस्तरीय जांच कर संबंधित ठेकेदारों तथा ठेकेदारों को भ्रष्टाचार की कथित हरी झंडी दिखाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।
शिवसेना के बरूड तालुका प्रमुख पिंटू पारण्या कोरडे तथा तहसील के नागरिकों की ओर से यह मांग उठाई गई है। पानंद रास्तों के निर्माण में कथित भ्रष्टाचार के विरोध में बरूड तहसील कार्यालय के सामने आमरण उपोषण शुरू होने से मामले में प्रशासन की भूमिका और जांच की मांग प्रमुख मुद्दा बन गई है।