महाराष्ट्रीय समाज कोटा में ‘लोककलेतील श्रीगणेश’ ने बिखेरा महाराष्ट्र की लोककला का रंग
कोटा के महाराष्ट्रीय समाज में ‘लोककलेतील श्रीगणेश’ विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। नमन, गण, जाखड़ी, धनगरी, कोली नृत्य और जागरण-गोंधल की प्रस्तुतियों ने महाराष्ट्र की लोककला परंपरा को मंच पर प्रस्तुत किया।
तस्वीर में कोटा के अहिल्याबाई होलकर सभागृह में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि इज्यराज सिंह और पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं नजर आ रही हैं।
कोटा में महाराष्ट्रीय समाज के पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर सभागृह, डडवाड़ा, स्टेशन में ‘लोककलेतील श्रीगणेश’ विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गणेशोत्सव को राज्य महोत्सव का दर्जा मिलने के अवसर पर महाराष्ट्र की समृद्ध लोककला एवं सांस्कृतिक परंपरा को देशभर में पहुंचाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग के अंतर्गत सांस्कृतिक कार्य संचालनालय, महाराष्ट्र राज्य, मुंबई की ओर से यह कार्यक्रम आयोजित हुआ।
समाज के प्रवक्ता विशाल उपाध्याय ने बताया कि कार्यक्रम में महाराष्ट्र की विविध लोककलाओं की प्रस्तुतियां दी गईं। मुख्य अतिथि कोटा महाराज एवं पूर्व सांसद इज्यराज सिंह तथा विशेष अतिथि डॉ. अशोक शारदा और डॉ. मीनाक्षी शारदा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र की लोककला परंपरा के अंतर्गत नमन, गण, जाखड़ी नृत्य, धनगरी नृत्य, कोली नृत्य तथा जागरण-गोंधल प्रमुख रूप से प्रस्तुत किए गए। प्रस्तुतियों ने पारंपरिक महाराष्ट्रीयन लोककला को मंच पर जीवंत किया।
कार्यक्रम में अध्यक्ष अनिल खांडेकर, सचिव भावना काले एवं ब्रह्म महाराष्ट्र मंडल के प्रांतीय कार्यवाहक अमोल चावरेकर ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। समन्वयक उदय साटम तथा महाराष्ट्रीय समाज, कोटा-राजस्थान के सहयोग से यह सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह सांस्कृतिक उपक्रम सांस्कृतिक कार्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंत्री एड. आशीष शेलार की संकल्पना तथा सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में समाज के मुख्य सलाहकार संदीप दंडवते एवं कार्यक्रम समन्वयक उदय साटम ने डॉ. विवेक भावे, शिरीष पुराणिक, विशाल उपाध्याय, हरीश खांडेकर, सतीश लेते और विजय नायक का सम्मान किया।
कार्यक्रम के अंत में समाज की न्यासी डॉ. राजश्री गोहदकर ने आभार व्यक्त किया। ‘लोककलेतील श्रीगणेश’ कार्यक्रम के माध्यम से कोटा में महाराष्ट्र की विविध पारंपरिक लोककलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं की प्रस्तुतियां हुईं।