नसियां जी में हजारों श्रद्धालुओं की साक्षी में क्षुल्लक संयमसागर बने मुनि प्रणवसागर
कोटा के नसियां जी दादाबाड़ी में हजारों श्रद्धालुओं की साक्षी में क्षुल्लक श्री 105 संयमसागर जी महाराज ने जैनेश्वरी मुनि दीक्षा ली और मुनि श्री 108 प्रणवसागर जी महाराज बने। समारोह में त्याग, संयम और धर्मप्रभावना का संदेश गूंजा।
तस्वीर में कोटा के नसियां जी दादाबाड़ी में आयोजित जैनेश्वरी मुनि दीक्षा महोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठान और थाली उठाए नजर आ रहे श्रद्धालु।
कोटा, 20 अगस्त। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में गुरुवार को जैनेश्वरी मुनि दीक्षा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति, त्याग और आध्यात्मिक उल्लास के बीच संपन्न हुआ। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में परम पूज्य क्षुल्लक श्री 105 संयमसागर जी महाराज ने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर संयम, तप और आत्मसाधना के मार्ग पर जीवन समर्पित किया।
ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि शिरोमणि श्री 108 योगसागर जी महाराज ने विधिपूर्वक उन्हें जैनेश्वरी मुनि दीक्षा प्रदान की। दीक्षा के बाद नवदीक्षित मुनिराज को मुनि श्री 108 प्रणवसागर जी महाराज के नाम से संबोधित किया गया। इस पावन अवसर के साक्षी बने श्रद्धालुओं ने इसे दुर्लभ पुण्य और धर्मलाभ का अवसर माना।
मंगल प्रवचन में मुनि श्री योगसागर जी महाराज ने कहा, “सच्चा पुण्योदय तब है, जब संतों का सान्निध्य, धर्म का श्रवण और संयम-पथ का अनुमोदन मिले।” उन्होंने कहा कि सामान्यतः संसार में धन, वैभव और भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति को पुण्य का फल माना जाता है, लेकिन वास्तविक पुण्योदय तब होता है, जब जीव को संतों का सान्निध्य मिले, जिनवाणी सुनने का अवसर प्राप्त हो और संयम के मार्ग को प्रत्यक्ष देखने का सौभाग्य मिले।
उन्होंने कहा कि जैनेश्वरी मुनि दीक्षा कोई सामान्य धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मकल्याण की दिशा में उठाया गया महान कदम है। यह त्याग, तप, संयम, वैराग्य और आत्मसाधना का मार्ग है। संसार के आकर्षणों से विमुख होकर आत्मस्वरूप की ओर बढ़ने वाले साधक के निर्णय का अनुमोदन करना भी समाज के लिए पुण्यार्जन का अवसर है।
मुनिश्री ने कहा कि दीक्षा महोत्सव को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे जीवन में धर्म, त्याग, संयम और आत्मचिंतन की प्रेरणा जगाने वाला महापर्व बनाना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से संतों की साधना और संयम से प्रेरणा लेकर जीवन में अहिंसा, सत्य, संयम, अपरिग्रह और आत्मचिंतन को स्थान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे दुर्लभ अवसर बार-बार नहीं आते। दीक्षा के पावन अवसर पर संयम-पथ का अनुमोदन करना और धर्मप्रभावना में सहभागी बनना जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता है।
उन्होंने मंगलकामना की कि यह पुण्योदय सभी के जीवन में सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान एवं सम्यक्चरित्र की ज्योति प्रज्वलित करे तथा प्रत्येक जीव आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़े।
दीक्षा महोत्सव के ऐतिहासिक एवं मंगल अवसर पर भारत देश के जैन गौरव श्री अशोक जी एवं श्रीमती सुशीला जी पाटनी सपरिवार उपस्थित रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति से समारोह की शोभा बढ़ी। श्रद्धालुओं ने नवदीक्षित मुनि श्री 108 प्रणवसागर जी महाराज के संयममय जीवन की मंगल यात्रा के लिए श्रद्धापूर्वक अनुमोदना व्यक्त की।
प्रशासनिक मंत्री श्रीमती अर्चना जैन सर्राफ ने बताया कि आज की शांतिधारा का पुण्यार्जन हेमंत जी, मनोज जी जेसवाल, महावीर जी मित्तल, अनिल जी, अनुज जी छात्रपुरिया, सचिन जी दिल्ली परिवार द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक किया गया।
उपाध्यक्ष श्री सुमित जैन एवं श्री मनोज बगड़ा ने बताया कि श्रावक श्रेष्ठी, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट एवं पाद प्रक्षालन का पुण्यार्जन जैन गौरव श्री अशोक जी एवं श्रीमती सुशीला जी पाटनी परिवार, महाराज श्री के पूर्वाश्रम के परिवारजन, कस्तूरी जी, राहुल जी-प्रीति जी, गीता जी सोंटी दीदी मोठवाड़ तथा राजेश जी-सोनल जी, ओमांशी जी एवं नवांशी जी सेठिया परिवार, कोटा द्वारा श्रद्धापूर्वक किया गया।
ध्वजारोहण का पुण्यार्जन तथा शास्त्र भेंट का पुण्य लाभ राजेन्द्र जी, हुकम काका एवं प्रकाश हरसोरा परिवार तथा शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन महावीर जी मित्तल द्वारा किया गया।
अध्यक्ष श्री जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि कलश स्थापना का पुण्यार्जन निहालचंद जी, कमला देवी जी, धनोप्या परिवार, हिण्डोली; श्री नरेन्द्र कुमार पप्पा जी, श्रीमती विमल देवी, डॉ. दीपक, राजमणि, संजीव-मुक्ता, मनोज-दीप्ति बीड़ी वाला परिवार, इन्दौर; पवन-राकेश गर्ग परिवार तथा नरेन्द्र-सन्नी कामोद परिवार द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक किया गया।
श्री धर्मचंद धनोप्या ने बताया कि भक्तामर विधान का पुण्यार्जन श्री महावीर भारती एवं श्री महावीर मित्तल द्वारा प्राप्त किया गया। श्री अर्पित एवं श्री सुनील माडिया ने बताया कि मुनि श्री योगसागर जी महाराज के आहारदान का पुण्य अवसर उपवास को प्राप्त हुआ। वहीं क्षुल्लक श्री 105 संयमसागर जी महाराज के आहारदान का सौभाग्य भी उपवास को प्राप्त हुआ।
मंगलाचरण का पुण्य अवसर श्रद्धाभावपूर्वक सम्पन्न किया गया। धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक आचार्य श्री की पूजन-अर्चना, अर्घ्य समर्पण एवं जिनवाणी वंदना कर धर्मलाभ अर्जित किया।
नसियां जी दादाबाड़ी में संपन्न यह जैनेश्वरी मुनि दीक्षा महोत्सव त्याग, तप, संयम, वैराग्य और आत्मकल्याण की प्रेरणा देने वाला आध्यात्मिक अवसर बना। नवदीक्षित मुनि श्री 108 प्रणवसागर जी महाराज के संयम जीवन की मंगल यात्रा की उपस्थित श्रद्धालुओं ने हृदय से अनुमोदना की।