कोटा में हॉस्टल बिजली बिल के फिक्स्ड चार्ज में वृद्धि का विरोध, SE से मिले व्यापारी
बिजली बिलों में फिक्स्ड चार्ज ₹800 से बढ़ाकर ₹16,000 किए जाने पर चंबल हॉस्टल एसोसिएशन ने अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन सौंपकर राहत की मांग की।
कोटा में हॉस्टल बिजली बिल के बढ़े फिक्स्ड चार्ज को वापस लेने की मांग को लेकर अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन सौंपते प्रतिनिधि।
कोटा में हॉस्टलों और शैक्षणिक संस्थानों के बिजली बिलों में स्थायी शुल्क (फिक्स्ड चार्ज) की अप्रत्याशित वृद्धि को लेकर चंबल हॉस्टल एसोसिएशन एवं व्यापार महासंघ ने विरोध दर्ज कराया है। प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधीक्षण अभियंता (एससी) से मुलाकात कर इस वृद्धि से उत्पन्न आर्थिक परेशानियों को सामने रखा और उचित समाधान की मांग की। अधीक्षण अभियंता ने अगले 2 से 3 दिनों के अंदर फिक्स्ड चार्ज के संबंध में निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।
बैठक में हॉस्टल संचालकों पर बढ़ते वित्तीय बोझ और बिजली के फिक्स्ड चार्ज के कारण हो रही परेशानियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस मुद्दे पर केईडीएल की टीम के साथ भी बातचीत कर हॉस्टल संचालकों की समस्याएं रखी गईं। बैठक में चंबल हॉस्टल एसोसिएशन के सदस्यों के साथ व्यापार महासंघ के सचिव अशोक माहेश्वरी भी मौजूद रहे। उन्होंने हॉस्टल व्यवसाय से जुड़े लोगों की समस्याओं को गंभीरता से उठाते हुए शीघ्र समाधान की आवश्यकता बताई।
चंबल हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा और सदस्य अशोक लड्ढा ने इस मामले में राजस्थान सरकार के ऊर्जा मंत्री से भी वार्ता की है, ताकि स्थायी शुल्क की समस्या का उचित एवं स्थायी समाधान निकाला जा सके।
विश्वनाथ शर्मा ने बताया कि कोटा शहर में संचालित हॉस्टलों एवं शैक्षणिक संस्थानों के विद्युत कनेक्शनों पर पहले स्थायी शुल्क लगभग 800 रुपये निर्धारित था। इसे अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के बढ़ाकर 16,000 रुपये से अधिक कर दिया गया है। उनके अनुसार, स्थायी शुल्क में की गई यह अत्यधिक वृद्धि संस्थानों के लिए आर्थिक रूप से बेहद कठिन है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में हॉस्टलों में विद्यार्थियों की संख्या में काफी कमी आई है। इसके कारण अधिकांश हॉस्टल संचालकों की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है और बिजली बिलों का भुगतान करना भी कठिन हो रहा है। कई संस्थानों के न्यूनतम विद्युत बिल लगभग 10,000 रुपये प्रतिमाह तक आ रहे हैं। ऐसे में 16,000 रुपये से अधिक का स्थायी शुल्क लगाया जाना संस्थानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है।
व्यापार महासंघ के सचिव अशोक माहेश्वरी ने मांग की कि विद्युत कनेक्शनों पर स्थायी शुल्क में की गई अप्रत्याशित वृद्धि वापस लेकर इसे पूर्ववत किया जाए अथवा उचित एवं व्यावहारिक दर पर निर्धारित किया जाए। उन्होंने यह भी मांग रखी कि जिन हॉस्टल संचालकों एवं संस्थानों को वर्तमान में कम विद्युत भार की आवश्यकता है, उन्हें स्वीकृत विद्युत भार कम करवाने की सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपनी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार विद्युत भार निर्धारित करवा सकें।
इसके अतिरिक्त, स्थायी शुल्क में वृद्धि को लेकर उचित निर्णय होने तक प्रभावित संस्थानों को राहत देने पर विचार करने की मांग की गई। अधीक्षण अभियंता की ओर से अगले 2 से 3 दिनों में निर्णय लेने का आश्वासन मिलने के बाद अब प्रभावित हॉस्टल संचालकों और शैक्षणिक संस्थानों की नजर प्रस्तावित निर्णय पर है।
इस अवसर पर चंबल हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा, सचिव सतप्रीत सिंह, राजेश कटारिया, दिग्विजय शुक्ला, कैलाश अग्रवाल, राधे श्याम प्रजापत, मोहित सेठी, कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक महेश्वरी और चंबल हॉस्टल एसोसिएशन के पूर्व सचिव अशोक लड्ढा सहित कई हॉस्टल संचालक एवं व्यापारी उपस्थित रहे।