बाड़मेर में वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान: प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत ने किया पौधारोपण
राजस्थान के पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने लुणु खुर्द में मुख्यमंत्री जल स्वालंबन अभियान के तहत नवनिर्मित टांकों का लोकार्पण भी किया।
बाड़मेर के लुणु खुर्द ग्राम पंचायत परिसर में शनिवार को आयोजित 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के दौरान मुख्य अतिथि और जिला प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत (बाएं से सातवें, हरी केतली लिए हुए), चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल (बाएं से आठवें), संत बलदेव पूरी और अन्य जनप्रतिनिधि पौधारोपण करते हुए।
बाड़मेर, 30 मई। मरुस्थलीय क्षेत्र में भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य और जल संकट के स्थायी समाधान के लिए पुरातन जल स्रोतों का संरक्षण करना बेहद अनिवार्य है और इसके लिए व्यापक जन भागीदारी समय की सबसे बड़ी मांग है। इसी ध्येय के साथ आमजन में चेतना जागृत करने के उद्देश्य से संचालित 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के तहत आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में शनिवार को बाड़मेर जिले के प्रभारी एवं पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने रानीगांव एवं लुणु खुर्द का दौरा किया। प्रभारी मंत्री ने यहाँ आयोजित वृहद श्रमदान, स्वच्छता एवं पौधारोपण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत ने बेहद गंभीर लहजे में कहा कि तालाब, एनीकट, बेरियों एवं कुओं जैसे हमारे पूर्वजों द्वारा निर्मित पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। पूर्वजों की इस अनमोल विरासत को सहेजने की जिम्मेदारी हम सबकी है। उन्होंने एक ठोस मंत्र देते हुए कहा कि हमें 'खेत का पानी खेत में, घर का पानी घर में और गांव का पानी गांव में' रोकने की पुख्ता व्यवस्था हर हाल में विकसित करनी होगी। मरुस्थलीय क्षेत्र में लगातार बढ़ते तापमान पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने प्रत्येक नागरिक से साल में कम से कम एक पौधा आवश्यक रूप से लगाने और उसकी देखभाल करने का पुरजोर आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने पशुपालन विभाग की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी ग्रामीणों के समक्ष रखी और क्षेत्र की करीब 2 हजार साल पुरानी ऐतिहासिक 'लोहारी नाडी' को एक उत्कृष्ट मॉडल तालाब के रूप में विकसित करने की घोषणा की।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को साझा करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार आमजन के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह तत्पर है, जिसके तहत बाड़मेर जिले को सड़क, पानी, बिजली के साथ-साथ बड़ी तादाद में नई ग्राम पंचायतों की सौगात दी गई है। उन्होंने विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को जिंदा रखने की बात कहते हुए बारिश के पानी को पारंपरिक टांकों में सहेज कर रखने की समृद्ध परंपरा को पुनर्जीवित करने पर बल दिया। विधायक मेघवाल ने आह्वान किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने के लिए समाज के अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति को भी अपनी सक्रिय और सकारात्मक भागीदारी निभानी होगी।
इस अवसर पर प्रबुद्ध समाजसेवी अनंत राम विश्नोई ने जल संरक्षण के गणित को समझाते हुए एक चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा कि यदि एक नल से सिर्फ एक बूंद पानी भी लगातार टपकता है, तो एक साल में करीब 11 हजार लीटर अमूल्य पानी बर्बाद हो जाता है। उन्होंने सदियों पुरानी पानी बचाने की परम्परा को कायम रखने की अपील की। वहीं, समाजसेवी दीपक कड़वासरा ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि लोहारी नाडी से जल संरक्षण की जो अभिनव पहल की गई है वह ऐतिहासिक है, क्योंकि यह प्राचीन नाडी सदियों से आसपास के कई गांवों की प्यास बुझाती आ रही है और अब इसके प्राचीन स्वरूप को वापस लौटाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
आयोजन के मुख्य चरण में प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत, चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल सहित तमाम जन प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों ने लोहारी नाडी परिसर में स्वयं फावड़ा और तगारी उठाकर अत्यंत उत्साह के साथ श्रमदान किया और समाज को इस महाअभियान से जुड़ने का संदेश दिया। इसके साथ ही अतिथियों ने रानीगांव में पूजनीय धर्मपुरी की धूणी पर और लुणु खुर्द ग्राम पंचायत परिसर में सघन पौधारोपण कर पर्यावरण संतुलन का संकल्प लिया। लुणु खुर्द में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण पड़ाव तब आया जब मुख्यमंत्री जल स्वालंबन अभियान के द्वितीय चरण के तहत नवनिर्मित टांकों का विधिवत लोकार्पण किया गया।
इस वृहद जिला स्तरीय कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व जिला परिषद सदस्य उगम सिंह के स्वागत भाषण से हुई, जिन्होंने संपूर्ण क्षेत्र की तरफ से अभियान में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया। कार्यक्रम का बेहद सफल और प्रभावी संचालन श्याम सिंह राव द्वारा किया गया। इस ऐतिहासिक जल संरक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के वरिष्ठ संतों, प्रशासनिक अमले और विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें अतिरिक्त जिला कलक्टर राजेंद्र सिंह चांदावत, पूजनीय संत बलदेव पूरी, संत गिरधरपुरी, प्रबुद्ध समाजसेवी स्वरूप सिंह खारा, देवीलाल कुमावत, महावीर सिंह चूली, रमेशसिंह इंदा, ईश्वर चन्द नवल शामिल थे। इनके साथ ही कोषाधिकारी जसराज चौहान, अधीक्षण अभियंता सुरा राम चौधरी, हजारीराम बालवा, पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. नारायण सिंह सोलंकी, जिला रसद अधिकारी कंवराराम, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विष्णु राम विश्नोई, सहायक वन संरक्षक छोटू सिंह भाटी, अधिशाषी अभियंता अक्षय पंचाल, तहसीलदार हुकमीचंद, पुलिस उप अधीक्षक बुद्धाराम चौधरी, विकास अधिकारी प्रदीप इनाणिया और रानीगांव ग्राम पंचायत की प्रशासक कमल कंवर समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, जन प्रतिनिधिगण और बहुत बड़ी तादाद में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने जल व पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ ली।