पीएम विश्वकर्मा योजना में राजस्थान की बड़ी उपलब्धि, 2.30 लाख पंजीकरण के साथ देश में चौथे स्थान पर
पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत राजस्थान में 2.30 लाख से अधिक कारीगरों का पंजीकरण हुआ है। प्रदेश देश में चौथे स्थान पर है, जबकि 62 हजार से अधिक ऋण स्वीकृत और 2.17 लाख से अधिक टूलकिट ई-वाउचर जारी किए गए हैं।
जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, जिनके नेतृत्व में राजस्थान में पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 2.30 लाख से अधिक कारीगरों का सफल पंजीकरण दर्ज किया गया है।
जयपुर, 20 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित पीएम विश्वकर्मा योजना राजस्थान में कारीगरों और शिल्पकारों के कौशल विकास, आजीविका संवर्धन और आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश ने योजना के तहत पंजीकरण, प्रशिक्षण और ऋण स्वीकृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राजस्थान में अब तक 2 लाख 30 हजार से अधिक कारीगरों का पंजीकरण हो चुका है, जिसके साथ प्रदेश देशभर में चौथे स्थान पर है। वहीं, इस योजना के तहत देशभर में 30 लाख पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया गया है।
पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को उनके कौशल को निखारने, आधुनिक उपकरणों का उपयोग करने, कार्य की गुणवत्ता सुधारने और उद्यमशीलता की समझ विकसित करने के लिए बुनियादी एवं उन्नत प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। राजस्थान में अब तक 2 लाख 22 हजार 473 लाभार्थियों का बुनियादी प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। पंजीकरण के मामले में बढ़ई और राजमिस्त्री श्रेणी के कारीगरों की संख्या सबसे अधिक है। प्रदेश में बढ़ई श्रेणी के 45 हजार 958 और राजमिस्त्री श्रेणी के 38 हजार 450 कारीगरों का पंजीकरण हुआ है।
योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को अधिकतम 3 लाख रुपये तक का ऋण रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा, औजारों की खरीद के लिए 15 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। राजस्थान में इस योजना के तहत 62 हजार से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। वहीं, पात्र कारीगरों को टूलकिट सहायता उपलब्ध कराने के लिए 2 लाख 17 हजार 84 ई-वाउचर जारी किए गए हैं। इस सहायता से कारीगरों को आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और कच्चे माल की खरीद में मदद मिलती है। इससे उनकी कार्यकुशलता बढ़ाने और व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहयोग उपलब्ध होता है।
केन्द्र सरकार ने पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत वर्ष 2028 तक देशभर में 30 लाख कारीगरों एवं शिल्पकारों के पंजीकरण का लक्ष्य रखा था। यह लक्ष्य निर्धारित समय से पहले ही पूरा हो गया। 30 सितंबर 2026 तक देशभर में कुल 30 लाख 3 हजार 925 कारीगरों एवं शिल्पकारों का पंजीकरण हो चुका था। इनमें से 24.39 लाख से अधिक कारीगरों का बुनियादी प्रशिक्षण पूरा हो गया है। इसके साथ ही देशभर में लगभग 5 हजार 350 करोड़ रुपये के 6.23 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं और 26.17 लाख से अधिक टूलकिट ई-वाउचर जारी हुए हैं।
योजना के प्रभाव का आकलन करने के लिए आईआईएम मुंबई द्वारा किए गए समवर्ती मूल्यांकन में भी प्रशिक्षण के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मूल्यांकन सर्वेक्षण में शामिल 93 प्रतिशत लाभार्थियों की आय में प्रशिक्षण के बाद उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। राजस्थान में पंजीकरण, प्रशिक्षण, ऋण स्वीकृति और टूलकिट सहायता के आंकड़े दर्शाते हैं कि पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक उपकरणों और वित्तीय सहायता से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।