प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत राजस्थान के कृषि क्षेत्रों में फसल विविधीकरण और सतत खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्य करते किसान।

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत राजस्थान ने कृषि विकास और फसल विविधीकरण के क्षेत्र में प्रभावी प्रदर्शन किया है। देशभर से चयनित 100 जिलों में राजस्थान के 8 जिलों को शामिल किया गया है। इनमें नागौर ने फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देने में 18.44 पॉइंट्स के साथ देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। समग्र प्रदर्शन में भी नागौर 84.13 पॉइंट्स के साथ दूसरे स्थान पर रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुरूप किसानों को सक्षम और समृद्ध बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, भंडारण क्षमता मजबूत करने और किसानों को कृषि ऋण उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। योजना के तहत कृषि ऋण और फसल उत्पादन बढ़ाने से लेकर भंडारण तक के लिए छह उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं।

फसल विविधीकरण में नागौर देशभर में अव्वल

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देने में नागौर जिले ने 18.44 पॉइंट्स के साथ देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है। फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाने और किसानों तक लंबी अवधि के कृषि ऋण की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने में नागौर चौथे स्थान पर रहा। खेतों की उत्पादकता बढ़ाने तथा बेहतर प्रशासन और सेवाओं की प्रभावी आपूर्ति के मामले में जिले ने पांचवां स्थान हासिल किया है। वहीं, सिंचाई के बुनियादी ढांचे में सुधार के मामले में पाली जिला देशभर में आठवें स्थान पर रहा।

देशभर से चयनित 100 आकांक्षी जिलों में 11 विभागों की 36 योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना, भंडारण क्षमता सुदृढ़ करना और कृषि ऋण की उपलब्धता बेहतर बनाना है।

सभी योजनाओं और निर्धारित उद्देश्यों के आधार पर समग्र प्रदर्शन की रैंकिंग में नागौर जिला 84.13 पॉइंट्स के साथ देशभर में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि पाली जिले ने 11वां स्थान प्राप्त किया।

जैसलमेर की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए जिलों का चयन तीन प्रमुख मानकों के आधार पर किया गया था। इनमें कम कृषि उत्पादकता, कम फसल सघनता और खेती के लिए कम ऋण उपलब्धता शामिल हैं।

इसी योजना के तहत जैसलमेर जिले में 2 हजार एकड़ क्षेत्र में एकीकृत कीट प्रबंधन आधारित जीरे की खेती और 500 एकड़ क्षेत्र में सौर ऊर्जा आधारित स्प्रिंकलर सिंचाई के इस्तेमाल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। इन पहलों के माध्यम से पानी का कुशल उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल और कृषि उत्पादकता बढ़ाने को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

योजना में फसल विविधीकरण को किसानों की समृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और कृषि क्षेत्र के दीर्घकालीन विकास का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। इससे किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और फसल संबंधी जोखिमों से सुरक्षा मिलने के साथ बेहतर आय के अवसर उपलब्ध होते हैं। बाजरा और दलहन जैसी पोषक फसलों का उत्पादन बढ़ने से पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिलती है।

36 योजनाओं के माध्यम से कृषि विकास पर जोर

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ अन्य मंत्रालयों, नीति आयोग, नाबार्ड और राज्य सरकारों के समन्वय से कुल 36 योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें पीएम-किसान सम्मान निधि, पीएम-फसल बीमा योजना, पीएम-किसान मानधन योजना, पीएम-कुसुम योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, कृषोन्नति योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना शामिल हैं।

इसके अलावा अटल भूजल योजना, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना, प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्राथमिक कृषि साख समितियों का कम्प्यूटरीकरण और किसान क्रेडिट कार्ड सहित विभिन्न योजनाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।

इन योजनाओं के संयुक्त क्रियान्वयन से कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने, सिंचाई सुविधाओं में सुधार करने और कृषि उपज के भंडारण की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

जिला स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक निगरानी व्यवस्था

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर तथा राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समितियों का गठन किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय कार्यकारी समिति और सचिव की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय निगरानी समिति योजना की देखरेख कर रही हैं।

नीति आयोग द्वारा विकसित पोर्टल पर जिलों की मासिक रैंकिंग भी की जा रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से चयनित जिलों के प्रदर्शन का आकलन कर योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी की जाती है।

योजना के तहत निरंतर निगरानी और रैंकिंग से आकांक्षी जिलों के प्रदर्शन में सुधार लाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ देश के समग्र कृषि विकास को गति देना है। राजस्थान के नागौर और पाली जिलों की रैंकिंग तथा जैसलमेर में अपनाई गई कृषि पद्धतियों को योजना के तहत राज्य के प्रदर्शन के प्रमुख उदाहरणों के रूप में देखा जा रहा है।

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