तस्वीर में रेलवे परिसर की छत पर लगे सौर ऊर्जा पैनल दिखाई दे रहे हैं।   

उत्तर मध्य रेलवे ने ऊर्जा संरक्षण और हरित ऊर्जा उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान रेलवे ने अपने सौर ऊर्जा संयंत्रों से कुल 12.3 मिलियन यूनिट हरित बिजली का उत्पादन किया। इससे रेलवे के राजस्व में 7.7 करोड़ रुपये की बचत हुई और 10,375 मीट्रिक टन कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन को रोकने में मदद मिली। इस दौरान उत्तर मध्य रेलवे की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता बढ़कर 26.8 मेगावाट पीक हो गई है।

उत्तर मध्य रेलवे हरित ऊर्जा के सतत उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है। महाप्रबंधक श्री नरेश पाल सिंह के मार्गदर्शन में इसे मिशन के रूप में लिया गया है। पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता की दिशा में जारी प्रयासों के तहत रेलवे 18 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है। यह कार्य आगामी वर्ष तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद उत्तर मध्य रेलवे की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 30 मेगावाट से अधिक हो जाएगी।

उत्तर मध्य रेलवे में वर्ष 2024-25 तक सौर ऊर्जा यानी हरित ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता 12.7 मेगावाट पीक थी। वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें 9.7 मेगावाट पीक की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी गई, जिससे कुल स्थापित क्षमता बढ़कर 22.4 मेगावाट पीक हो गई। इसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से सितंबर के दौरान 4.4 मेगावाट पीक की अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई। इससे वर्तमान में रेलवे की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 26.8 मेगावाट पीक तक पहुंच गई है।

उत्तर मध्य रेलवे ने 26.8 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्रों से वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही, अप्रैल-सितंबर 2026 में कुल 12.3 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया। सौर ऊर्जा से हुए इस उत्पादन ने पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में योगदान दिया है। साथ ही, इससे रेलवे को भविष्य में और अधिक सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की प्रेरणा मिल रही है।

सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से सितंबर के दौरान रेलवे के राजस्व में 7.7 करोड़ रुपये की बचत हुई। इसके साथ ही 10,375 मीट्रिक टन कार्बन डाईऑक्साइड यानी ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन को रोका गया। यह उपलब्धि ऊर्जा की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी दर्शाती है।

ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में उत्तर मध्य रेलवे ने पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। रेलवे को “जोनल रेलवे कैटेगरी” में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार-2023 का प्रथम पुरस्कार मिला। इसके अलावा, “उत्तर प्रदेश ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार-2024” में भी प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। वहीं, “बिल्डिंग कैटेगरी” में सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन को “सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट” से सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों के माध्यम से ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में रेलवे के प्रयासों और कार्यों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है।

उत्तर मध्य रेलवे में हरित ऊर्जा कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रधान मुख्य बिजली इंजीनियर श्री जे.सी.एस. बोरा के नेतृत्व और दिशा-निर्देश में पूरे मनोयोग एवं संकल्प के साथ लागू की गई है। सौर ऊर्जा क्षमता में निरंतर वृद्धि, बिजली उत्पादन से हुई आर्थिक बचत और कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन में कमी के साथ रेलवे ऊर्जा संरक्षण की दिशा में अपने प्रयास आगे बढ़ा रहा है।

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