एसआईआर पर मन्नालाल रावत का कांग्रेस पर हमला, उठाए 2018 के रुख पर सवाल
भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने कहा कि 2018 में कांग्रेस ने ही 42 लाख फर्जी मतदाता हटाने की मांग की थी, अब एसआईआर पर सवाल उठाना विरोधाभासी है।
तस्वीर में भाजपा सांसद मन्नालाल रावत गले में पार्टी का पटका पहने हाथ में पत्र लिए दिख रहे हैं।
जयपुर, 10 अक्टूबर 2026। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने कांग्रेस के पूर्व रुख पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एसआईआर को लोकतंत्र मजबूत करने और मतदाता सूची को पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने की महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि वर्ष 2018 में राजस्थान में कांग्रेस ने ही चुनाव आयोग से 42 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की थी। ऐसे में अब एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाना कांग्रेस के पहले के रुख से विरोधाभासी है।
रावत ने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण किसी राजनीतिक दल को लाभ या नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र मतदाता के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। वर्तमान में देश के नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और विश्वसनीय बनाए रखना निर्वाचन आयोग के प्रमुख दायित्वों में शामिल है।
भाजपा एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद मन्नालाल रावत ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भी भागीदारी रहती है। बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) के माध्यम से विभिन्न राजनीतिक दल अपने प्रतिनिधि नियुक्त करते हैं, जो पुनरीक्षण प्रक्रिया में सहभागी होते हैं। भाजपा के 9 लाख सहित सभी विपक्षी दलों के करीब 46 लाख बीएलए इस प्रक्रिया में शामिल हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस एसआईआर पर सवाल खड़े कर रही है, तो उसे स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह अपने ही नियुक्त प्रतिनिधियों की भूमिका और कार्यप्रणाली पर अविश्वास कर रही है।
रावत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी विषय पर सवाल उठाना राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन तथ्यों और प्रक्रिया के आधार पर चर्चा करना भी आवश्यक है। एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनमें मृत मतदाताओं, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों और अनुपस्थित मतदाताओं से जुड़े मामले शामिल हैं। उन्होंने बताया कि करीब 2.89 करोड़ मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जबकि 1.01 करोड़ डुप्लीकेट प्रविष्टियां बताई गई हैं। इन आंकड़ों के संदर्भ में पूरी प्रक्रिया और उसके विभिन्न चरणों को समझना आवश्यक है, ताकि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके।
राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल सहित विपक्ष के नेताओं की ओर से एसआईआर पर उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में रावत ने कहा कि कांग्रेस पहले स्वयं मतदाता सूची के शुद्धिकरण की आवश्यकता व्यक्त कर चुकी है। उन्होंने कहा कि केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के रुख और वहां की परिस्थितियों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा की जानी चाहिए। उनके अनुसार, मतदाता सूची का शुद्धिकरण किसी दल विशेष के हितों से ऊपर लोकतंत्र के व्यापक हित से जुड़ा विषय है।
रावत ने एसआईआर को नई प्रक्रिया मानने से इनकार करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारतीय लोकतंत्र में अलग-अलग समय पर मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण की प्रक्रियाएं अपनाई गई हैं। आजादी के बाद से अब तक 9 एसआईआर प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मतदाता सूची का नियमित सत्यापन और समय-समय पर एसआईआर आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि एसआईआर को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बनाने के बजाय मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और लोकतंत्र की मजबूती के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। रावत ने कांग्रेस से प्रक्रिया पर तथ्यपरक चर्चा करने और लोकतंत्र को मजबूत बनाने वाली इस पहल में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय मतदाता सूची स्वस्थ लोकतंत्र की मजबूत नींव है।
प्रभारी, भाजपा प्रदेश मीडिया विभाग की ओर से जारी इस प्रेस विज्ञप्ति में एसआईआर को मतदाता सूची के शुद्धिकरण और लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताया गया है।