जयपुर: टेलीग्राम ट्रेडिंग फ्रॉड में ₹3.81 करोड़ की ठगी, अयोध्या से आरोपी गिरफ्तार
सीएमसी फॉरेक्स के नाम से फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बनाकर साइबर ठगों ने झांसा दिया, पुलिस ने बैंक खाते से जुड़े आरोपी आलोक को दबोचा।
तस्वीर में साइबर ठगी का आरोपी आलोक मैरून शर्ट पहने खड़ा दिखाई दे रहा है।
जयपुर। ऑनलाइन ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर ₹3,81,37,677 की साइबर ठगी के मामले में राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने उत्तर प्रदेश के फैजाबाद (अयोध्या) से आरोपी आलोक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर ‘CMC Forex’ और ‘CMC Global CS’ के नाम से फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तैयार कर टेलीग्राम के जरिए परिवादी से करोड़ों रुपये की ठगी में इस्तेमाल किए गए लाभार्थी बैंक खाते से जुड़ी भूमिका निभाने का आरोप है।
महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए जारी निर्देशों के क्रम में केंद्रीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन जयपुर ने यह कार्रवाई की। महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि 5 अक्टूबर 2025 को दर्ज रिपोर्ट में परिवादी ने बताया था कि वह ऑनलाइन ट्रेडिंग एवं निवेश के संबंध में गूगल सर्च इंजन पर जानकारी प्राप्त कर रहा था। इसी दौरान उसे सीएमसी फॉरेक्स/सीएमसी ग्लोबल सीएस के नाम से ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की जानकारी मिली।
आरोपियों ने स्वयं को उक्त कंपनी के भारत स्थित कस्टमर केयर अथवा मैनेजमेंट से संबंधित बताते हुए टेलीग्राम के माध्यम से परिवादी से संपर्क किया। ऑनलाइन ट्रेडिंग में कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर उससे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 3,81,37,677 रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।
जांच में सामने आया कि साइबर ठगों ने प्रतिष्ठित विदेशी ट्रेडिंग कंपनी सीएमसी का प्रतिरूपण करते हुए उससे मिलती-जुलती वेबसाइट और फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया था। इसके बाद खुद को कंपनी के भारत स्थित कस्टमर केयर एवं मैनेजमेंट से जुड़ा बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाया जाता था।
आरोपियों ने परिवादी को विभिन्न कंपनियों में निवेश करने के लिए टेलीग्राम के माध्यम से लगातार ट्रेडिंग संबंधी निर्देश दिए। शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए परिवादी द्वारा निवेश की गई छोटी रकम में से कुछ राशि वापस कर दी गई। इससे परिवादी को प्लेटफॉर्म के वास्तविक होने का भरोसा हो गया और उसने आगे अधिक रकम निवेश करना शुरू कर दिया।
इसके बाद आरोपियों ने परिवादी से अलग-अलग बैंक खातों में लगातार रकम जमा करवाई। वहीं, फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट में निवेश के मुकाबले लगातार बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता रहा। इससे परिवादी को विश्वास हो गया कि उसके खाते में करोड़ों रुपये का लाभ जमा हो चुका है।
जब परिवादी ने अपनी रकम निकालने का प्रयास किया तो साइबर ठगों ने इनकम टैक्स, करेंसी एक्सचेंज फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट और मार्जिन गारंटी आदि के नाम पर अलग-अलग शुल्क बताकर अतिरिक्त रकम जमा करवाना शुरू कर दिया। हर बार रकम जमा कराने के बाद नई शर्त अथवा शुल्क बताकर फिर भुगतान करने के लिए दबाव बनाया गया।
इस तरह परिवादी से बार-बार रकम जमा करवाई गई, लेकिन फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट में दिखाई जा रही करोड़ों रुपये की रकम उसे वास्तविक रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई।
अनुसंधान के दौरान पुलिस बैंक रिकॉर्ड और मनी ट्रेल का विश्लेषण कर रही है। इसी क्रम में एक लाभार्थी बैंक खाते का संबंध शिव बेकर्स एंड फास्ट फूड से सामने आया। इस खाते में परिवादी से ठगी कर 20 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम आगे किन-किन बैंक खातों में पहुंचाई गई और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
बैंक रिकॉर्ड एवं तकनीकी अनुसंधान के आधार पर आरोपी आलोक निवासी फैजाबाद (अयोध्या), उत्तर प्रदेश की पहचान की गई। अनुसंधान में उसकी भूमिका साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लिए प्रयुक्त लाभार्थी बैंक खाते से जुड़ी हुई सामने आई। आरोपी द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खाते एवं वित्तीय माध्यम का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने तथा उसके आगे लेन-देन के लिए किया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर मामले में अग्रिम अनुसंधान किया जा रहा है।
पुलिस मामले में सीडीआर, सीएएफ, आईपीडीआर और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की मनी ट्रेल का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची, इसके आगे किस प्रकार लेन-देन हुआ और नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग जुड़े हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
यह कार्रवाई उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम श्री शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन में केंद्रीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन राजस्थान जयपुर के थानाधिकारी एवं उप अधीक्षक पुलिस श्री गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने की। टीम में पुलिस निरीक्षक राधेश्याम, कांस्टेबल मनोज सामोता, कृष्ण यादव तथा कांस्टेबल चालक सुबे सिंह शामिल रहे। मामले में मनी ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों की जांच जारी है।