भारतीय रेलवे में अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर बड़ा कदम, 1450 ट्रेनों में शुरू है OBHS सेवा
भारतीय रेलवे ने अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए 1450 ट्रेनों में OBHS सेवा और स्टेशनों पर कई नई सुविधाएं लागू की हैं।
भारतीय रेलवे ने ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों से निकलने वाले अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक व्यवस्था लागू की है। अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े मामलों की निगरानी और बेहतर संचालन के लिए मंडलों, क्षेत्रीय रेलों और रेलवे बोर्ड स्तर पर समर्पित पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन (ईएनएचएम) विभाग स्थापित किए गए हैं।
केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारतीय रेल ने अपशिष्ट के संग्रहण, प्रसंस्करण और निपटान के लिए एक समग्र प्रणाली विकसित की है। इसके तहत रेलवे स्टेशनों पर स्रोत स्तर पर ही अपशिष्ट संग्रहण और पृथक्करण के लिए दोहरे कूड़ेदान उपलब्ध कराए गए हैं।
रेलवे ट्रेनों में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट को नियमित अंतराल पर निर्धारित अपशिष्ट प्रबंधन स्टेशनों पर एकत्र करता है। इन स्टेशनों पर अपशिष्ट के उचित निपटान के लिए शहरी स्थानीय निकायों और नगर निकायों के साथ आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
भारतीय रेल ने परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न स्टेशनों पर बायोगैस संयंत्र, कम्पोस्टिंग संयंत्र और प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीन जैसी अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाएं स्थापित की हैं। वर्तमान में रेलवे स्टेशनों पर 13 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 5,095 कि.ग्रा./दिन है। इसके अलावा 171 कम्पोस्टिंग संयंत्रों की स्थापित क्षमता 24,817 कि.ग्रा./दिन और 8 मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी की क्षमता 7,725 कि.ग्रा./दिन है। साथ ही 858 प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनें भी लगाई गई हैं।
नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के लागू होने और माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में भारतीय रेल ने अपने विभिन्न प्रतिष्ठानों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
रेलवे बोर्ड ने रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों, रेलवे कॉलोनियों, अस्पतालों, कार्यशालाओं, उत्पादन इकाइयों और अन्य सभी रेलवे प्रतिष्ठानों को शामिल करते हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इस एसओपी में अपशिष्ट के पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक निपटान के साथ-साथ निगरानी तंत्र तथा सभी प्रशासनिक स्तरों पर निर्धारित जिम्मेदारियों के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
क्षेत्रीय रेलों ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुसार बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आने वाली अपनी इकाइयों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भारतीय रेल के सभी प्रतिष्ठानों और ट्रेनों में वर्तमान अपशिष्ट उत्पादन का आकलन करने के लिए “एज़-इज़ वेस्ट कैरेक्टराइजेशन एंड क्वांटिफिकेशन स्टडी” की योजना बनाई गई है।
अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए क्षेत्रीय रेलों ने व्यापक कार्य-योजनाएं तैयार की हैं। इसके तहत समय-समय पर ऑडिट कराने, कार्यान्वयन की निगरानी करने और नियमित रूप से रेलवे बोर्ड को अनुपालन रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए समर्पित नोडल अधिकारियों को नामित किया गया है। मंडलों को भी प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कार्य-योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
यात्रियों को पूरी यात्रा के दौरान स्वच्छ और साफ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग सेवा (ओबीएचएस) भी संचालित की जा रही है। वर्तमान में 1,450 जोड़ी लंबी दूरी की चिन्हित ट्रेनों में यह सेवा उपलब्ध है।
इसके अलावा 63 स्टेशनों पर क्लीन ट्रेन स्टेशन (सीटीएस) योजना लागू की गई है, जिसके तहत 2,800 ट्रेनों को कवर किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत सफाई उपकरणों से लैस कर्मचारियों की समर्पित टीम ट्रेन के हॉल्ट के दौरान कोचों के शौचालयों और वॉशबेसिनों की सफाई करती है तथा ट्रेनों में लगे कूड़ेदानों से कचरा एकत्र करती है।
भारतीय रेलवे की यह व्यवस्था ट्रेनों और रेलवे परिसरों में स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रसंस्करण और पर्यावरण की दृष्टि से सतत् अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में लागू की गई है।