तस्वीर में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे और अन्य गणमान्य व्यक्ति पुस्तिका दिखाते हुए नजर आ रहे हैं।

हीमोफीलिया जैसी दुर्लभ बीमारी और उससे जुड़े उपचार को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में हीमोफिलिया से पीड़ित तीन-चौथाई से अधिक लोगों की समय पर पहचान नहीं हो पाती है। इसके कारण बीमारी की शुरुआत के बाद समय पर उपचार शुरू नहीं हो पाता और रोग बढ़ता जाता है।

राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने शनिवार को लोकभवन, राजस्थान में हीमोफीलिया फेडरेशन, इण्डिया द्वारा आयोजित हीमोफीलिया जागरूकता राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की और कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया अत्यधिक रक्तस्राव से जुड़ी बीमारी है और इसका प्रभाव केवल स्वास्थ्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसका संबंध समाज, परिवार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय से भी है।

राज्यपाल ने चिकित्सा सेवा से जुड़े सभी चिकित्साकर्मियों से अपेक्षा की कि वे मनी-माईंडेड नहीं होकर सर्विस-माईंडेड हों। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों की भूमिका केवल उपचार तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि लोगों को बीमारी और उसके उपचार के बारे में जागरूक करने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

श्री बागडे ने केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को विश्व की सबसे बड़ी चिकित्सा राहत योजना बताते हुए कहा कि इसके तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने कहा कि आठ वर्ष पहले आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को भारत में इस विचार के साथ शुरू किया गया कि प्रत्येक भारतीय को उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती स्वास्थ्य सेवा मिलनी चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि आज देश के 6 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 5 लाख रुपये वार्षिक स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है। उन्होंने हीमोफिलिया से पीड़ित रोगियों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी प्रकार की दुर्लभ बीमारियों के निदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

हीमोफीलिया जागरूकता राष्ट्रीय अभियान के माध्यम से राज्यपाल ने समय पर बीमारी की पहचान, उपचार की जानकारी और स्वास्थ्य योजनाओं की पहुंच को लेकर व्यापक जागरूकता की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया के प्रति जागरूकता ही इलाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Tags: