3477 गोशालाओं में से 3207 को अनुदान की वित्तीय स्वीकृति, भुगतान प्रक्रिया जारी
राजस्थान में 3477 गोशालाओं के दूसरे चरण के अनुदान की प्रक्रिया जारी है। 3207 को वित्तीय स्वीकृति और 1892 को भुगतान किया जा चुका है।
तस्वीर में माथे पर तिलक लगाए और गले में दुपट्टा पहने मंत्री जोराराम कुमावत मुस्कुराते नजर आ रहे हैं।
राज्य सरकार ने गोवंश संरक्षण एवं संवर्द्धन के तहत गोशालाओं को अनुदान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। पशुपालन, गोपालन एवं देवस्थान मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने कहा कि राज्य सरकार गोशालाओं के कल्याण के प्रति वचनबद्ध है और गोवंश संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए लगातार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। गोशालाओं के सुचारू संचालन के लिए विभाग की ओर से सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में सरकार ने दो चरणों में अनुदान की राशि में क्रमशः 10 और 15 प्रतिशत की वृद्धि की है। इससे दो वर्षों में गोशालाओं के अनुदान में कुल 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
गोपालन मंत्री श्री कुमावत ने बताया कि गोशालाओं के बिलों के पुनर्भरण का काम सुचारू रूप से चल रहा है। विभाग द्वारा निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया के तहत गोशालाओं को अनुदान का भुगतान किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत पिछले दिनों बारां जिले में आयोजित कार्यक्रम में दूसरे चरण के लिए 751 गोशालाओं को 250.00 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में दूसरे चरण की अनुदान प्रक्रिया के बिलों के पुनर्भरण के लिए कुल 3477 गोशालाओं ने आवेदन किया था। इनमें से 1892 गोशालाओं को 557.86 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शेष गोशालाओं के भुगतान की प्रक्रिया जारी है और शीघ्र ही उनका भुगतान भी कर दिया जाएगा।
श्री कुमावत ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दूसरे चरण के लिए 3477 गोशालाओं में से 3418 गोशालाओं के भुगतान की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी गई है। इनमें से 3207 गोशालाओं की वित्तीय स्वीकृति भी जारी की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि आईएफएमएस पर 3165 गोशालाओं के लिए 938.62 करोड़ रुपये के बिल भुगतान के लिए अग्रेषित किए गए थे। इनमें से 1892 गोशालाओं को 555.86 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष गोशालाओं के बिलों का भुगतान प्रक्रियाधीन है।
मंत्री श्री कुमावत ने कहा कि विभाग का उद्देश्य पात्र गोशालाओं को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराना तथा अनुदान व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना है।