भारत-जापान ने रक्षा और एआई समेत कई क्षेत्रों में किए अहम समझौते

16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में रक्षा, आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग पर केंद्रित ऐतिहासिक समझौतों के साथ दोनों देशों के संबंधों का नया अध्याय शुरू हुआ।

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Update: 2026-07-02 10:55 GMT

नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल बैठक करते हुए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (गोलाकार इनसेट में)।

नई दिल्ली। भारत और जापान ने गुरुवार को रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), आर्थिक सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक समझौतों के साथ अपनी विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र की पहली सह-विकास परियोजना पर भी हस्ताक्षर किए गए। नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य में इस साझेदारी के नए अध्याय की घोषणा की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में उनके पहले भारत दौरे पर स्वागत करते हुए कहा कि वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री, दूरदर्शी और लोकप्रिय नेता हैं। उन्होंने कहा कि ताकाइची जापान के नारा प्रान्त से आती हैं, जो भारत-जापान की साझा बौद्ध विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन में उन्होंने कहा था कि वैश्विक उथल-पुथल के वर्तमान दौर में पारस्परिक विश्वास सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति है और भारत-जापान साझेदारी इस कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक भारत के विकास में जापान ने कई दशकों से भरोसेमंद साझेदार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और प्रधानमंत्री ताकाइची की इस यात्रा के साथ विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी का नया अध्याय शुरू हो रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत और जापान दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं तथा स्वतंत्र, समृद्ध और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र दोनों की साझा प्राथमिकता है। क्षेत्र की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और बाजार आधारित अर्थव्यवस्थाओं के रूप में दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं, जो पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेंगी।

प्रौद्योगिकी सहयोग को भविष्य की साझेदारी का सबसे मजबूत स्तंभ बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में संयुक्त वक्तव्य जारी करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत के एआई पारिस्थितिकी तंत्र की कई अग्रणी संस्थाओं ने जापानी साझेदारों के साथ समझौते किए हैं। जापान की सटीक प्रौद्योगिकी और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता का समन्वय वैश्विक एआई विकास को नई गति और मजबूती देगा।

रक्षा सहयोग में बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और जापान के बीच पहली रक्षा सह-विकास परियोजना पर हस्ताक्षर की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नौसेना रेडियो एंटीना परियोजना दोनों देशों की रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी में नया अध्याय खोलेगी। दोनों देश अब ऐसी रक्षा प्रौद्योगिकियों का संयुक्त विकास करेंगे, जो क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करेंगी।

स्वास्थ्य और जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग का विस्तार किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि फार्मा, चिकित्सा उपकरण और बायोटेक क्षेत्र में हुए समझौते वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करेंगे। भारत की उत्पादन क्षमता और जापान की गुणवत्ता को मिलाकर दुनिया को किफायती, भरोसेमंद और उन्नत स्वास्थ्य समाधान उपलब्ध कराए जाएंगे।

आर्थिक संबंधों पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-जापान निवेश साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। पिछले एक वर्ष में 100 से अधिक नए कारोबारी समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिनसे भारत में 10 अरब डॉलर से अधिक का जापानी निवेश आएगा। वित्तीय सेवा एजेंसियों के बीच हुआ नया समझौता पूंजी और निवेश प्रवाह को और सुगम बनाएगा।

उन्होंने कहा कि अगले 10 वर्षों में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन का निवेश आकर्षित करने और भारत में जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया गया है। भारत में जारी सुधारों से कारोबार करना आसान हुआ है और जापानी कंपनियां इसका लाभ उठा सकती हैं।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त रोडमैप की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से सेमीकंडक्टर, क्वांटम और उन्नत सामग्रियों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ाई जाएगी।

दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भी कई नई पहल शुरू कीं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-जापान बायोगैस पहल के तहत भारत में 1,000 बायोगैस और जैविक उर्वरक संयंत्र स्थापित करने में सहयोग दिया जाएगा। इससे गोवर्धन पहल को मजबूती मिलेगी तथा भारतीय गांवों में सतत विकास, समृद्धि और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा मिलेगा। तेल संकट जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए ऊर्जा लचीलापन पहल भी शुरू की गई है। बैटरी, हरित हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा भविष्य को नई दिशा देगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान आर्थिक सुरक्षा को साझा सुरक्षा तथा ऊर्जा परिवर्तन को साझा अवसर मानते हैं और दोनों मिलकर इन्हें आगे बढ़ाएंगे।

उन्होंने भारत-जापान नेक्स्ट जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप फ्रेमवर्क की स्थापना की भी घोषणा की। इसके माध्यम से ऑटोमोबाइल क्षेत्र की सफलता को जहाज निर्माण, विमानन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में दोहराने का लक्ष्य रखा गया है।

जन-से-जन संपर्क को दोनों देशों के संबंधों की बड़ी ताकत बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रतिभा गतिशीलता, कौशल विकास और तकनीकी इंटर्नशिप कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा। साथ ही अनुसंधान, शिक्षा और स्टार्टअप सहयोग को भी मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अगले वर्ष भारत और जापान राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे। इस अवसर पर संस्कृति, पर्यटन और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा किया जाएगा।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। सांस्कृतिक मूल्यों से लेकर आधुनिक प्रौद्योगिकी तक दोनों देशों की सोच और दृष्टिकोण में समानता है तथा उनके संबंधों की नींव अटूट पारस्परिक विश्वास पर आधारित है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह विशेष साझेदारी मजबूत और समृद्ध जापान, विकसित भारत के संकल्प तथा वैश्विक प्रगति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

शिखर सम्मेलन के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यापार एवं निवेश, आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियों, रक्षा और जन-से-जन संपर्क सहित भारत-जापान संबंधों के सभी प्रमुख क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

विदेश मंत्रालय के अनुसार शिखर सम्मेलन में तीन महत्वपूर्ण दस्तावेज अपनाए गए, जिनमें आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त घोषणा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग पर संयुक्त वक्तव्य और ऊर्जा लचीलेपन पर संयुक्त वक्तव्य शामिल हैं। दोनों नेताओं की उपस्थिति में आर्थिक सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों तथा अनुसंधान एवं विकास से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों और अन्य समझौतों का आदान-प्रदान भी हुआ। साथ ही अगले वर्ष भारत-जापान राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाली गतिविधियों के कैलेंडर पर भी सहमति बनी।

इन व्यापक समझौतों और पहलों के साथ भारत और जापान ने रक्षा, प्रौद्योगिकी, निवेश, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आपूर्ति श्रृंखला, अनुसंधान और जनसंपर्क जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को अभूतपूर्व विस्तार देते हुए अपनी विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को नए युग में प्रवेश करा दिया।

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