अहमदाबाद में आयोजित 12वें अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव में पाठकों के लिए विभिन्न विषयों की पुस्तकें उपलब्ध हैं।

अहमदाबाद में 24 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव 2026 की शुरुआत हुई। साबरमती रिवरफ्रंट स्थित इवेंट सेंटर में आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने किया। उद्घाटन समारोह में स्वतंत्रता सेनानी सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन और योगदान पर आधारित पुस्तक ‘Sardar Teja Singh Samundri: Life and Legacy’ के गुजराती संस्करण का विमोचन किया गया।

अहमदाबाद नगर निगम और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) की ओर से आयोजित महोत्सव का यह 12वां संस्करण है। यह आयोजन 1 नवंबर तक चलेगा। महोत्सव में 700 पुस्तक स्टॉल लगाए गए हैं। यहां विभिन्न विषयों की पुस्तकों के साथ कार्यशालाओं, कविता, गजल और संगीत सत्रों, पुस्तक निर्माण, लेखन, बाल साहित्य और वैचारिक परिचर्चाओं का आयोजन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक पद पर 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह पुस्तक महोत्सव ज्ञान, साहित्य और संस्कृति के आदान-प्रदान को नई दिशा देगा। उन्होंने सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन और विरासत पर आधारित पुस्तक के विमोचन को गर्व का क्षण बताया। समुंदरी स्वतंत्रता सेनानी, गुरुद्वारा सुधार आंदोलन के अग्रदूत और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के संस्थापक थे।

पटेल ने कहा कि पुस्तक महोत्सव संस्कृति और भाषाओं के बीच सेतु का काम करेगा। इससे ज्ञान के आदान-प्रदान को गति मिलेगी और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुजरात की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी। उन्होंने बच्चों को भारत के इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान से परिचित कराने तथा पुस्तकों को जीवनभर का साथी बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि आज के समय में बच्चों को पुस्तकों की ओर प्रेरित करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस प्रयास के लिए राष्ट्रीय पुस्तक न्यास और गुजरात सरकार को बधाई दी। संधू के अनुसार, सरदार तेजा सिंह समुंदरी का जीवन सामाजिक सुधार, जनसेवा और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा सुधार आंदोलन में समुंदरी की भूमिका और सामाजिक, राजनीतिक तथा शैक्षणिक सुधारों के लिए उनके प्रयास उनकी दूरदर्शी सोच को दर्शाते हैं। युवाओं, महिलाओं और दलितों के सशक्तीकरण में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। संधू ने वर्ष 1922 के गुरु का बाग मोर्चे का उल्लेख करते हुए इसे पंजाब में सफल अहिंसक आंदोलन का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया और इस संघर्ष के प्रति महात्मा गांधी की सराहना को याद किया।

संधू ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे और तकनीक तक सीमित नहीं है। इसके लिए ज्ञानवान, जिम्मेदार और नवाचार करने वाले नागरिकों की भी आवश्यकता है, जो आधुनिक कौशल हासिल करने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय विरासत से जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि सरदार तेजा सिंह समुंदरी का जीवन और विरासत आज की पीढ़ी के लिए भी प्रासंगिक हैं। उनका उदाहरण बताता है कि नेतृत्व का वास्तविक अर्थ अपने सिद्धांतों पर दृढ़ रहना और समाज के लिए सार्थक योगदान देना है।

उन्होंने यह भी कहा कि अनुवाद एक भाषा में व्यक्त इतिहास और विचारों को दूसरी भाषा के पाठकों तक पहुंचाने का माध्यम है। पुस्तक के गुजराती संस्करण से गुजरात के पाठकों को समुंदरी के योगदान को जानने का अवसर मिलेगा। संधू ने बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और पुस्तकालयों में पढ़ने के अनुकूल वातावरण तैयार करने की जरूरत बताई।

महोत्सव में आध्यात्मिक ज्ञान सहित लगभग सभी विषयों की पुस्तकें उपलब्ध हैं। राजुल भार्गव की परिकल्पना वाली ‘सनातन बोध’ श्रृंखला भी प्रदर्शित की जा रही है, जिसका उद्देश्य युवा पाठकों को सनातन धर्म के शाश्वत ज्ञान और मूल्यों से परिचित कराना है।

आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में डोम-1 में मुख्य मंच, बाल मंडप और लेखकों का कोना शामिल हैं। डोम-2 में ज्ञान गंगा लेखन कार्यशाला और विचार मंथन आयोजित किए जा रहे हैं। गुजराती साहित्य, कविता, गजल, संगीत, लेखन, पुस्तक निर्माण, बाल साहित्य और विभिन्न विषयों पर परिचर्चाएं महोत्सव के कार्यक्रमों का हिस्सा हैं।

पुस्तकों के साथ हस्तशिल्प और वस्त्र कला को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएफटी) की ओर से ‘छाप’ प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें देशभर के 92 से अधिक पारंपरिक कारीगरों की कलाकृतियों को एनआईएफटी के विद्यार्थियों ने नए रूप में प्रस्तुत किया है।

अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव 1 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक चलेगा। पुस्तक विमोचन, साहित्यिक संवाद, रचनात्मक कार्यशालाओं और बच्चों के लिए विशेष गतिविधियों के माध्यम से यह आयोजन पाठकों, लेखकों और साहित्य प्रेमियों को एक साझा मंच उपलब्ध करा रहा है।