कलोल रेलवे स्टेशन का ₹48 करोड़ से पुनर्विकास, जानें क्या मिलीं सुविधाएं
अमृत भारत योजना से अपग्रेड हुआ गुजरात का कलोल स्टेशन, लिफ्ट, नए एफओबी, पार्किंग और सेकेंड एंट्री से रोजाना 40 हजार यात्रियों को मिलेगा फायदा।
तस्वीर में कलोल रेलवे स्टेशन पर बना नया चौड़ा फुट ओवर ब्रिज दिखाई दे रहा है।
कलोल रेलवे स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत लगभग ₹48.22 करोड़ की लागत से व्यापक पुनर्विकास पूरा हो गया है। पुनर्विकास के बाद स्टेशन को आधुनिक, सुरक्षित और सुगम स्वरूप मिला है। स्टेशन भवन के उन्नयन से लेकर नए प्रवेश द्वार, आकर्षक फ़साड, विस्तृत सर्कुलेटिंग एरिया, पार्किंग, फुट ओवर ब्रिज, प्लेटफॉर्म विस्तार, कवर ओवर प्लेटफॉर्म और दूसरे प्रवेश द्वार सहित प्रमुख कार्य पूरे किए गए हैं।
लगभग 14,000 वर्ग फीट क्षेत्र में आधुनिक स्टेशन भवन विकसित किया गया है। भवन में यात्रियों की सुविधा के लिए बेहतर यात्री सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। आधुनिक वास्तुशैली में तैयार स्टेशन भवन के आकर्षक फ़साड और भित्तिचित्र (Murals) के जरिए स्टेशन परिसर का सौंदर्यीकरण किया गया है।
यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 70 एवं 80 वर्ग फीट चौड़े दो नए प्रवेश द्वार और समान आकार के दो निकास द्वार विकसित किए गए हैं। इससे स्टेशन में यात्रियों के प्रवेश और निकास की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हुई है।
यात्रियों की सुरक्षित एवं सुगम आवाजाही के लिए लगभग 7,000 वर्ग फीट क्षेत्रफल में 40 फीट चौड़ा और 173 फीट लंबा फुट ओवर ब्रिज (FOB) तैयार किया गया है। यह फुट ओवर ब्रिज शहर के दोनों छोर और सभी प्लेटफॉर्मों को जोड़ता है। इससे यात्रियों को प्लेटफॉर्म बदलने में सुविधा मिलेगी।
फुट ओवर ब्रिज से सभी प्लेटफॉर्म पर आने-जाने के लिए लिफ्ट की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। इससे वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और अन्य यात्रियों को प्लेटफॉर्मों के बीच आवागमन में विशेष सुविधा मिलेगी।
यात्रियों को मौसम से सुरक्षा और बेहतर सुविधा देने के लिए प्लेटफॉर्म पर लगभग 20,000 वर्ग फीट का कवर शेड विकसित किया गया है। इसके साथ लगभग 2,370 वर्ग फीट का विशाल वेटिंग हॉल तैयार किया गया है, जिससे यात्रियों को आरामदायक प्रतीक्षास्थल मिलेगा।
स्टेशन परिसर में लगभग 18,750 वर्ग फीट क्षेत्र में व्यवस्थित पार्किंग सुविधा विकसित की गई है। यहां 55 चार पहिया और 110 दोपहिया वाहनों की पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। इससे स्टेशन परिसर में वाहनों की आवाजाही और पार्किंग व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित हुई है।
यात्रियों की बढ़ती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्लेटफॉर्म विस्तार का कार्य पूरा किया गया है। इसके साथ कवर ओवर प्लेटफॉर्म (COP) का कार्य भी पूर्ण हो चुका है। स्टेशन पर दूसरे प्रवेश द्वार (Second Entry) का विकास किया गया है, जिससे शहर के दोनों ओर से स्टेशन तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक हुआ है।
वर्तमान में लगभग 2,500 यात्री प्रतिदिन कलोल स्टेशन का उपयोग करते हैं और 30 से अधिक ट्रेनें यहां रुकती हैं। स्टेशन के पुनर्विकास से यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर कनेक्टिविटी और अधिक सुव्यवस्थित स्टेशन परिसर का लाभ मिलेगा।
क्षेत्र की बढ़ती जनसंख्या और भविष्य की यात्री आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कलोल स्टेशन को प्रतिदिन लगभग 40,000 यात्रियों की आवाजाही को संभालने की क्षमता के अनुरूप विकसित किया गया है। पुनर्विकास से यात्री सुविधाओं में व्यापक सुधार के साथ शहर के दोनों हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी भी सुनिश्चित हुई है।
आधुनिक स्टेशन भवन, बेहतर प्रवेश एवं निकास व्यवस्था, विशाल कवर शेड, वेटिंग हॉल, पार्किंग, लिफ्ट युक्त फुट ओवर ब्रिज, प्लेटफॉर्म विस्तार और दूसरे प्रवेश द्वार जैसी सुविधाओं के साथ पुनर्विकसित कलोल स्टेशन कलोल एवं आसपास के क्षेत्रों के लिए आधुनिक, स्मार्ट और सुगम रेल परिवहन का प्रमुख केंद्र बनकर तैयार हुआ है। यह पुनर्विकास यात्रियों के यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने के साथ क्षेत्रीय विकास को भी नई गति प्रदान करेगा।