तस्वीर में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत रेलवे और हाईवे की पांच प्रमुख मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं और ₹13,041 करोड़ के कुल निवेश से जुड़े आंकड़े प्रदर्शित किए गए हैं। यह तस्वीर काल्पनिक है और एआई द्वारा केवल संदर्भ के लिए बनाई गई है।

केंद्रीय कैबिनेट ने 19 अगस्त 2026 को रेलवे और हाईवे से जुड़ी पांच अहम मल्टीट्रैकिंग एवं सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं पर कुल ₹13,041 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इनमें खड़गपुर–भद्रक (रणीताल) चौथी लाइन, भद्रक–हरिदासपुर चौथी लाइन, गुम्मिडिपुंडी–गुडूर तीसरी और चौथी लाइन, कटक–पारादीप तीसरी और चौथी लाइन तथा मुजफ्फरपुर–सीतामढ़ी–सोनबरसा 4-लेन हाईवे शामिल हैं।

खड़गपुर–भद्रक (रणीताल) खंड हावड़ा–चेन्नई हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) का हिस्सा है और पूर्वी तथा दक्षिणी भारत को जोड़ने वाला प्रमुख कॉरिडोर है। इस मार्ग पर लंबी दूरी की एक्सप्रेस और मालगाड़ियों का संचालन होता है। कैबिनेट ने इस 173 किलोमीटर लंबे खंड में चौथी लाइन को मंजूरी दी है। परियोजना की अवधि चार वर्ष और लागत ₹3,352 करोड़ होगी। यह पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर तथा ओडिशा के बालासोर और भद्रक जिलों से होकर गुजरेगी। इसमें सुवर्णरेखा नदी पर 564 मीटर का एक मेगा ब्रिज, 41 बड़े और 169 छोटे पुल शामिल होंगे। यह जाखापुरा, टाटानगर और दुर्गापुर के स्टील हब को पारादीप और धामरा बंदरगाहों से जोड़ेगी।

इस चौथी लाइन से बालासोर स्थित इनलैंड कंटेनर डिपो से स्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट और पारादीप पोर्ट तक कंटेनर यातायात में सुधार होगा। संकरेल, कोलाघाट जैसी प्रमुख सीमेंट इकाइयों और विद्यसागर, आदित्यपुर जैसे SEZ को भी लाभ मिलेगा। परियोजना से सालाना 13 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता, हर साल 20.86 करोड़ किलोग्राम CO₂ की बचत, करीब 83 लाख पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ, 59 लाख मानव-दिवस रोजगार और हर साल ₹466 करोड़ की लॉजिस्टिक लागत बचत होने का अनुमान है। इससे कुल्दीहा वन्यजीव अभयारण्य, भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान और चांदिपुर बीच जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की पहुंच भी बेहतर होगी।

भद्रक–हरिदासपुर चौथी लाइन परियोजना 75 किलोमीटर लंबी होगी और इस पर ₹1,583 करोड़ खर्च होंगे। यह पूरा खंड ओडिशा में है तथा भद्रक और जाजपुर जिलों को कवर करेगा। यह भी हावड़ा–चेन्नई हाई डेंसिटी नेटवर्क का हिस्सा है और पूर्वी तट की कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मौजूदा लाइन का उपयोग 91 प्रतिशत तक पहुंच चुका है और बंदरगाहों तथा स्टील संयंत्रों की मांग बढ़ने के साथ इसके और संतृप्त होने की उम्मीद है। भद्रक और हरिदासपुर धामरा तथा पारादीप बंदरगाहों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण जंक्शन हैं।

इस परियोजना की अवधि चार वर्ष होगी। इसमें बैतरणी नदी पर 686 मीटर और ब्राह्मणी नदी पर 1,325 मीटर के दो मेगा ब्रिज, 18 बड़े और 106 छोटे पुल तथा दो ROB/RUB शामिल होंगे। यह टाटा नगर/दुर्गापुर और जाखापुरा के स्टील हब को धामरा, पारादीप और प्रस्तावित सुबर्णरेखा पोर्ट से जोड़ेगी। इससे महानदी कोलफील्ड्स (तालचर) से धामरा और पारादीप बंदरगाहों के जरिए दक्षिण भारत के बिजली संयंत्रों तक रेल–समुद्र–रेल कोयला परिवहन को सुविधा मिलेगी। परियोजना से सालाना 29 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई, 19.39 करोड़ किलोग्राम CO₂ की बचत यानी करीब 78 लाख पेड़ लगाने के बराबर लाभ, हर साल ₹433 करोड़ की लॉजिस्टिक लागत बचत और 26 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजन होगा।

गुम्मिडिपुंडी–गुडूर खंड में तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। 90 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की लागत ₹2,229 करोड़ होगी और इसे चार वर्ष में पूरा किया जाएगा। यह मौजूदा डबल लाइन खंड दिल्ली–चेन्नई और हावड़ा–चेन्नई दोनों हाई डेंसिटी नेटवर्क का हिस्सा है। यह विजाग–चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत आता है और ईस्ट कोस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर का प्रमुख हिस्सा है, जिसे भारत का पहला तटीय कॉरिडोर बताया गया है। इस खंड में लाइन क्षमता का उपयोग 131 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। परियोजना तिरुवल्लूर, तमिलनाडु और तिरुपति, आंध्र प्रदेश जिलों को कवर करेगी।

इस परियोजना में स्वर्णमुखी नदी पर 360 मीटर का एक मेगा ब्रिज, 21 बड़े, 127 छोटे पुल और 34 ROB/RUB शामिल होंगे। गुडूर चेन्नई, विजयवाड़ा और रेणिगुंटा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण इंटरचेंज है, जबकि गुम्मिडिपुंडी चेन्नई आने-जाने वाले दैनिक यात्रियों के लिए प्रमुख उपनगरीय केंद्र है। परियोजना से चेन्नई, कामराजार (एन्नोर) और कृष्णापट्टनम बंदरगाहों तक निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे सालाना 21.24 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई, 17.10 करोड़ किलोग्राम CO₂ की बचत यानी करीब 68 लाख पेड़ लगाने के बराबर लाभ, हर साल ₹382.15 करोड़ की लॉजिस्टिक लागत बचत और 61 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजन होगा। पुलिकट झील, नेलापट्टु पक्षी अभयारण्य और भगवान वीरराघव पेरुमल मंदिर जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होगी।

कटक–पारादीप (बदबांधा) के बीच 72 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। परियोजना की लागत ₹2,286 करोड़ और अवधि चार वर्ष होगी। यह खंड झारसुगुड़ा–कटक–पारादीप अत्यधिक उपयोग किए जाने वाले नेटवर्क (HUN) का हिस्सा है। यह पारादीप पोर्ट को ओडिशा के प्रमुख औद्योगिक और खनन क्षेत्रों—कलिंगानगर, क्योंझर और तालचर—से जोड़ता है। मौजूदा खंड का उपयोग 101 प्रतिशत तक पहुंच चुका है और क्षेत्र में बंदरगाहों तथा उद्योगों के विस्तार के साथ इसके 177 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। चौथी लाइन के साथ झारसुगुड़ा से पारादीप पोर्ट तक चार लाइन का मार्ग तैयार होगा, जिससे कटक और जगतसिंहपुर जिलों में लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ेगी।

इस परियोजना में एक वायाडक्ट, आठ बड़े पुल, 219 छोटे पुल और 12 ROB/RUB शामिल होंगे। यह पारादीप पोर्ट को हावड़ा–चेन्नई हाई डेंसिटी नेटवर्क से कटक में जोड़ेगी और ओडिशा के स्टील, लौह अयस्क तथा कोयला क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी मजबूत करेगी। परियोजना से स्टील संयंत्रों के लिए कच्चे माल और RSR (Rail-Sea-Rail) परिवहन के लिए कोयले की आवाजाही में सुविधा होगी। पारादीप पोर्ट, पारादीप फॉस्फेट लिमिटेड, IFFCO, पारादीप रिफाइनरी तथा औद्योगिक एवं खनन इकाइयों के बीच घरेलू और EXIM कार्गो परिवहन को भी लाभ मिलेगा। इससे सालाना 12 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई, 7.74 करोड़ किलोग्राम CO₂ की बचत यानी करीब 31 लाख पेड़ लगाने के बराबर लाभ, ₹172.97 करोड़ की वार्षिक लॉजिस्टिक लागत बचत और 49 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजन होगा।

बिहार में मुजफ्फरपुर–सीतामढ़ी–सोनबरसा कॉरिडोर को 4-लेन ब्राउनफील्ड हाईवे के रूप में विकसित करने को मंजूरी दी गई है। NH-22 के इस कॉरिडोर पर ₹3,591 करोड़ खर्च होंगे और इसे HAM मोड के तहत विकसित किया जाएगा। फ्लेक्सिबल पेवमेंट वाली इस परियोजना की निर्माण अवधि 30 महीने होगी। इसकी कुल लंबाई 83 किलोमीटर है और यह बिहार के मुजफ्फरपुर तथा सीतामढ़ी जिलों को कवर करेगी। इसमें सात बड़े पुल, तीन ROB और छह व्हीकुलर अंडरपास होंगे। बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा मेजर ब्रिज भी बनाया जाएगा।

इस हाईवे के बनने से मुजफ्फरपुर से सोनबरसा के बीच मौजूदा यात्रा समय दो घंटे से घटकर एक घंटे होने की उम्मीद है। सड़क पर भीड़ कम होने से यात्रियों को सुविधा और वाहन संचालन लागत में बचत होगी। परियोजना आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, पर्यटन को गति देने और समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान करेगी। इससे मुजफ्फरपुर जिले के बाबा गरीबनाथ मंदिर और सीतामढ़ी जिले के पुनौरा धाम (माता जानकी मंदिर) जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। यह पांच PM गति शक्ति आर्थिक नोड, चार सामाजिक नोड और दो लॉजिस्टिक नोड को भी जोड़ेगा।

कैबिनेट ब्रीफिंग में NDA 3.0 के दौरान लिए गए इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी फैसलों का भी विवरण दिया गया। इसके अनुसार रेलवे, हाईवे और मेट्रो से जुड़ी 62 रेलवे परियोजनाओं पर ₹2,74,176 करोड़, 38 हाईवे परियोजनाओं पर ₹3,82,119 करोड़ और 12 मेट्रो परियोजनाओं पर ₹1,46,444 करोड़ के फैसले लिए गए हैं।

इसी क्रम में पांच नए एयरपोर्ट और संशोधित UDAN के लिए ₹37,846 करोड़, एक प्रमुख बंदरगाह, एक शिप रिपेयर सुविधा और शिपिंग सुधारों के लिए ₹1,60,495 करोड़ तथा दो नए रोपवे के लिए ₹6,811 करोड़ के फैसले दर्ज हैं। पावर, स्मार्ट सिटी और हाउसिंग से जुड़े फैसलों में हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और बजटीय सहायता के लिए ₹71,193 करोड़, 12 इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी और इंडस्ट्रियल पार्क के लिए ₹65,292 करोड़ तथा PM आवास योजना के लिए ₹5,36,137 करोड़ शामिल हैं।

वाटर और एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़े फैसलों में जल जीवन मिशन के लिए ₹8.7 लाख करोड़, कोल गैसीफिकेशन स्कीम के लिए ₹37,500 करोड़ और PM Surya Sarovar Yojna के लिए ₹5,070 करोड़ का प्रावधान दर्ज है। हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े फैसलों में ECMS के लिए ₹22,919 करोड़, Semicon 2.0 के लिए ₹1,27,500 करोड़ और MPMS के लिए ₹62,500 करोड़ शामिल हैं।

19 अगस्त 2026 की कैबिनेट ब्रीफिंग में स्वीकृत पांच परियोजनाओं से रेलवे मल्टीट्रैकिंग और बिहार के 4-लेन हाईवे नेटवर्क के विस्तार को गति देने का निर्णय सामने आया है। कुल ₹13,041 करोड़ की इन परियोजनाओं में रेलवे क्षमता विस्तार, माल ढुलाई, बंदरगाह कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स लागत में बचत, रोजगार और सड़क यात्रा समय में कमी जैसे प्रत्यक्ष लाभ निर्धारित किए गए हैं।

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