टोंक में 1 नवंबर रविवार को रवि पुष्यामृत महासंयोग और मिनी धनतेरस का विशेष संयोग रहेगा। मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान, टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री के अनुसार, इस दिन पुष्य नक्षत्र, श्रीवत्स योग और साध्य योग के संयोग में जमीन-जायदाद, मकान, वाहन, वस्त्र, स्वर्ण आभूषण और बही-खाता खरीदने के साथ नए व्यापार तथा निवेश के लिए श्रेष्ठ अवसर रहेगा।

बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि कार्तिक कृष्ण सप्तमी, भानु सप्तमी के दिन 1 नवंबर रविवार को दोपहर 2 बजकर 52 मिनट तक सप्तमी तिथि रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि और अहोई अष्टमी व कालाष्टमी का शुभारंभ होगा। सूर्योदय सुबह 6 बजकर 41 मिनट पर होगा। सूर्योदय से पहले सुबह 5 बजकर 39 मिनट से नक्षत्रों के सम्राट पुष्य नक्षत्र का कर्क राशि में शुभारंभ होगा।

उन्होंने बताया कि आनंदादिक 28 योगों में श्रीवत्स योग के साथ साध्य योग दोपहर 2 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसके बाद शुभ योग बनेगा। पुष्य नक्षत्र 2 नवंबर सोमवार को सूर्योदय से पहले सुबह 4 बजकर 30 मिनट तक विद्यमान रहेगा। इस कारण 1 नवंबर को पूरे दिन और रात रवि पुष्यामृत का श्रेष्ठ महासंयोग रहेगा, जिसे मिनी धनतेरस के रूप में भी विशेष माना गया है।

शास्त्री के अनुसार, इस महासंयोग में जमीन-जायदाद, मकान, वाहन, वस्त्र, स्वर्ण आभूषण और बही-खाता खरीदना शुभ रहेगा। नए व्यापार की शुरुआत और निवेश के लिए भी यह श्रेष्ठ योग है। सभी कामनाओं की कार्यसिद्धि के लिए पूजापाठ, अनुष्ठान, मंत्र जाप तथा धार्मिक और आध्यात्मिक कार्य किए जा सकते हैं। हालांकि, इस अवधि में शादी-विवाह सहित मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे।

उन्होंने बताया कि इस दिन मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी रहेगा। गाय को चारा, गुड़ और चने की दाल खिलाने तथा गरीबों को दान करने से विशेष लाभ, आर्थिक स्थिति में वृद्धि और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

बाबूलाल शास्त्री ने 1 नवंबर रविवार के खरीदारी और शुभ कार्यों के लिए चौघड़िया मुहूर्त की जानकारी देते हुए बताया कि चर का चौघड़िया सुबह 8 बजकर 3 मिनट से 9 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। लाभ-अमृत का चौघड़िया सुबह 9 बजकर 26 मिनट से दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। शुभ चौघड़िया दोपहर 1 बजकर 33 मिनट से 2 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। शुभ-अमृत का चौघड़िया शाम 5 बजकर 41 मिनट से रात 8 बजकर 56 मिनट तक और चर का चौघड़िया रात 8 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 33 मिनट तक श्रेष्ठ रहेगा।

रवि पुष्यामृत महासंयोग के दौरान खरीदारी, नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और दान के लिए बताए गए मुहूर्तों का विशेष महत्व रहेगा। यह जानकारी मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान, टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने दी।

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