माधवी और भिड़े शो के सेट पर खाद्य सुरक्षा और लाइसेंस विवाद के संदर्भ में नजर आ रहे हैं।

लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' हमेशा से ही अपनी हास्यप्रद कहानियों और पारिवारिक मनोरंजन के साथ-साथ समाज से जुड़े जरूरी मुद्दों को बहुत ही सरल अंदाज में दर्शकों के सामने रखता आया है। एक बार फिर से इस शो ने एक बेहद दिलचस्प और नई कहानी के माध्यम से खाद्य सुरक्षा यानी फूड सेफ्टी जैसे गंभीर और जरूरी विषय को बहुत ही आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है। यह कहानी एक ऐसे समय में आई है जब असल जिंदगी में भी खाने की शुद्धता, साफ-सफाई और सुरक्षा को लेकर लोगों के बीच जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।

इस पूरी घटना की पृष्ठभूमि में हाल ही में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) द्वारा की गई कड़ी कार्रवाई एक बड़ा कारण रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बुधवार को डोमिनोज पिज्जा के चार प्रमुख आउटलेट्स के बिजनेस लाइसेंस पूरी तरह से रद्द कर दिए। इनमें से तीन आउटलेट्स अकेले मुंबई शहर में स्थित हैं। जुबिलिएंट फूडवर्क्स द्वारा संचालित किए जाने वाले इन आउटलेट्स के खिलाफ यह सख्त कदम एक औचक निरीक्षण के बाद उठाया गया, जिसमें फूड सेफ्टी और हाइजीन के नियमों के कई गंभीर उल्लंघन पाए गए थे। इसी माहौल के बीच 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के निर्माता असित कुमार मोदी ने भी शो के जरिए इस विषय को बहुत ही प्रमुखता से उठाया है और साफ-सफाई के महत्व को दर्शकों के सामने रखा है।

शो की कहानी की शुरुआत माधवी और आत्माराम भिड़े के घर के बने अचार-पापड़ के छोटे से कारोबार से होती है। भिड़े अपने एक ग्राहक का ऑर्डर पूरा करने के बाद घर का बना स्वादिष्ट अचार ग्राहकों तक सही सलामत पहुंचाने के लिए घर से निकलता है। इसी दौरान घर पर माधवी और उनकी बेटी सोनू को यह पता चलता है कि माधवी के हाथ की एक चूड़ी कहीं गायब है। इस बात का पता चलते ही माधवी को गहरा शक होने लगता है कि कहीं वह टूटी हुई चूड़ी का टुकड़ा अचार की किसी बोतल के अंदर तो नहीं गिर गया है। इस आशंका के सामने आते ही पूरे परिवार की चिंताएं अचानक बहुत अधिक बढ़ जाती हैं और देखते ही देखते यह छोटा सा घरेलू मामला काफी गंभीर रूप धारण कर लेता है।

मामला तब और ज्यादा पेचीदा हो जाता है जब इसकी सूचना फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) तक पहुंच जाती है। विभाग की टीम तुरंत उनके घर पर पहुंचती है और अपनी पूरी जांच-पड़ताल शुरू करती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए और शुरुआती संदेह के आधार पर माधवी का फूड लाइसेंस भी रद्द कर दिया जाता है। हालांकि, कहानी में असली मोड़ तब आता है जब मामले की आगे की गहराई से जांच की जाती है और एक बहुत बड़ा व चौकाने वाला खुलासा सामने आता है। जांच में यह बात साफ हो जाती है कि जिस उत्पाद को लेकर इतना बड़ा विवाद खड़ा हुआ था और जिस पर उंगली उठाई गई थी, वह असल में माधवी और भिड़े का उत्पाद था ही नहीं।

यह पूरा मामला एक बड़ी और फर्जी कंपनी से जुड़ा हुआ निकलता है। बाजार में कुछ ऐसी गैरकानूनी और फर्जी कंपनियां सक्रिय थीं जो हूबहू असली ब्रांड जैसे दिखने वाले उत्पाद तैयार कर रही थीं और ग्राहकों को धोखा दे रही थीं। इस विशेष कहानी के माध्यम से शो के निर्माताओं ने नकली, मिलावटी और मिलते-जुलते फूड ब्रांड्स से बाजार में फैल रहे खतरों को बहुत ही स्पष्ट रूप से उजागर किया है। शो ने अपने हल्के-फुल्के और पारिवारिक अंदाज में यह समझाने का प्रयास किया है कि खाने-पीने की चीजों की सुरक्षा केवल बड़ी कंपनियों या सरकारी एजेंसियों की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम ग्राहकों को भी खरीदते वक्त पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए।

इस बारे में अपने विचार रखते हुए शो के निर्माता असित कुमार मोदी ने कहा कि भोजन एक ऐसी बुनियादी चीज है जिस पर हर परिवार बिना किसी संकोच के आंख मूंदकर भरोसा करता है, और इस भरोसे के साथ एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उन्होंने आगे कहा कि वे अपनी कहानियों के माध्यम से हमेशा उन्हीं मुद्दों को उठाने की कोशिश करते हैं जिनका सामना आम लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में करते हैं, ताकि पूरा परिवार इसे आसानी से समझ सके और इस पर आपस में चर्चा कर सके। यह विशेष कहानी हमें यह सिखाती है कि हम जो कुछ भी खाते हैं, उसके प्रति हमेशा सतर्क रहें, उसके पैकेट पर दिए गए लेबल को ध्यान से पढ़ें, उत्पाद की प्रामाणिकता की पूरी जांच करें और उन तमाम ब्रांड्स से सावधान रहें जो दिखने में बिल्कुल असली लग सकते हैं लेकिन वास्तव में नकली होते हैं।

दूसरी ओर, अगर महाराष्ट्र के प्रशासनिक गलियारों की बात करें तो इस समय आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे अपनी सख्त और बेबाक कार्रवाईयों को लेकर पूरे राज्य में भारी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। महाराष्ट्र की फूड एंड बेवरेज इंडस्ट्री में साफ-सफाई के नियमों का उल्लंघन करने वालों और आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ तुकाराम मुंढे ने अपनी टीम के साथ मिलकर ताबड़तोड़ एक्शन लिया है। उनके विभाग ने नियमों की अनदेखी करने वाले कई बड़े रेस्टोरेंट, नामी आइसक्रीम पार्लर और मिल्क डेयरियों के लाइसेंस बिना किसी दबाव के रद्द कर दिए हैं। इस कड़े प्रशासनिक अभियान के दायरे में केवल सामान्य दुकानें ही नहीं, बल्कि बड़े फाइव-स्टार होटल से लेकर सरकारी कैंटीन तक शामिल रहे हैं, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है।