आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे और अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी महाराष्ट्र में प्रशासनिक कार्रवाई और उनके काम की सराहना के संदर्भ में।

महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने अपनी बेदाग कार्यशैली और प्रशासनिक सख्ती से पूरे राज्य में एक नई मिसाल कायम की है。 उनके द्वारा किए जा रहे ताबड़तोड़ छापों और नियमों का सख्ती से पालन कराने के तरीकों ने हर तरफ चर्चा बटोर रखी है। आम तौर पर किसी अधिकारी की पहचान उसके पद और कुर्सी से होती है, लेकिन आईएएस तुकाराम मुंढे के मामले में उनकी पहचान उनके द्वारा किए जाने वाले ठोस और कड़े कामों से तय होती है। उनके इस प्रशासनिक अंदाज से न केवल आम जनता बल्कि मनोरंजन जगत की जानी-मानी हस्तियां भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकी हैं। लोकप्रिय टीवी सीरियल 'साथ निभाना साथिया' से घर-घर में अपनी खास पहचान बनाने वाली मशहूर अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी ने भी अब खुलकर तुकाराम मुंढे की कार्यशैली की सराहना की है और उनके समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी है।

जब से तुकाराम मुंढे ने 25 मई को महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर के रूप में पदभार संभाला है, तब से उन्होंने पूरे राज्य में थोक विक्रेताओं, निर्माताओं, खुदरा विक्रेताओं और रेस्तरां पर औचक छापेमारी का एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है। इस अभियान के दौरान जहां भी गंभीर प्रकार की गड़बड़ियां सामने आई हैं, वहां उन्होंने बिना किसी दबाव के तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस सस्पेंड करने, मिलावटी या संदिग्ध सैंपल जब्त करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने का सिलसिला लगातार जारी है। उनके इन साहसिक कदमों के कारण जहां एक तरफ समाज और आम जनता में उनके प्रशंसकों की लंबी फेहरिस्त बन चुकी है, वहीं दूसरी तरफ अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी भी उनकी कार्यप्रणाली से बेहद प्रभावित नजर आई हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हमेशा सक्रिय रहने वाली और हर सामाजिक या प्रशासनिक मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखने वाली देवोलीना भट्टाचार्जी ने इस बार भी किसी भी डर के बिना अपनी बात रखी है। चाहे गलत के खिलाफ आवाज उठाना हो या फिर समाज में किसी अच्छे काम की खुलकर तारीफ करनी हो, देवोलीना हमेशा आगे रहती हैं। इस बार उन्होंने महाराष्ट्र के एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे के काम की सराहना करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक तीखा और स्पष्ट ट्वीट साझा किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि अगर समाज के हर विभाग में तुकाराम मुंढे जैसे ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अफसर मिल जाएं, तो कोई भी अपराधी कानून को तोड़ने या उसका उल्लंघन करने से पहले सौ बार सोचेगा।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिनेत्री देवोलीना ने न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक प्रणाली की कमियों पर भी दुख जताया। उन्होंने अफसोस जताते हुए लिखा कि मौजूदा व्यवस्था और नियमों के अनुसार, यदि किसी के खाने में तीन कॉकरोच भी मिल जाते हैं, तब भी उसका लाइसेंस तुरंत रद्द नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि हम सब अच्छी तरह जानते हैं कि जनता के हितों की रक्षा करने वाले मुंढे सर का कितनी बार प्रशासनिक स्तर पर एक जगह से दूसरी जगह तबादला किया जा चुका है। ईमानदारी की राह पर चलने वाले अधिकारियों को अक्सर इसके बदले बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार उन्हें यहां इतनी लंबी अवधि तक काम करने का पूरा मौका मिलेगा, जिससे वे व्यवस्था की सभी पुरानी गड़बड़ियों और कमियों को हमेशा के लिए सुधार सकें।

आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे का करियर ग्राफ और उनका संघर्षपूर्ण जीवन उन्हें अन्य अधिकारियों से बिल्कुल अलग खड़ा करता है। प्रतिष्ठित 'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, अपने 21 साल के लंबे सेवाकाल के दौरान उनका कुल 25 बार तबादला किया जा चुका है। यह चौंकाने वाला आंकड़ा उनकी प्रशासनिक पहचान का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, जितना कि उनके द्वारा किए जाने वाले कड़े प्रशासनिक कार्य। तुकाराम मुंढे की शुरुआती जिंदगी सरकारी महकमों और एसी दफ्तरों से कोसों दूर एक साधारण परिवेश में बीती थी। उनका जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोना गांव में एक सामान्य किसान परिवार में हुआ था।

उनका शुरुआती बचपन जिला परिषद के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने और अपने परिवार के खेतों में हाथ बंटाने के बीच ही बीता था। यह संघर्षपूर्ण जीवन देश के तमाम ग्रामीण बच्चों की आम दिनचर्या का हिस्सा होता है, जहां शिक्षा प्राप्ति और शारीरिक मेहनत एक साथ चलती हैं। तमाम जानकारों का मानना है कि ग्रामीण परिवेश के इन्हीं शुरुआती संघर्षों ने उन्हें आम आदमी की परेशानियों और प्रशासनिक चुनौतियों को गहराई से समझने की दृष्टि दी थी। डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने वर्ष 2004 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की और ऑल इंडिया रैंक 20 प्राप्त की। इसके बाद वे 2005 बैच के आईएएस अधिकारी के रूप में प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए। एक साधारण गांव के छोटे से क्लासरूम से लेकर देश की सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली सिविल सेवा तक का यह सफर उनके असाधारण दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।