गांधी जयंती पर सोनी सब के कलाकारों ने साझा कीं बापू की सीख
गुलकी जोशी, मनीष वाधवा, मुस्कान बामने और तोरल रसपुत्रा ने बताया कि कैसे वे सत्य, दयालुता, अहिंसा और सादगी जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाते हैं।
तस्वीर में बाएँ से दाएँ गुलकी जोशी, मनीष वाधवा, तोरल रसपुत्रा और मुस्कान बामने मुस्कुराते हुए दिख रहे हैं।
मुंबई, सितम्बर 2026: महात्मा गांधी की शिक्षाएँ सत्य, दयालुता, धैर्य और सही के लिए खड़े होने जैसे सरल मूल्यों के जरिए आज भी प्रासंगिक बनी हुई हैं। गांधी जयंती के अवसर पर सोनी सब के कलाकार गुलकी जोशी, मनीष वाधवा, मुस्कान बामने और तोरल रसपुत्रा ने गांधी जी के जीवन और उनकी शिक्षाओं से मिली उन सीखों को साझा किया, जिन्हें वे अपने रोज़मर्रा के जीवन में अपनाने की कोशिश करते हैं।
ज़मीन से जुड़े रहने और दयालुता को चुनने से लेकर हमेशा सही काम करने में विश्वास रखने तक, कलाकारों ने उन मूल्यों पर बात की, जो उनके लिए आज भी विशेष महत्व रखते हैं।
सोनी सब के यादें में डॉ. सृष्टि अग्रवाल का किरदार निभा रहीं गुलकी जोशी ने कहा, “महात्मा गांधी की जिस बात की मैं सबसे ज़्यादा प्रशंसा करती हूँ, वह है सत्य के मार्ग पर बने रहने और लोगों के साथ दयालुता से पेश आने में उनका विश्वास। मुझे लगता है कि ये सरल मूल्य हैं, लेकिन ये हमारे रोज़मर्रा के जीवन में लोगों और परिस्थितियों से निपटने के तरीके में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।”
हस्तिनापुर के वीर में भीष्म पितामह का किरदार निभा रहे मनीष वाधवा ने कहा, “गांधी जी का जीवन हमें याद दिलाता है कि आप अपने विश्वासों पर दृढ़ रह सकते हैं, बिना अपनी मानवता खोए। मेरे लिए गांधी जी की शांति और अभय (निर्भयता) की शिक्षा बहुत मायने रखती है। मेरा मानना है कि सही बात के साथ खड़े रहने का साहस रखना और संघर्ष के बजाय शांति को चुनना ऐसी सीख है, जो हम सभी उनके जीवन से ले सकते हैं। मेरे लिए सत्य, सादगी और अनुशासन के उनके मूल्य ऐसी सीख हैं, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।”
पुष्पा इम्पॉसिबल में शनाया का किरदार निभा रहीं मुस्कान बामने ने कहा, “गांधी जी की जो बात मुझे सबसे ज़्यादा प्रेरित करती है, वह यह है कि उनका मानना था कि बदलाव की शुरुआत हमारे अपने छोटे-छोटे कार्यों से हो सकती है। मैं खुद को हमेशा यह याद दिलाती हूँ कि दयालु होना, धैर्य रखना और सही काम करना, रोज़मर्रा की छोटी-छोटी परिस्थितियों में भी मायने रखता है। वे दयालुता और अहिंसा में विश्वास रखते थे। मुझे लगता है कि गुस्से के बजाय धैर्य के साथ प्रतिक्रिया देना ऐसी बात है, जिसे हम सभी अपने रोज़मर्रा के जीवन में अपना सकते हैं।”
हस्तिनापुर के वीर में कुंती का किरदार निभा रहीं तोरल रसपुत्रा ने कहा, “मेरे लिए गांधी जी की सबसे बड़ी सीख है कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, आपको अपने मूल्यों और अपने सच्चे स्वरूप के प्रति ईमानदार रहना चाहिए। उनका जीवन हमें दिखाता है कि धैर्य, साहस और सत्य स्थायी बदलाव ला सकते हैं। मैं उनके सादगीपूर्ण जीवन के विचार की बहुत प्रशंसा करती हूँ। उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि खुश रहने के लिए बहुत ज़्यादा चीज़ों की ज़रूरत नहीं होती और ज़मीन से जुड़े रहना तथा जो हमारे पास है, उसमें संतुष्ट रहना एक अलग तरह की शांति दे सकता है।”
गांधी जयंती पर सोनी सब के कलाकारों की साझा की गई ये बातें सत्य, सादगी, दयालुता, अहिंसा, धैर्य, साहस और अनुशासन जैसे उन मूल्यों को सामने रखती हैं, जिन्हें वे गांधी जी की शिक्षाओं से जोड़ते हैं। दर्शक सोनी सब पर यादें, हस्तिनापुर के वीर और पुष्पा इम्पॉसिबल देख सकते हैं।