रसिका दुग्गल ने बच्चों की फिल्मों पर उठाया सवाल, बोलीं- उनकी सोच से जुड़ी कहानियां जरूरी
अभिनेत्री रसिका दुग्गल ने बच्चों के लिए उनकी जिज्ञासा और कल्पनाशक्ति से जुड़ी फिल्मों की जरूरत बताई है। फिल्म 'लिटिल थॉमस' के संदर्भ में उन्होंने सार्थक मनोरंजन, बचपन के सवालों और बच्चों से जुड़ने वाली कहानियों पर जोर दिया।
अभिनेत्री रसिका दुग्गल, जो फिल्म 'लिटिल थॉमस' में जेसी मिरांडा की भूमिका निभा रही हैं, उन्होंने बच्चों के लिए सार्थक और विचारशील सिनेमा की जरूरत पर बात की।
अभिनेत्री रसिका दुग्गल का मानना है कि बच्चों के लिए ऐसी फिल्में बनाई जानी चाहिए, जिनकी कहानियों से वे खुद को जोड़ सकें और जो उनकी जिज्ञासा को समझने के साथ उनकी कल्पनाशक्ति को भी बढ़ावा दें। उन्होंने बच्चों के लिए सार्थक सिनेमा की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी फिल्मों में मनोरंजन के साथ विचारों और भावनाओं की गहराई भी होनी चाहिए।
रसिका दुग्गल के अनुसार, सिनेमा लोगों की दुनिया को देखने और समझने का नजरिया विकसित करने का एक प्रभावी माध्यम है। बचपन में देखी गई फिल्मों का असर वयस्क होने के बाद भी व्यक्ति की सोच और विचारों पर बना रहता है। इसलिए बच्चों के लिए फिल्में बनाते समय उनकी रुचियों, सवालों और जिज्ञासाओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
अभिनेत्री ने कहा कि सिनेमा दुनिया को समझने का दायरा बढ़ाने और कल्पनाशक्ति को प्रोत्साहित करने का शानदार माध्यम है। वयस्कों के कई विचारों और धारणाओं की जड़ें उन फिल्मों में मिल सकती हैं, जिन्हें उन्होंने बचपन में देखा था। इसी वजह से ऐसी फिल्मों की जरूरत है, जिनसे बच्चे जुड़ाव महसूस कर सकें और जो उनकी जिज्ञासा को नजरअंदाज करने के बजाय उसे प्रोत्साहित करें।
रसिका दुग्गल का कहना है कि बच्चों के लिए बनने वाला सिनेमा मनोरंजक होने के साथ सार्थक भी हो सकता है। इसके लिए कहानी को हल्का या सतही बनाने की जरूरत नहीं है और न ही उसे उपदेशात्मक होना चाहिए। वह चाहती हैं कि अधिक फिल्म निर्माता ऐसी कहानियों पर काम करें, जिन्हें बच्चे आनंद के साथ देख सकें और जो उनकी कल्पनाओं के सामने नई संभावनाएं खोलें।
उनकी यह सोच फिल्म 'लिटिल थॉमस' में भी दिखाई देती है। कौशल ओझा के निर्देशन में बनी यह फिल्म सात वर्षीय थॉमस की कहानी पर आधारित है, जो जीवन से जुड़े सवाल पूछता है। बच्चों की सहज जिज्ञासा कहानी का प्रमुख हिस्सा है। थॉमस के मन में यह जानने की इच्छा होती है कि बच्चे कहां से आते हैं। इसके साथ ही वह अपने परिवार में एक भाई या बहन चाहता है। उसके सवाल कहानी को आगे बढ़ाते हैं और परिवार के भीतर होने वाली बातचीत को केंद्र में रखते हैं।
1990 के दशक के गोवा की पृष्ठभूमि पर बनी इस पारिवारिक ड्रामा फिल्म में रसिका दुग्गल ने जेसी मिरांडा की भूमिका निभाई है। फिल्म की कहानी बच्चों के नजरिये से दुनिया को देखने की कोशिश करती है। इसकी प्रस्तुति में 'मालगुडी डेज' और रस्किन बॉन्ड की कहानियों पर आधारित रूपांतरणों जैसी सहज और अवलोकनपरक शैली की झलक मिलती है। कहानी बचपन की जिज्ञासा और उसकी जटिलताओं के साथ यह भी दिखाती है कि परिवार जीवन की अप्रत्याशित परिस्थितियों, चुनौतियों और खुशियों का सामना कैसे करते हैं।
रसिका दुग्गल का फिल्मी सफर भी अलग-अलग तरह की कहानियों और भूमिकाओं से जुड़ा रहा है। उन्होंने 2007 की फिल्म 'अनवर' में छोटी भूमिका से शुरुआत की थी। इसके बाद वह 'मंटो', 'हामिद', 'लूटकेस' और 'दरबान' जैसी फिल्मों में नजर आईं। उनकी फिल्मोग्राफी में मुख्यधारा के सिनेमा और स्वतंत्र फिल्मों, दोनों तरह की परियोजनाएं शामिल हैं।
'लिटिल थॉमस' के जरिए रसिका दुग्गल बच्चों के अनुभवों और उनकी सोच से जुड़ी कहानियों की जरूरत को रेखांकित कर रही हैं। उनका जोर ऐसे बाल सिनेमा पर है, जो बच्चों का मनोरंजन करने के साथ उन्हें नए विचारों और कल्पनाओं से भी परिचित कराए।