फिल्म 'तू है मेरी किरण' का आधिकारिक पोस्टर, जिसमें मुख्य कलाकार सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल नजर आ रहे हैं।

सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की फिल्म ‘तू है मेरी किरण’ एक ऐसी कहानी लेकर आई है, जिसमें समय की सीमाएं टूटती हैं, लेकिन कहानी दर्शकों को बांधने में नाकाम रहती है। फिल्म की समीक्षा में इसकी पटकथा, घटनाओं के उलझे हुए क्रम और पात्रों के चित्रण पर सवाल उठाए गए हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की फिल्म समीक्षक शुभ्रा गुप्ता ने 23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अपनी समीक्षा में फिल्म को 5 में से 1 स्टार दिया है।

फिल्म की कहानी वर्ष 2026 में रहने वाली किरण (सोनाक्षी सिन्हा) से शुरू होती है, जिसे एक फ्लिप-टॉप मोबाइल फोन मिलता है। यह फोन उसे वर्ष 2016 में रहने वाले एक व्यक्ति से जोड़ता है। शुरुआत में किरण को इस पर विश्वास नहीं होता और उसे लगता है कि यह किसी तरह का मजाक है। हालांकि, जल्द ही अविश्वास की जगह हैरानी ले लेती है। कहानी के एक छोर पर किरण है, जो शादीशुदा जिंदगी जी रही है, जबकि दूसरे छोर पर बेरोजगार समर (जहीर इकबाल) है, जो उसका पीछा करता है। दोनों के बीच बार-बार अलग होने और फिर जुड़ने का सिलसिला चलता है, जो आगे चलकर एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचता है।

फिल्म की कहानी में समय यात्रा से जुड़ी कई परिचित युक्तियों का इस्तेमाल किया गया है। पुराने और खरोंच लगे उपकरणों का अचानक काम करने लगना, यादों का कभी उभरना तो कभी गायब हो जाना और रहस्यमयी घटनाओं का सामने आना इसकी कहानी का हिस्सा हैं। हालांकि, घटनाएं आगे बढ़ने के साथ पटकथा और अधिक उलझती जाती है। अतीत और वर्तमान के बीच तेजी से आने-जाने वाले दृश्य कहानी को स्पष्ट बनाने के बजाय दर्शकों के लिए उसे समझना मुश्किल कर देते हैं।

समीक्षा के अनुसार, इस तरह की कहानी अपनी कल्पनाशीलता और लेखन के आधार पर प्रभावशाली बन सकती है या पूरी तरह बिखर सकती है। फिल्म का शीर्षक भी 1990 के दशक की उस फिल्म की याद दिलाता है, जिसमें पीछा करने वाले नायक की कहानी को बड़ी सफलता मिली थी। लेकिन ‘तू है मेरी किरण’ अपनी कहानी को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में सफल नहीं होती।

फिल्म में पहाड़, बंगले, कार्निवल और सिनेमाघर जैसे स्थान दिखाई देते हैं, जिनके आसपास कलाकारों की गतिविधियां चलती रहती हैं। इसके बावजूद पात्रों के बीच आपसी जुड़ाव की कमी महसूस होती है। सोनाक्षी सिन्हा के पति की भूमिका में अंकित गुप्ता, उनके सख्त पिता के रूप में पूर्णेंदु भट्टाचार्य और जहीर इकबाल की शिकायत करने वाली मां के किरदार में जरीना वहाब नजर आते हैं। इन कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद कमजोर लेखन कहानी को प्रभावी बनाने में मदद नहीं कर पाता। समीक्षा में पटकथा के ऐसे मोड़ों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जो दर्शकों को कहानी में शामिल करने के बजाय असहज प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर करते हैं।

फिल्म का एक प्रमुख पहलू समर का व्यवहार है। हिंदी फिल्मों में कई बार पीछा करने वाले पुरुष पात्रों को नायक के रूप में महिमामंडित किया गया है। इस फिल्म में समर का अपनी पसंद की लड़की की गुप्त रूप से वीडियो रिकॉर्ड करना उसके व्यवहार के एक नकारात्मक पक्ष को सामने लाता है। हालांकि, इसके बाद वह भी उन बहानों का सहारा लेने लगता है, जिनके जरिए हिंदी फिल्मों के प्रेमी अक्सर अपने व्यवहार को सही ठहराते हैं। समीक्षा के मुताबिक, यहीं से फिल्म की कहानी और कमजोर होती जाती है।

सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल इससे पहले वर्ष 2022 की फिल्म ‘डबल एक्सएल’ में साथ काम कर चुके हैं। ‘तू है मेरी किरण’ में दोनों मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म को मनोवैज्ञानिक रोमांचक फिल्म के रूप में बनाने का प्रयास किया गया है, लेकिन समीक्षा के अनुसार, न तो पीछा करने वाले समर का किरदार और न ही उसका पीछा झेलने वाली किरण कहानी को डूबने से बचा पाते हैं।

फिल्म में शेरलिन सेठ भी कलाकारों में शामिल हैं। इसका निर्देशन करण रावल ने किया है। द इंडियन एक्सप्रेस की समीक्षा में फिल्म को 5 में से 1 स्टार दिया गया है। कमजोर पटकथा, उलझी हुई समय-यात्रा की कहानी और पात्रों के बीच प्रभावी जुड़ाव की कमी को इसकी प्रमुख समस्याओं के रूप में रेखांकित किया गया है।