नीम करोली बाबा और फिल्म हनुमान अंश के पोस्टर के साथ यश फिल्म टॉक्सिक के संदर्भ में सिनेमाघरों में प्रदर्शन के दौरान दिखाई दे रहे हैं।

बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों एक ऐसा चमत्कार देखने को मिल रहा है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। बाबा नीम करोली के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित कम बजट की फिल्म 'हनुमान अंश' ने सिनेमाघरों में इतिहास रच दिया है। आज से करीब 51 साल पहले भक्तिमय फिल्मों की दुनिया में फिल्म 'जय संतोषी मां' ने बॉक्स ऑफिस पर जो जादुई कमाल दिखाया था और 'शोले' जैसी बड़ी फिल्मों को टक्कर देकर रिकॉर्ड तोड़ा था, ठीक वैसा ही इतिहास अब 'हनुमान अंश' ने दोहरा दिया है। इस फिल्म ने अपनी शानदार कमाई से साउथ के सुपरस्टार यश की बड़े बजट की फिल्म 'टॉक्सिक' को भी कड़ी टक्कर दे दी है और बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा रखा है।

फिल्म 'हनुमान अंश' की शुरुआत बेहद धीमी रही थी। जब यह फिल्म रिलीज हुई थी, तब इसे शुरुआती दिनों में महज 10 से 20 लाख रुपये की कमाई ही नसीब हुई थी। उस वक्त थिएटर्स में इस फिल्म को मुश्किल से 200 से 300 शोज ही मिले थे। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी हो गई कि फिल्म की कमाई घटकर 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच गई और इसके शोज घटकर महज 30 से 60 के बीच सिमट कर रह गए थे। लेकिन कहते हैं कि अच्छी कहानी और सच्ची भक्ति को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। समय बीतने के साथ इस फिल्म की कमाई में ऐसी जबरदस्त सुनामी आई कि देखने वाले दंग रह गए।

sacnilk की रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'हनुमान अंश' ने अपने रिलीज के 22वें दिन से तूफानी रफ्तार पकड़ ली। फिल्म ने 22वें दिन जहां 6.25 करोड़ रुपये की कमाई की, वहीं 25वें दिन इसका कलेक्शन बढ़कर सीधे 12.75 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके बाद मंगलवार को इस फिल्म ने 8.50 करोड़ रुपये बटोरे और 27वें दिन भी 7.25 करोड़ रुपये की शानदार कमाई दर्ज की। महज लगभग 2 करोड़ रुपये के छोटे से बजट में तैयार हुई यह फिल्म अब तक कुल 61.38 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है। बुधवार को इस फिल्म को 7,037 शोज़ मिले और इसने भारत में कुल 72.32 करोड़ रुपये का शानदार ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है।

इस फिल्म की कहानी बेहद प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली है। यह कहानी एक 12 साल के दुखी बालक लक्ष्मी नारायण शर्मा की है, जो आगे चलकर महान संत नीम करोली बाबा के रूप में दुनिया भर में जाने गए। अपनी माता के निधन के बाद, वह ईश्वर और अपनी मां को दोबारा पाने की तलाश में अपना घर छोड़ देते हैं। उत्तर भारत के मंदिरों, घने जंगलों और गांवों की लंबी यात्रा के दौरान वह मौन, अनुशासन और सच्ची भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। उन्हें धीरे-धीरे यह अहसास होता है कि भगवान दुनिया से भागने में नहीं, बल्कि मानवता की निःस्वार्थ सेवा करने में मिलते हैं। इसके बाद वह पूरी दुनिया की मोह-माया को त्यागकर साधारण लोगों की मदद करने, भूखों को भोजन कराने और अपने प्रेम व मौन आशीर्वाद से लोगों के जीवन को बदलने के नेक कार्य में जुट जाते हैं।

दूसरी तरफ, गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी और साउथ स्टार यश की मुख्य भूमिका वाली बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक' वह जादुई करिश्मा दिखाने में असफल रही जिसकी बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद की जा रही थी। यह फिल्म 1947 के बाद के गोवा और पुर्तगाली शासन के दौर पर आधारित एक डार्क गैंगस्टर ड्रामा है। फिल्म की कहानी उस दौर से जुड़ी है जब गोवा में पुर्तगालियों का राज था और अफीम व ड्रग्स का अवैध कारोबार अपने चरम पर था। इसमें कहानी एक अनाथ भाई-बहन राया (यश) और गंगा (नयनतारा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बचपन के भयानक दर्द, तकलीफों और गरीबी से निकलकर अपराध की अंधी दुनिया में कदम रखते हैं।

'टॉक्सिक' के बॉक्स ऑफिस सफर पर नजर डालें तो फिल्म ने पहले दिन भले ही 101.10 करोड़ रुपये की बंपर शुरुआत की हो, लेकिन महज 8 दिनों के भीतर ही इसकी रफ्तार काफी धीमी पड़ गई है। इस फिल्म ने बुधवार यानी अपने 8वें दिन केवल 5.10 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। हालांकि 12,432 शोज मिलने के बाद अब तक इस फिल्म ने कुल 234.70 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया है, लेकिन लगभग 500 से 1,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट में बनी इस फिल्म को अपनी लागत पूरी तरह वसूलने के लिए अभी सिनेमाघरों में लंबी और कड़ी मेहनत करनी होगी। वैश्विक स्तर पर (Worldwide) इस फिल्म ने अब तक 322.00 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है।

सिनेमाघरों में इन दोनों फिल्मों के अलावा इमरान हाशमी की फिल्म 'आवारापन 2' भी पिछले करीब 20 दिनों से टिकी हुई है। इस फिल्म ने इस बुधवार को महज 45 लाख रुपये का कारोबार किया है। इसके साथ ही 'आवारापन 2' का अब तक का कुल नेट कलेक्शन 149.35 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि वर्ल्‍डवाइड यह फिल्म अब तक 211.48 करोड़ रुपये की कमाई करने में सफल रही है। बहरहाल, जिस तरह से कम बजट की भक्तिमय फिल्म 'हनुमान अंश' ने बड़े सितारों की फिल्मों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई है, उसने यह साबित कर दिया है कि दर्शक आज भी सार्थक और सकारात्मक सामग्री को देखना और सराहकीय समर्थन देना अच्छी तरह जानते हैं।