महाराष्ट्र: वाघाडी में दिव्यांग बच्चों ने रंगीं दिवाली की मिट्टी की पणतियां
कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों के कलात्मक कौशल, एकाग्रता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।
वाघाडी में दिव्यांग विद्यार्थियों को स्वावलंबन के लिए दीये रंगने का प्रशिक्षण दिया गया।
महाराष्ट्र के वाघाडी में दिव्यांग विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा से दिवाली की रौनक बढ़ रही है। कै. बापूसो. एन. झेड. मराठे विधायक संस्था, थाळनेर द्वारा संचालित अनाथ व निवासी मतिमंद मुलांची कार्यशाळा, वाघाडी में दिवाली के अवसर पर दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए मिट्टी की पणतियां रंगने का अभिनव उपक्रम चलाया जा रहा है। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष के मार्गदर्शन और प्रेरणा से आयोजित इस पहल में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इस उपक्रम के दौरान विद्यार्थियों को मिट्टी की साधारण पणतियों को विभिन्न रंगों से सजाने का मार्गदर्शन दिया गया। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशक्ति के अनुसार पणतियों को आकर्षक रंगों से सजाकर उन्हें सुंदर रूप दिया। इस गतिविधि से विद्यार्थियों की कला को प्रोत्साहन मिलने के साथ उनके हाथों के कौशल, एकाग्रता, रचनात्मकता और आत्मविश्वास को विकसित करने में मदद मिल रही है।
इस पहल के माध्यम से संदेश दिया जा रहा है कि दिव्यांग विद्यार्थियों में भी विभिन्न कलाओं और कौशलों को विकसित करने की क्षमता होती है। उचित मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और अवसर मिलने पर ये विद्यार्थी अपने हुनर से सुंदर वस्तुएं तैयार कर सकते हैं। विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई रंग-बिरंगी पणतियां उनकी मेहनत, कल्पनाशीलता और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदमों का प्रतीक बन रही हैं।
‘कला से आत्मविश्वास, कौशल से स्वावलंबन’ की भावना के साथ चलाया जा रहा यह उपक्रम केवल दिवाली की सजावट तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावसायिक कौशलों से परिचित कराने और भविष्य में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।
विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी, उनके हाथों से तैयार हुई सुंदर पणतियां और काम के प्रति उत्साह ने कार्यशाला परिसर में दिवाली का आनंदमय माहौल बना दिया है। इस पहल के माध्यम से समाज से भी अपील की जा रही है कि दिव्यांग विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई वस्तुओं को प्रोत्साहन दिया जाए और उनकी कलात्मक प्रतिभा का सम्मान किया जाए। यह उपक्रम दिव्यांग विद्यार्थियों के कौशल विकास, आत्मविश्वास और स्वावलंबन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।