तस्वीर में बाईं ओर हाथ जोड़े खड़े व्यक्ति और दाईं ओर व्यासपीठ पर बैठे पंडित मुरारी लाल पाराशर नजर आ रहे हैं।

शहर के ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा के छठवें दिन गुरुवार को व्यासपीठ पर विराजमान पूज्य पंडित मुरारी लाल पाराशर ने भगवान शिव की महिमा और शिव कथा के महत्व का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर की करुणा और कृपा संपूर्ण विश्व में व्याप्त है तथा उनकी कृपा दृष्टि से ही यह सृष्टि संचालित होती है। उन्होंने कहा कि जब तक भगवान शिव की कृपा नहीं होती, तब तक मनुष्य जीवन में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकता।

पंडित मुरारी लाल पाराशर ने बताया कि शिवपुराण में 24 हजार श्लोक हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से केवल एक श्लोक ही नहीं, बल्कि एक शब्द मात्र को भी यदि कोई अपने जीवन में धारण कर ले, तो इस मानव जीवन का उद्देश्य सिद्ध हो जाता है।

उन्होंने कहा कि महाभारत ग्रंथ पंचम वेद है और संसार में जो कुछ भी घटित हुआ है अथवा भविष्य में होगा, वह सब इस ग्रंथ में समाहित है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव मृत्युंजय हैं और महामृत्युंजय मंत्र के जाप से जीव पर आने वाले सभी प्रकार के कष्टों का निवारण हो जाता है। उन्होंने कहा कि परहित के समान दूसरा कोई पूजाधर्म नहीं है तथा परपीड़ा को दूर करना अत्यंत शुभ कार्य है।

सूक्त वाक्य की विस्तृत व्याख्या करते हुए पंडित पाराशर ने कहा कि धर्म रक्षा के लिए की गई हिंसा क्षमा योग्य है। उन्होंने बताया कि विश्वकर्मा द्वारा निर्मित रथ, जिसके सारथी स्वयं ब्रह्मा तथा वाण स्वयं भगवान विष्णु थे, उस पर सवार होकर भगवान शिव ने त्रिपुर राक्षस का संहार किया था। इसी कारण भगवान शिव को त्रिपुरारी नाम प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर नव नियुक्त भाजपा जिलाध्यक्ष सतीश बंसल, भाजपा नेता लखपत गुर्जर, एडवोकेट विमलेश धमारी, एडवोकेट मोहिनी गोयल, गिरधारी खण्डेलवाल, राधे श्याम गर्ग, दाऊ दयाल नसवारिया, चन्द्रभान सैन, रमेश अरोड़ा, राजू काका, रमाकांत नाहरौली वाले, महेश अग्रवाल, ममता बंसल, मालति गुप्ता, गीता तमोलिया, गीता खण्डेलवाल, सन्तोष खण्डेलवाल सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। शिव महापुराण कथा के दौरान भगवान शिव की महिमा, धर्म, परोपकार और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर दिए गए संदेशों को श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक सुना।

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