डीग के विश्व प्रसिद्ध जल महलों में विद्यार्थियों का शैक्षिक भ्रमण, ऐतिहासिक विरासत और भूगोल की मिली विस्तृत जानकारी
डीग के विश्व प्रसिद्ध जल महलों में जिले के एक निजी विद्यालय के विद्यार्थियों का शैक्षिक भ्रमण कराया गया। भ्रमण के दौरान बच्चों को जल महलों के ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी गई, साथ ही निबंध प्रतियोगिता और प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया गया।
तस्वीर में डीग के जल महल परिसर के ऐतिहासिक भवन के सामने स्कूली बच्चे और शिक्षक शैक्षिक भ्रमण के दौरान समूह में खड़े होकर नजर आ रहे हैं।
डीग, 27 जुलाई :- स्कूल की चारदीवारी से बाहर निकलकर बच्चों को बाह्य परिवेश का ज्ञान कराने के उद्देश्य से जिले के एक निजी विद्यालय द्वारा विद्यार्थियों का शैक्षिक भ्रमण कराया गया। भ्रमण के दौरान बच्चों को डीग के जल महलों की विश्व विख्यात पहचान, यहां की ऐतिहासिक विरासत और राजे-रजवाड़ों के समय की धरोहरों से अवगत कराया गया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को जल महलों के वास्तविक स्वरूप के साथ उनके ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी।
शैक्षिक भ्रमण के दौरान शिक्षक कृष्णा उपाध्याय ने सामाजिक अध्ययन, भूगोल और इतिहास विषय से संबंधित जानकारी साझा करते हुए बताया कि जल महल दोनों ओर स्थित गोपाल सागर और रूप सागर के मध्य मजबूत पत्थरों से निर्मित महल है। इसके साथ ही महल परिसर में स्थित हकीक पत्थर से निर्मित हनुमान जी की मूर्ति के दर्शन भी विद्यार्थियों को कराए गए।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को भादों भवन, गोपाल भवन और सूरज भवन सहित प्राकृतिक रूप से संचालित होने वाले विश्व प्रसिद्ध रंगीन फव्वारों के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चों की ज्ञानवृद्धि के लिए एक संक्षिप्त निबंध प्रतियोगिता और प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्कूली बच्चों ने बढ़-चढ़कर रुचि दिखाई और ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त कर लाभान्वित हुए।
शैक्षिक भ्रमण के दौरान विद्यालय के शिक्षक, शिक्षिकाएं और विद्यार्थी उपस्थित रहे। इस भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को कक्षा के बाहर ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने तथा व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिला।