तस्वीर में AI द्वारा जेनरेटेड साइबर अपराध और बैंकिंग धोखाधड़ी का ग्राफिक्स दिख रहा है।

भारत में साइबर अपराध, बैंकिंग धोखाधड़ी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े सुरक्षा जोखिमों ने वित्तीय संस्थानों और जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। 25 अक्टूबर 2026 को सामने आई साइबर और प्रौद्योगिकी से जुड़ी 10 प्रमुख खबरों में दिल्ली में 7.36 करोड़ रुपये की संदिग्ध बैंकिंग धोखाधड़ी, सूरत में 410 करोड़ रुपये की शिकायतों से जुड़े नेटवर्क, ब्रिटिश वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध और AI आधारित साइबर खतरों से संबंधित घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाक्रमों के साथ बैंकिंग सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक, क्वांटम तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उपाय भी चर्चा में हैं।

ये 10 खबरें Centre for Police Technology (CPT) ने Algoritha Security के सहयोग से संकलित की हैं। इनमें वित्तीय अपराध, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल जांच और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम शामिल हैं।

दिल्ली में 7.36 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी की जांच में पांच बैंक अधिकारियों समेत छह गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने CSB Bank की शाखाओं में संदिग्ध म्यूल खातों के इस्तेमाल से जुड़े मामले की जांच के दौरान पांच बैंक अधिकारियों और एक अन्य संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों की जानकारी 24 अक्टूबर 2026 को सामने आई थी।

जांचकर्ताओं ने बैंक की त्रि नगर शाखा में लगभग 20 और सरस्वती विहार शाखा में 17 संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान की। इन खातों का संबंध National Cyber Crime Reporting Portal पर दर्ज 100 से अधिक शिकायतों से पाया गया। इन खातों से जुड़े लेनदेन की राशि लगभग 7.36 करोड़ रुपये बताई गई है।

पुलिस का आरोप है कि मजदूरों से ऋण दिलाने का झूठा आश्वासन देकर उनके पहचान दस्तावेज प्राप्त किए गए और बैंक कर्मचारियों की सहायता से उन दस्तावेजों का इस्तेमाल खाते खोलने में किया गया। जांच में ग्राहकों के पते, तस्वीरों और KYC दस्तावेजों से संबंधित अनियमितताएं भी सामने आईं।

पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, आधार और पैन दस्तावेज, सिम कार्ड, चेकबुक तथा अन्य सामग्री जब्त की है। बैंक कर्मचारियों की कथित भूमिका की जांच जारी है और आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। यह मामला बैंकिंग प्रक्रियाओं में अंदरूनी मिलीभगत, खाता खोलने के दौरान कमजोर सत्यापन और संदिग्ध खातों की पहचान में कमियों से जुड़े जोखिमों को सामने लाता है।

सूरत में 410 करोड़ रुपये की शिकायतों से जुड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के दो संदिग्ध गिरफ्तार

सूरत पुलिस ने 24 अक्टूबर 2026 को कथित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। इस मामले में दुबई और चीन में मौजूद संचालकों से कथित संबंधों की जांच की जा रही है। घटनाक्रम की जानकारी 25 अक्टूबर को सामने आई।

जांच की शुरुआत 23.28 लाख रुपये के कथित निवेश धोखाधड़ी मामले की शिकायत से हुई। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े खातों का संबंध साइबर अपराध की 338 शिकायतों से पाया। इन शिकायतों में कथित धोखाधड़ी की कुल राशि लगभग 410 करोड़ रुपये बताई गई है।

जांचकर्ताओं के अनुसार, कई चालू और बचत खातों का कथित तौर पर आपराधिक कमाई प्राप्त करने और उसे आगे भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड, बैंकिंग रिकॉर्ड और खातों से संबंधित जानकारी जब्त की है।

पुलिस का आरोप है कि धोखाधड़ी से प्राप्त धन को USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश में मौजूद संचालकों तक पहुंचाया गया। हालांकि, 410 करोड़ रुपये का आंकड़ा जांच के दायरे में आए खातों से जुड़ी शिकायतों में बताई गई राशि है। इसे गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों द्वारा चुराई गई न्यायिक रूप से प्रमाणित राशि नहीं माना गया है।

यह मामला कथित म्यूल खातों, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए धन हस्तांतरण, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और सोशल मीडिया पर निवेश के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के बीच संबंधों की जांच को महत्वपूर्ण बनाता है।

ब्रिटिश वरिष्ठ नागरिकों से साइबर धोखाधड़ी मामले में ED ने 3.72 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ब्रिटेन के वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी मामले में लगभग 3.72 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इस कार्रवाई से संबंधित जानकारी 25 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट में सामने आई।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि इस नेटवर्क ने गोरखपुर और रांची में फर्जी कॉल सेंटर संचालित किए। वहां काम करने वाले लोगों ने कथित तौर पर ब्रिटेन की एक दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी के प्रतिनिधि बनकर बुजुर्ग ब्रिटिश नागरिकों को निशाना बनाया।

पीड़ितों को इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर करने के बहाने रिमोट-एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए राजी किया गया। आरोप है कि इसके बाद संवेदनशील जानकारी हासिल की गई और ब्रिटेन की Action Fraud एजेंसी के अधिकारियों के रूप में पहचान बताकर पीड़ितों से पैसे मांगे गए।

ED के अनुमान के अनुसार, मुख्य आरोपी से संबंधित अपराध की आय लगभग 7 करोड़ रुपये है। कुर्क की गई संपत्तियों में अचल संपत्तियां, बैंक बैलेंस और बीमा पॉलिसियां शामिल बताई गई हैं। जांचकर्ताओं ने यह भी बताया कि धन को भारत, बांग्लादेश और थाईलैंड से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर सेवाओं के जरिए स्थानांतरित किया गया।

संपत्तियों की कुर्की फिलहाल अस्थायी है और लागू कानूनी प्रक्रिया के अधीन है। यह जांच अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध से जुड़ी खुफिया जानकारी, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन का पता लगाने के महत्व को रेखांकित करती है।

C-DAC और बैंक ऑफ इंडिया के बीच क्वांटम-सुरक्षित बैंकिंग और AI धोखाधड़ी विश्लेषण पर समझौता

Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) और Bank of India ने बैंकिंग क्षेत्र में उभरती प्रौद्योगिकियों के विकास और मूल्यांकन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 22 अक्टूबर को हुआ और इसकी आधिकारिक घोषणा 23 अक्टूबर 2026 को की गई।

दोनों संस्थान क्वांटम तकनीक, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर काम करेंगे। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य वित्तीय नवाचार के लिए क्वांटम इकोसिस्टम स्थापित करना है।

प्रस्तावित उपयोगों में क्वांटम-सुरक्षित सुरक्षा व्यवस्था, धोखाधड़ी का विश्लेषण, ऋण जोखिम का आकलन, सुरक्षित डेटा साझाकरण, डिजिटल पहचान, दस्तावेजों की बुद्धिमत्तापूर्ण प्रोसेसिंग और जिम्मेदार AI का इस्तेमाल शामिल है। दोनों संस्थानों की योजना संयुक्त अनुसंधान, प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट प्रदर्शन, पायलट परियोजनाओं और तकनीकी प्रशिक्षण पर काम करने की है।

यह अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास से जुड़ी साझेदारी है। इसका अर्थ यह नहीं है कि क्वांटम-सुरक्षित बैंकिंग प्रणालियां पहले ही लागू कर दी गई हैं। क्वांटम कंप्यूटिंग भविष्य में वित्तीय संस्थानों के लिए अवसरों के साथ सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी पैदा कर सकती है, खासकर क्रिप्टोग्राफी, डेटा सुरक्षा और जटिल वित्तीय विश्लेषण के क्षेत्रों में।

उत्तर प्रदेश में क्वांटम फॉरेंसिक केंद्र और वैज्ञानिक जांच ढांचे के विस्तार की घोषणा

उत्तर प्रदेश सरकार ने 24 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित TechSangam 2026 के दौरान फॉरेंसिक विज्ञान और पुलिस तकनीक से जुड़ी पहलों की घोषणा की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने LEXQ Centre of Excellence का उद्घाटन किया। इस केंद्र का उद्देश्य क्वांटम फॉरेंसिक और कानूनी अनुपालन के क्षेत्रों में काम करना है।

राज्य सरकार ने Consent Management Portal भी शुरू किया और प्रौद्योगिकी विकास से जुड़ी अन्य पहलों की घोषणा की। मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सभी 18 पुलिस रेंज में फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें से 12 प्रयोगशालाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि छह अंतिम चरण में हैं। इसके अलावा, 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन भी तैनात की गई हैं।

पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने जांच में AI, डिजिटल फॉरेंसिक, वैज्ञानिक साक्ष्य और तकनीक की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने डीपफेक और डिजिटल सामग्री में हेरफेर की पहचान के लिए सत्यापन क्षमता मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई।

केंद्र का उद्घाटन अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि क्वांटम फॉरेंसिक से जुड़े सभी प्रस्तावित अनुप्रयोग पूरी तरह चालू हो चुके हैं या अदालतों में उनकी प्रभावशीलता का परीक्षण हो चुका है। वैज्ञानिक जांच ढांचे का विस्तार साक्ष्य जुटाने, जांच की दक्षता और आपराधिक मामलों में अभियोजन की विश्वसनीयता बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

गोवा में वरिष्ठ नागरिकों के बड़े संदिग्ध बैंक हस्तांतरण की जांच के निर्देश

गोवा पुलिस ने बैंकों से कहा है कि वरिष्ठ नागरिकों द्वारा अपरिचित लाभार्थियों को किए जाने वाले असामान्य रूप से बड़े धन हस्तांतरण की अधिक कड़ाई से जांच की जाए। इस घटनाक्रम की जानकारी 25 अक्टूबर 2026 को सामने आई।

IGP Keshav Ram Chaurasia की अध्यक्षता में हुई समन्वय बैठक में पुलिस ने बैंकों से आग्रह किया कि संदिग्ध लेनदेन की पुष्टि उस समय की जाए, जब तक धन संभावित धोखाधड़ी वाले खातों में न पहुंच जाए। बैठक में वित्तीय जानकारी के लिए पुलिस के अनुरोधों पर बैंकों की ओर से होने वाली देरी और असामान्य जमा की पहचान जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

पुलिस के अनुसार, 2026 में अब तक साइबर अपराधियों ने गोवा के निवासियों से लगभग 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। इस पहल का विशेष उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट घोटालों और फर्जी निवेश योजनाओं से प्रभावित बुजुर्ग ग्राहकों की सुरक्षा करना है।

अतिरिक्त जांच लागू RBI नियमों, ग्राहकों के अधिकारों और बैंकिंग प्रक्रियाओं के अनुरूप होनी चाहिए। इस पहल को वरिष्ठ नागरिकों द्वारा वैध धन हस्तांतरण पर किसी व्यापक कानूनी प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। संदिग्ध बड़े लेनदेन की समय रहते पहचान कर बैंक संभावित पीड़ितों का धन आपराधिक खातों तक पहुंचने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

महाराष्ट्र की तटीय पुलिस में भारतीय नौसेना के 282 पूर्व अग्निवीर शामिल होंगे

महाराष्ट्र सरकार ने भारतीय नौसेना के 282 पूर्व अग्निवीरों को राज्य की तटीय पुलिस में शामिल करने की मंजूरी दी है। इसकी घोषणा 23 अक्टूबर को हुई और 24 अक्टूबर को इस संबंध में आगे की जानकारी सामने आई।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इन नियुक्तियों का उद्देश्य तटीय सुरक्षा अभियानों को मजबूत करना है। इस समूह में डेक संचालन में प्रशिक्षित 150 और इंजन संचालन में प्रशिक्षित 132 कर्मी शामिल बताए गए हैं।

सरकार ने भर्ती नियमों में संशोधन किया है, ताकि पात्र पूर्व अग्निवीरों को सामान्य भर्ती परीक्षाएं दोबारा दिए बिना शामिल होने का अवसर मिल सके। इन कर्मियों से समुद्री गश्त और तटीय सुरक्षा अभियानों में सहयोग की अपेक्षा है। राज्य सरकार ने सेना और वायुसेना के पूर्व अग्निवीरों के लिए भी भर्ती के अवसरों की घोषणा की है।

समुद्री सुरक्षा में नौवहन, जहाज संचालन, निगरानी और सुरक्षा प्रक्रियाओं का विशेष ज्ञान आवश्यक होता है। प्रशिक्षित नौसैनिक कर्मियों को तटीय पुलिस में शामिल करने से समुद्री निगरानी, बंदरगाह सुरक्षा और तस्करी विरोधी अभियानों की तैयारियों को मजबूती मिल सकती है।

NCERT ने डीपफेक, गलत सूचना और डेटा गोपनीयता पर AI शिक्षा मॉड्यूल तैयार किया

National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर एक प्रारंभिक मॉड्यूल तैयार किया है। इससे संबंधित जानकारी 24 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट में सामने आई।

यह मॉड्यूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है। इसमें विद्यार्थियों को AI की अवधारणाओं, व्यावहारिक उपयोगों, सीमाओं और तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल से परिचित कराने की योजना है। पाठ्यवस्तु में डेटा गोपनीयता, गलत सूचना, निष्पक्षता, डिजिटल सुरक्षा और AI से तैयार जानकारी का आलोचनात्मक मूल्यांकन शामिल है।

कार्यक्रम में गतिविधि-आधारित शिक्षण का इस्तेमाल किया गया है, ताकि विद्यार्थी समझ सकें कि AI प्रणालियां कैसे काम करती हैं और उनके परिणामों का आकलन किस तरह किया जाना चाहिए।

मॉड्यूल तैयार होने का अर्थ यह नहीं है कि इसे देश के प्रत्येक स्कूल में समान रूप से लागू कर दिया गया है। AI साक्षरता और डिजिटल सुरक्षा की शिक्षा से गलत सूचना, कृत्रिम रूप से तैयार मीडिया और तकनीक के जरिए होने वाले छल के विरुद्ध दीर्घकालीन जागरूकता मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

चीन की Moonshot AI ने नए Kimi मॉडल की साइबर हमले की क्षमताएं सीमित कीं

चीनी AI डेवलपर Moonshot AI ने 24 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि उसने अपने नए Kimi K3.1 Pro मॉडल की आक्रामक साइबर सुरक्षा क्षमताओं को कम किया है। कंपनी की योजना इस मॉडल के ओपन वेट्स 4 नवंबर 2026 तक जारी करने की है।

Moonshot के अनुसार, मॉडल से साइबर सुरक्षा से संबंधित कुछ प्रशिक्षण सामग्री हटाई गई और रीइन्फोर्समेंट लर्निंग वातावरण में बदलाव किए गए। इन बदलावों का उद्देश्य सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का पता लगाने और उनका फायदा उठाने की मॉडल की क्षमता कम करना है।

कंपनी के परीक्षणों के अनुसार, संशोधित मॉडल ने नियंत्रित साइबर बेंचमार्क पर 81 प्रतिशत स्कोर हासिल किया। इसके मुकाबले, प्रतिबंधों के बिना मौजूद तुलनीय संस्करण का स्कोर 90.5 प्रतिशत था। कंपनी ने कहा कि उसका उद्देश्य संभावित दुरुपयोग घटाने के साथ वैध कोडिंग क्षमताओं को बनाए रखना है।

ये बेंचमार्क परिणाम कंपनी की ओर से बताए गए हैं और इनका स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है। संशोधित मॉडल में साइबर सुरक्षा से जुड़ी पर्याप्त क्षमताएं अब भी मौजूद हो सकती हैं।

उन्नत AI मॉडल सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का पता लगाने और साइबर हमलों को तेज करने में सक्षम हो सकते हैं। ऐसे मॉडलों को जारी करने से सुरक्षा उपायों, ओपन तकनीक और दुरुपयोग रोकने के बीच संतुलन को लेकर नई चुनौतियां सामने आती हैं।

यूक्रेनी लॉजिस्टिक्स कंपनी पर विनाशकारी साइबर हमले में रूस से जुड़े हैकरों ने विकेंद्रीकृत नेटवर्क का इस्तेमाल किया

साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ESET ने 22 अक्टूबर 2026 को खुलासा किया कि रूस से जुड़े हैकरों ने यूक्रेन की एक अनाज लॉजिस्टिक्स कंपनी को निशाना बनाने वाले साइबर हमले के दौरान विकेंद्रीकृत संचार नेटवर्क का इस्तेमाल किया था। हमला जुलाई 2025 में हुआ था, जबकि इसके तकनीकी निष्कर्ष मौजूदा रिपोर्टिंग अवधि में प्रकाशित किए गए।

शोधकर्ताओं ने Yggdrasil नामक स्वयंसेवकों द्वारा संचालित मेश नेटवर्क के इस्तेमाल की पहचान की। इसका उपयोग संक्रमित प्रणालियों के साथ संचार को छिपाने के लिए किया गया था। हमलावरों ने शुरुआत में फिशिंग के जरिए पहुंच बनाई और रिमोट-एक्सेस सॉफ्टवेयर तैनात किया।

जांचकर्ताओं को दस्तावेजों की चोरी, स्क्रीनशॉट, एडमिनिस्ट्रेटर स्तर तक पहुंच और बाद में डेटा नष्ट किए जाने के साक्ष्य मिले। बताया गया कि हमलावरों ने डेटा मिटाने के लिए SDelete नामक वैध फाइल-इरेजर यूटिलिटी का इस्तेमाल किया।

ESET ने शुरुआती घुसपैठ के लिए UAC-0099 को जिम्मेदार माना और आकलन किया कि हमले का विनाशकारी चरण Sandworm से जुड़ी गतिविधियों जैसा था। हालांकि, ESET यह निर्णायक रूप से स्थापित नहीं कर सका कि घुसपैठ के प्रत्येक चरण को किस समूह ने संचालित किया था या इस हमले से अनाज निर्यात संचालन बाधित हुआ था या नहीं।

यह मामला दिखाता है कि राज्य से जुड़े साइबर अभियान फिशिंग, छिपे हुए संचार, वैध प्रशासनिक उपकरणों और डेटा नष्ट करने की तकनीकों को एक साथ इस्तेमाल कर सकते हैं।

25 अक्टूबर 2026 का रणनीतिक आकलन: वित्तीय सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और AI नियंत्रण पर जोर

25 अक्टूबर 2026 के रणनीतिक आकलन के अनुसार, भारत के वित्तीय संस्थानों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के सामने तीन प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।

पहली प्राथमिकता अंदरूनी मिलीभगत से होने वाले वित्तीय अपराधों पर नियंत्रण है। दिल्ली में बैंकिंग जांच और सूरत में साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े मामले दिखाते हैं कि अपराधी कमजोर खाता खोलने की प्रक्रियाओं, कर्मचारियों की पहुंच, पहचान दस्तावेजों और म्यूल खातों के नेटवर्क का दुरुपयोग कर सकते हैं। इसके लिए बैंक कर्मचारियों की सत्यनिष्ठा की जांच, KYC सत्यापन, लेनदेन संबंधी खुफिया जानकारी, म्यूल खातों की पहचान और स्वतंत्र धोखाधड़ी जांच को मजबूत करना आवश्यक बताया गया है।

दूसरी प्राथमिकता तकनीक आधारित पुलिस जांच को अधिक विशेषज्ञ बनाना है। उत्तर प्रदेश में घोषित फॉरेंसिक क्षमताएं, गोवा में संदिग्ध बैंक हस्तांतरण रोकने के उपाय और महाराष्ट्र में तटीय पुलिस का विस्तार कानून प्रवर्तन को मजबूत करने के अलग-अलग तरीके हैं। तकनीकी विशेषज्ञता, वैज्ञानिक साक्ष्य, विशेष प्रशिक्षित कर्मियों और समन्वित प्रक्रियाओं को साथ लाकर जांच तथा संभावित पीड़ितों की सुरक्षा बेहतर की जा सकती है।

तीसरी प्राथमिकता AI और उन्नत साइबर खतरों के लिए सक्रिय सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है। C-DAC और Bank of India की साझेदारी उभरती वित्तीय तकनीकों में बढ़ते निवेश को दर्शाती है। AI मॉडल की क्षमताओं पर लगाए जा रहे प्रतिबंध और विकेंद्रीकृत साइबर हमले का बुनियादी ढांचा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर AI सुरक्षा, खतरे की सक्रिय पहचान, क्रिप्टोग्राफिक मजबूती और डिजिटल फॉरेंसिक तैयारियों की जरूरत को रेखांकित करते हैं।

भारतीय पुलिस, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकिंग-वित्तीय सेवा क्षेत्र और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए प्रमुख कदमों में खाता खोलने की प्रक्रियाओं, कर्मचारियों की भूमिका, KYC नियंत्रण और संदिग्ध लेनदेन की निगरानी का ऑडिट शामिल है। इसके साथ National Cyber Crime Reporting Portal की शिकायतों, लाभार्थी खातों, उपकरणों, पहचान दस्तावेजों और क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन के बीच संबंधों की जांच मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

वित्तीय जांच में फॉरेंसिक लेखांकन, अपराध से प्राप्त धन का पता लगाने और कानूनी रूप से टिकाऊ संपत्ति वसूली प्रक्रियाओं को मजबूत करना भी जरूरी बताया गया है। क्वांटम-सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी, AI आधारित धोखाधड़ी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण, रिमोट-एक्सेस जांच और मैलवेयर विश्लेषण को प्राथमिकता में शामिल किया गया है।

साइबर अपराध की रोकथाम के लिए संदिग्ध बड़े लेनदेन का सत्यापन, बैंक-पुलिस के बीच त्वरित समन्वय और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर समुद्री पुलिस व्यवस्था, तटीय निगरानी, खुफिया जानकारी साझा करने और विशेष सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण को मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। AI सुरक्षा के लिए मॉडलों की क्षमताओं, दुरुपयोग के जोखिमों, एजेंट अनुमतियों और स्वतंत्र सुरक्षा नियंत्रणों का मूल्यांकन भी आवश्यक है।

कुल मिलाकर, भारत में साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए वित्तीय खुफिया जानकारी, संस्थागत जवाबदेही, वैज्ञानिक जांच, AI के जिम्मेदार नियंत्रण और राष्ट्रीय सुरक्षा की विशेष क्षमताओं को एकीकृत करना महत्वपूर्ण होता जा रहा है। तत्काल प्राथमिकताओं में अंदरूनी धोखाधड़ी की पहचान, म्यूल खातों के नेटवर्क पर कार्रवाई, डिजिटल फॉरेंसिक तैयारी, बैंकिंग में निवारक नियंत्रण और खुफिया जानकारी पर आधारित पुलिसिंग को मजबूत करना शामिल है।

यह रिपोर्ट Centre for Police Technology (CPT) ने Algoritha Security के सहयोग से संकलित की है।