समालखा निरंकारी संत समागम में मंच पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी।

बड़ी सादड़ी। समालखा की पावन धरा पर आयोजित 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के तीसरे दिन देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भक्ति, श्रद्धा, प्रेम और एकत्व का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के दिव्य प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जागृति, निष्काम प्रेम और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। सतगुरु के पावन दर्शनों से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और समूचा वातावरण भक्ति, समर्पण एवं आत्मिक आनंद से आलोकित हो गया। गुरु और गुरसिख का यह मिलन प्रेम, मानवता तथा विश्वबंधुत्व की भावना को साकार करता दिखाई दिया।

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में कहा, ‘‘हर परिस्थिति में परमात्मा के प्रेम में स्थिर रहना ही सच्ची जागृति है।’’ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए उन्होंने कहा कि आत्मा का परमात्मा से मिलन और प्रत्येक पल निराकार प्रभु का अनुभव करना ही आध्यात्मिक जीवन का सार है। परमात्मा अटल सत्य है, जबकि मनुष्य की इच्छाएं और परिस्थितियां निरंतर बदलती रहती हैं। अनुकूल परिस्थितियों में आस्था बनाए रखना सरल होता है, लेकिन सच्ची भक्ति वही है, जो हर परिस्थिति में अडिग बनी रहे।

माता जी ने कहा कि ब्रह्मज्ञान से प्राप्त जागृति मनुष्य को जीवनभर सजग और सचेत रहने की प्रेरणा देती है। यह जागृति उसके व्यवहार, निर्णयों और सामाजिक जीवन में भी स्पष्ट दिखाई देनी चाहिए। अन्याय के विरुद्ध खड़े होते समय व्यक्ति को अपने उद्देश्य की पड़ताल करनी चाहिए कि उसका प्रयास वास्तव में भलाई के लिए है या उसके पीछे अहंकार, स्वार्थ और दिखावे की भावना है। विचारों में भिन्नता होने के बावजूद प्रत्येक व्यक्ति में परमात्मा का अंश देखकर उसे अपनाना ही निष्काम प्रेम की सच्ची पहचान है।


सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के दिव्य प्रवचनों से पहले निरंकारी राजपिता रमित जी ने जागरूकता का संदेश दिया। उन्होंने समझाया कि जीवन में जहां परिवर्तन संभव हो, वहां सकारात्मक प्रयास करने चाहिए। वहीं, जिन परिस्थितियों को बदलना संभव नहीं है, उन्हें सहजता से स्वीकार करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।

राजपिता रमित जी ने कहा कि मनुष्य संसार की आवश्यकताओं और भौतिक सुख-सुविधाओं के प्रति तो सजग रहता है, लेकिन अक्सर अपनी आत्मा की वास्तविक प्यास को अनदेखा कर देता है। परमात्मा के प्रेम और उसकी सर्वव्यापकता को पहचानना, अहंकार का त्याग करना तथा सच्ची जिज्ञासा, श्रद्धा और समर्पण के साथ जीवन व्यतीत करना ही वास्तविक आध्यात्मिक जागृति है।

इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सतगुरु का पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। कई पार्षदों और विधायकों ने भी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

समागम में दिव्यांग संत-महात्माओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया। सभी प्रवेश द्वारों पर व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई, ताकि दिव्यांग श्रद्धालु आसानी से समारोह स्थल तक पहुंच सकें। उनके ठहरने, भोजन और पेयजल की व्यवस्था के साथ कार्यक्रम देखने के लिए एलईडी स्क्रीन भी लगाई गईं। इसके अतिरिक्त, दिव्यांग संत-महात्माओं को समागम के दौरान सतगुरु के पावन दर्शन का लाभ भी मिला।

समागम परिसर में मिशन के स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग की ओर से व्यापक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके तहत 8 एलोपैथिक और 6 होम्योपैथिक डिस्पेंसरी, 15 प्राथमिक चिकित्सा केंद्र तथा एक कायरोप्रैक्टिक शिविर स्थापित किया गया। इसके अलावा, 15 आईसीयू सुविधाओं से युक्त 120 बिस्तरों वाला अस्थायी अस्पताल बनाया गया। आपातकालीन सेवाओं के लिए मिशन की 12 और हरियाणा सरकार की 30 एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई, जिनमें 15 एम्बुलेंस वेंटिलेटर युक्त थीं।

कायरोप्रैक्टिक शिविर में भारत और विदेशों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं दीं। इन चिकित्सकों ने निस्वार्थ भाव से उपचार और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं, जिससे हजारों अस्वस्थ लोगों को लाभ मिला। इसके अतिरिक्त, ईएनटी, नेत्र, बाल रोग, दंत चिकित्सा और मनोरोग सहित विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने श्रद्धालुओं को व्यापक एवं सटीक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान कीं।

श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था के तहत समागम परिसर में चार स्थानों पर सामुदायिक लंगर संचालित किया गया, जहां लाखों श्रद्धालुओं को दिन-रात भोजन उपलब्ध कराया गया। सभी को एक साथ बैठकर लंगर ग्रहण करते देख ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना साकार होती दिखाई दी। इसके साथ ही परिसर में 22 कैंटीनों के माध्यम से रियायती दरों पर अल्पाहार, चाय, कॉफी और मिनरल वाटर उपलब्ध कराया गया। इन व्यवस्थाओं ने श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ सेवा, समानता और सहयोग की भावना को भी सामने रखा।

79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी के संदेशों के साथ आध्यात्मिक जागृति, मानवता, निष्काम प्रेम और सेवा का महत्व रेखांकित हुआ। समागम में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन, स्वास्थ्य सेवाओं, दिव्यांगजनों की सुविधा और सामुदायिक भोजन की व्यापक व्यवस्थाएं की गईं। उक्त जानकारी निरंकारी मिशन बड़ी सादड़ी के संगत इंचार्ज राधेश्याम रेगर ने दी।

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