मानव के अंतरमन में सद्गुणों की प्राण प्रतिष्ठा से ही मनुष्य बनता है महान
निकुंभ के समता भवन में 39 दिनों से चल रही प्रवचन श्रृंखला में निश्छल मुनि मसा ने सद्गुण, आत्मावलोकन और सत्य का महत्व समझाया।
तस्वीर में समता भवन के बाहर लोग आते-जाते हुए नजर आ रहे हैं।
बड़ी सादड़ी। मानव के अंतरमन में सद्गुणों की प्राण प्रतिष्ठा से ही मनुष्य महान बनता है और जीवन में सदाचरण की ही पूजा होती है। यह विचार निकुंभ कस्बे के समता भवन में विगत 39 दिनों से चल रही प्रवचन श्रृंखला के दौरान शासन दीपक निश्छल मुनि मसा ने श्रावकों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
मुनि श्री ने कहा कि सद्गुरु के बार-बार समझाने के बावजूद मानव जीवन की गहराई को समझने का प्रयास नहीं करता। गुरु के उपदेश सुनने के बाद प्रत्येक मानव को जीवन में सारगर्भित आत्मावलोकन की आवश्यकता है। यदि सद्गुरु की बातों का पालन किया जाए तो जन्म-जन्मांतरों के पापों से भी मुक्ति संभव है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को समय-समय पर अपने अंतरमन में झांककर सही और गलत के बारे में निर्णय लेना चाहिए। सदैव दूसरों का दोष देखना निश्चित रूप से पाप का वरण करना है, जबकि अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर भी जीवन में बराबर मिलता है। मनुष्य यदि वर्तमान और भविष्य में आत्मा की रक्षा के लिए इस संसार को पुस्तक समझकर पढ़ने का प्रयास करेगा तो परमार्थिक सत्य को प्राप्त कर जीवन को सार्थक बना सकता है।
मुनि श्री ने जीवन में सत्य के तीन प्रकार बताते हुए प्रतिभासी सत्य, व्यवहारी सत्य और परमार्थिक सत्य की विशद व्याख्या की। उन्होंने बताया कि जीवन में अहंकार की आवाज मानव को सदैव धर्म से विचलित करती है। मानव देह नर से नारायण बनने के लिए मिली है। मानव अपनी मनोभूमि पर सहजता और सरलता के बीज बोकर परमात्मा के नजदीक पहुंच सकता है।
संघ अध्यक्ष महावीर कुमार मेहता ने तप, तपस्या और साधर्मिक सामूहिक वंदना के बारे में जानकारी दी। श्रावक भानु कुमार सोनी ने समय की आवश्यकता और महत्व को रेखांकित किया। श्री राम सत्संग सेवा परिषद के अध्यक्ष प्रेम सिंह सिसोदिया ने सनातन श्रावकों से मुनिश्री के प्रवचनों का लाभ लेकर मानव जीवन में पुरुषार्थ के माध्यम से जीवन की सार्थकता प्रमाणित करने का आह्वान किया तथा मुनिश्री के तप, त्याग और तपस्या के लिए सुखद वंदना की।
श्रावक नंदलाल सालवी द्वारा विगत 24 दिन से निरंतर तपस्या करने पर सामूहिक अनुमोदन वंदन किया गया। प्रवचन श्रृंखला में सद्गुण, आत्मावलोकन, सत्य और आत्मा की रक्षा के माध्यम से मानव जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया गया।