तस्वीर में प्रज्ञान महाविद्यालय आकोला परिसर में शिक्षक दिवस कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं समूह में खड़े और बैठे हुए नजर आ रहे हैं।

आकोला। शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रज्ञान महाविद्यालय आकोला में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि शिक्षक वह होता है, जो स्वयं जलकर दूसरों का जीवन प्रकाशित करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाता ही नहीं, बल्कि जीवन जीना भी सिखाता है।

एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी कन्हैयालाल मेघवाल ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने विश्व मंच पर एक शिक्षक के रूप में भारत को गौरवान्वित किया है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से उनके विचारों को अपने जीवन में आत्मसात कर लक्ष्य प्राप्ति की ओर बढ़ने का आह्वान किया।



प्राध्यापिका शमा रोसन मंसूरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं द्वितीय राष्ट्रपति रहे। साथ ही वे भारतीय संस्कृति के संवाहक एवं महान शिक्षक विद भी रहे हैं। इन्हीं गुणों के कारण 1954 में भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया।

कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवक रत्नेश सालवी, निशा धुपड़, निधी प्रजापत और जमना लोहार ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रबंध निदेशक शांतिलाल शर्मा, प्राध्यापिका रतन देवी, श्रीमती मनीषा, नरेंद्र कुमार प्रजापत और आर. डी. शर्मा ने शिक्षक दिवस मनाने की औचित्य पर प्रकाश डालते हुए स्वयंसेवकों को प्रेरित किया।

कार्यक्रम का सफल संचालन ज्योति साहू, कायनात बानू एवं श्रुति टांक ने किया। इस दौरान आरती टेलर, पूजा खटीक, खुशी मंसूरी, तनीषा मोची, परी खटीक आदि छात्र-छात्राओं ने महाविद्यालय के सभी स्टाफ सदस्यों का माला पहनाकर एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। शिक्षक दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में शिक्षकों के योगदान, उनके जीवन मूल्यों और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में उनकी भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

Tags: