कम कीमत में स्टाइलिश कपड़े, जानिए कैसे बड़ी-बड़ी ब्रांड्स को कड़ी टक्कर दे रहा है टाटा का Zudio|
कम कीमत और ट्रेंडी कपड़ों के दम पर टाटा ग्रुप के ब्रांड जूडियो ने भारतीय फैशन बाजार में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
टाटा ग्रुप के ब्रांड जूडियो के स्टोर के बाहर का नजारा और बिजनेस ग्रोथ के संदर्भ में उद्योगपति की तस्वीर।
भारतीय फैशन बाजार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान टाटा ग्रुप के ब्रांड जूडियो ने अपनी एक बेहद मजबूत और खास पहचान बनाई है। आज के समय में ट्रेंडी और फैशनेबल कपड़े खरीदने के लिए ग्राहकों को हजारों रुपये खर्च करने की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है। टाटा ग्रुप की कंपनी ट्रेंट के इस ब्रांड ने बहुत कम कीमत पर बेहतरीन कपड़े उपलब्ध कराकर बाजार में क्रांति ला दी है। देश के बड़े महानगरों के साथ-साथ छोटे और टियर-2, टियर-3 शहरों में भी इसके स्टोर तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। इस अनोखी सफलता ने ट्रेंट कंपनी को शेयर बाजार में भी काफी चर्चित और मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है। जूडियो की इस शानदार कामयाबी का मुख्य राज केवल सस्ते कपड़े बेचना नहीं है, बल्कि एक ऐसा अनूठा बिजनेस मॉडल तैयार करना है जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों और शहरों में बहुत आसानी से दोहराया जा सके।
जूडियो की इस शानदार कहानी की शुरुआत साल 2016 में ट्रेंट कंपनी के अंतर्गत हुई थी। इससे पहले कंपनी वेस्टसाइड जैसे ब्रांड्स के जरिए फैशन सेक्टर में सक्रिय थी, लेकिन उनका मुख्य फोकस अपेक्षाकृत प्रीमियम और महंगे ग्राहकों पर हुआ करता था। उस दौर में देश के युवाओं और कॉलेज जाने वाले छात्रों का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा था जो लेटेस्ट फैशन के कपड़े पहनना चाहता था, लेकिन वह एक साधारण शर्ट या ड्रेस पर 1,000 से 2,000 रुपये खर्च करने में असमर्थ था या खर्च नहीं करना चाहता था। जूडियो ने ग्राहकों की इसी नब्ज़ को बहुत अच्छी तरह पहचाना और बेहद किफायती दामों में ट्रेंडी कपड़े मार्केट में उतार दिए। इस सुनियोजित रणनीति ने विशेष रूप से कॉलेज के छात्रों और मध्यम वर्गीय परिवारों के साथ छोटे शहरों के ग्राहकों को अपनी ओर तेजी से आकर्षित किया।
वैश्विक स्तर पर मशहूर Zara और H&M जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स भी नए फैशन ट्रेंड्स को कम समय में ग्राहकों तक पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन जूडियो ने पूरी तरह से भारतीय बाजार, यहाँ के उपभोक्ताओं की पसंद और उनके बजट को ध्यान में रखकर अपना अलग बिजनेस मॉडल तैयार किया। इस मॉडल के तहत ग्राहक बहुत कम बजट में एक साथ कई कपड़े आसानी से खरीद सकते हैं। इसके अलावा, कंपनी द्वारा अपेक्षाकृत छोटे आकार के स्टोर खोले जाने से नए-नए शहरों में अपनी पहुँच का विस्तार करना बहुत आसान हो गया। बदलते हुए फैशन ट्रेंड्स के मुताबिक लगातार नया कलेक्शन पेश करने की वजह से ग्राहकों को हर बार बाजार में नया अनुभव मिलता है और वे बार-बार खरीदारी के लिए आकर्षित होते हैं। कम कीमत और आसान खरीदारी के इस मेल ने जूडियो को देश के छोटे शहरों के युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है।
इतनी कम कीमतों पर आकर्षक कपड़े बेचने के लिए कंपनी के लिए अपनी लागत पर कड़ा नियंत्रण रखना बेहद जरूरी होता है। जूडियो बड़े पैमाने पर माल की खरीदारी करता है, अपनी सप्लाई चेन को मजबूत रखता है और स्टॉक को तेजी से बेचने पर जोर देता है, जिससे लागत को काफी हद तक घटाने में मदद मिलती है। जूडियो का पूरा बिजनेस मॉडल किसी एक कपड़े पर बहुत ज्यादा मुनाफा कमाने की बजाय बड़ी संख्या में ग्राहकों तक सामान पहुँचाने और अधिक से अधिक स्टोर खोलने के सिद्धांत पर काम करता है। हालांकि, इस रणनीति को सफल बनाए रखने के लिए कंपनी को अपने हर एक स्टोर की बिक्री और होने वाले खर्च के बीच एक सही संतुलन बनाकर चलना पड़ता है, ताकि कारोबार सुचारू रूप से आगे बढ़ता रहे।
जूडियो का लगातार होता हुआ तेज विस्तार इसकी सफलता की पूरी कहानी को बयां करता है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान देश भर में इसके महज 80 के करीब स्टोर हुआ करते थे, जो बढ़ते-बढ़ते वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक बढ़कर 765 तक पहुँच गए। इसके बाद मार्च 2026 तक ट्रेंट के पास कुल 963 जूडियो स्टोर हो चुके थे और साल 2026 के जून महीने तक इनकी संख्या में और इजाफा हुआ तथा यह बढ़कर 982 तक पहुँच गई। इन सभी आंकड़ों में यूएई (UAE) में मौजूद स्टोर भी शामिल हैं। इतनी रफ्तार से बढ़े स्टोर नेटवर्क ने कंपनी को नए बाजारों में उतरने और अधिक से अधिक ग्राहकों तक अपनी सीधी पहुँच बनाने का बेहतरीन अवसर प्रदान किया है।
जूडियो के इस जबरदस्त विस्तार ने पैरेंट कंपनी ट्रेंट की किस्मत को पूरी तरह से बदल कर रख दिया और उसे कम कीमत वाले फैशन मार्केट में लीडर बनने का मौका दिया। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने नेट आधार पर कुल 198 नए जूडियो स्टोर जोड़े, जबकि इसी अवधि में वेस्टसाइड के स्टोरों में 52 की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी वित्तीय वर्ष के दौरान ट्रेंट का कुल परिचालन राजस्व बढ़कर 19,701 करोड़ रुपये पर पहुँच गया और कंपनी का शुद्ध मुनाफा 1,968 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। सालाना आधार पर कंपनी के राजस्व में लगभग 18.2 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी देखने को मिली। निवेशकों को भी जूडियो में एक ऐसे मजबूत ब्रांड की अपार संभावनाएं दिखाई दीं, जो छोटे शहरों से लेकर देश के बड़े बाजारों तक अपनी पैठ लगातार मजबूत कर सकता है, और यही वजह है कि ट्रेंट के शेयर ने पिछले पांच वर्षों के दौरान निवेशकों को 498 प्रतिशत से भी अधिक का बंपर रिटर्न दिया है।
हालांकि, इतनी तेज रफ्तार से हो रहे विस्तार के साथ-साथ कंपनी के सामने कुछ नई चुनौतियां भी खड़ी हो रही हैं। जूडियो के लिए अब केवल नए स्टोर खोलना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके लिए यह भी बेहद जरूरी है कि वह अपने प्रत्येक स्टोर पर बिक्री के आंकड़े और मुनाफे को लगातार बनाए रखे। यदि एक ही क्षेत्र या इलाके में बहुत पास-पास कई स्टोर खोल दिए जाते हैं, तो नए स्टोर पर आने वाले ग्राहक अक्सर पुराने स्टोर से ही आ सकते हैं, जिससे स्टोरों की कुल संख्या बढ़ने के बावजूद प्रति स्टोर होने वाली औसत बिक्री में गिरावट आ सकती है। इस स्थिति को व्यावसायिक भाषा में कैनिबलाइजेशन कहा जाता है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान ट्रेंट के फैशन स्टोरों की कुल संख्या में सालाना आधार पर 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन इसके मुकाबले प्रति स्टोर से मिलने वाले राजस्व में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट भी देखने को मिली।
बढ़ते कारोबार के बीच जूडियो को बाजार में अन्य बड़े प्रतिस्पर्धियों से भी कड़ी टक्कर मिल रही है, जिनमें रिलायंस ट्रेंड्स, मैक्स फैशन, पैंटालून्स के अलावा कई बड़े ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स और स्थानीय दुकानें भी शामिल हैं। इसके अलावा, फैशन के रुझान और ट्रेंड्स बहुत तेजी से बदलते हैं, जिसके कारण कई बार पुराने पड़े हुए स्टॉक को समय पर बेचना और उसे क्लियर करना भी एक कठिन काम बन जाता है। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद जूडियो ने अपनी कम कीमत, आधुनिक और ट्रेंडी डिजाइन तथा छोटे आकार के स्टोर के फार्मूले से एक ऐसा व्यावहारिक बिजनेस मॉडल तैयार कर दिखाया है जिसे देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में आसानी से लागू किया जा सकता है। इसके साथ ही, टाटा समूह जैसा बड़ा और विश्वसनीय नाम जुड़ा होने के कारण इस ब्रांड को भारतीय ग्राहकों का भरोसा जीतने में भी बहुत मदद मिली है।