क्या है रिलायंस के नए बॉन्ड इश्यू की कहानी? जहाँ बैंकों ने तो दिखाया दम, पर LIC रही दूर|
रिलायंस इंडस्ट्रीज बॉन्ड के जरिए 12,500 करोड़ रुपये जुटा रही है, जिसमें बैंकों ने बड़ी रुचि दिखाई है लेकिन एलआईसी ने दूरी बनाई है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज और एलआईसी के वित्तीय प्रतीकों के साथ बाजार में शेयरों की तेजी को दर्शाती तस्वीर।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) एक बार फिर बाजार से बड़ी रकम जुटाने जा रही है, लेकिन इस बार का यह बॉन्ड इश्यू कुछ अलग कारणों से चर्चा में है। देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड इश्यू के जरिए कुल 12,500 करोड़ रुपये जुटा रही है। नवंबर 2023 के बाद रिलायंस का यह पहला रुपया बॉन्ड ऑफर है, जिस पर सालाना कूपन यानी वार्षिक ब्याज 7.47% तय किया गया है। यह पूरा ट्रांजैक्शन 18 सितंबर को बंद होने वाला है।
इस इश्यू में 10,000 करोड़ रुपये का बेस साइज और 2,500 करोड़ रुपये का ग्रीनशू विकल्प शामिल है। खास बात यह है कि इस इश्यू का लगभग 3,000 करोड़ रुपये का हिस्सा एंकर इन्वेस्टर्स को दे दिया गया है और बाकी का बचा हुआ हिस्सा भी पूरी तरह से सब्सक्राइब (Fully Subscribed) हो चुका है। इस पूरे लेनदेन को मैनेज करने वाले प्रमुख बैंकों में एक्सिस बैंक, HDFC बैंक, ICICI बैंक और यस बैंक शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बॉन्ड का सबसे बड़ा हिस्सा एक्सिस बैंक को मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद ICICI बैंक, HDFC बैंक और यस बैंक का नंबर आता है।
हालांकि इस डील में देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी यानी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। पिछले साल यानी 2023 में आए रिलायंस के रिटेल बॉन्ड इश्यू की मैच्योरिटी अवधि 10 साल थी, जिसमें एलआईसी ने एक बड़े निवेशक के रूप में भारी भागीदारी की थी। लेकिन इस बार एलआईसी ने कोई बड़ा दांव नहीं लगाया है। इसके पीछे मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि इस बार के बॉन्ड की मैच्योरिटी अवधि सिर्फ पांच साल है। इसके अलावा, इस समय बैंकिंग सेक्टर में लिक्विडिटी (नकदी) काफी अच्छी है।
इस समय बैंकों के पास पैसों की कोई कमी नहीं है, जिसकी एक बड़ी वजह विदेशी मुद्रा जमा में बढ़ोतरी है। भारतीय बैंकों ने आरबीआई की स्पेशल स्वैप सुविधा के तहत FCNR (B) डिपॉजिट्स के जरिए रिकॉर्ड रकम जुटाई है। 31 अगस्त तक बैंकों ने इस योजना के तहत 127.2 अरब डॉलर जुटाए, जिससे इस स्पेशल स्कीम के तहत कुल इनफ्लो 136.4 अरब डॉलर पहुंच गया है। अकेले आईसीआईसीआई बैंक ने एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट के जरिए 17.88 अरब डॉलर जुटाए हैं।
बैंकों के पास मौजूद इस अतिरिक्त नकदी का इस्तेमाल कॉर्पोरेट लोन, प्रोजेक्ट फाइनेंस, कॉर्पोरेट बॉन्ड और वर्किंग कैपिटल जैसी जरूरतों के लिए किया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस अतिरिक्त लिक्विडिटी के कारण आने वाली तिमाहियों में कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ में तेजी देखने को मिल सकती है, हालांकि बैंकों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा की वजह से लेंडिंग स्प्रेड पर थोड़ा दबाव भी आ सकता है।