विदेश में छूटी संपत्ति बताने का मौका, आज से शुरू हुई FAST-DS योजना; 31 दिसंबर तक मिलेगा लाभ|
छोटे करदाता 31 दिसंबर तक विदेश में छूटी अघोषित संपत्ति और आमदनी का FAST-DS योजना के तहत कर सकेंगे खुलासा।
डॉलर के बंडलों का आदान-प्रदान करते हुए व्यक्ति के हाथ और पीछे आधुनिक इमारत, इनकम टैक्स की नई FAST-DS स्कीम के संदर्भ में|
कर दाताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है, जिसके तहत आयकर विभाग ने छोटे करदाताओं को विदेश में छूटी हुई अघोषित संपत्ति और आमदनी का खुलासा करने का शानदार मौका दिया है। इसके लिए फॉरेन असेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर डिसक्लोजर स्कीम यानी FAST-DS को आधिकारिक तौर पर नोटिफाई कर दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने आम बजट के दौरान इस वन-टाइम स्कीम की घोषणा की थी, जो अब आज से यानी 16 अगस्त से लागू हो चुकी है। इस योजना का लाभ करदाता 31 दिसंबर तक उठा सकेंगे, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
इस योजना के तहत वे सभी करदाता अपनी विदेशी संपत्ति या आमदनी की जानकारी दे सकेंगे, जो इसे अपने सामान्य इनकम टैक्स रिटर्न में दर्ज करना भूल गए थे। इसमें विशेष रूप से विदेश जाने वाले छात्र, युवा प्रोफेशनल, टेक कर्मचारी और एनआरआई (NRI) जैसे छोटे करदाता शामिल हैं। इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों को पारदर्शी तरीके से अपनी विदेशी संपत्तियों की जानकारी देने का अवसर प्रदान करना है, ताकि उन्हें भविष्य में किसी बड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
FAST-DS योजना के नियमों को पांच प्रमुख बिंदुओं के तहत स्पष्ट किया गया है। पहली श्रेणी के अंतर्गत 1 करोड़ रुपये तक की ऐसी विदेशी संपत्ति आती है, जिसकी जानकारी पहले कभी नहीं दी गई थी। इस पर संपत्ति की 31 मार्च 2026 की फेयर मार्केट वैल्यू के 30 प्रतिशत के बराबर टैक्स और उतनी ही अतिरिक्त रकम चुकानी होगी, जिससे कुल प्रभावी टैक्स 60 प्रतिशत तक हो जाएगा। दूसरी श्रेणी में ऐसी विदेशी संपत्ति शामिल है, जिसे पहले से टैक्स चुकाई गई आमदनी से खरीदा गया था या जो एनआरआई रहते हुए हासिल की गई थी, लेकिन रिटर्न में बताना भूल गए थे। ऐसी संपत्ति के मामले में 5 करोड़ रुपये तक की सीमा पर 1 लाख रुपये की फीस चुकानी होगी, हालांकि इससे अधिक की संपत्ति पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि तय समय के भीतर निर्धारित टैक्स या फीस का भुगतान करने पर करदाताओं को ब्लैक मनी से जुड़े कड़े कानूनों के तहत किसी भी प्रकार के मुकदमे और अतिरिक्त जुर्माने से पूरी राहत मिलेगी। घोषित की गई संपत्ति या आमदनी को ब्लैक मनी एक्ट के तहत कुल आय में भी नहीं जोड़ा जाएगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अनुसार, विदेशी संपत्ति का खुलासा करने और उस पर लागू टैक्स या फीस का पूरा भुगतान ऑनलाइन माध्यम से ही करना होगा। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों या अपराध के जरिए हासिल की गई संपत्ति पर यह योजना लागू नहीं होगी। यह पहल करदाताओं के लिए अपनी पुरानी चूकों को सुधारने और अनुपालन को आसान बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो रही है।