सरकारी अस्पताल में देवी-देवताओं की तस्वीरों वाली टाइल्स से फर्श, हिंदू आस्था से खिलवाड़ का आरोप
भीलवाड़ा के रायपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में देवी-देवताओं की तस्वीरों वाली टाइल्स फर्श में लगाए जाने से विवाद खड़ा हो गया है। अधिकारी ने निरीक्षण कर टाइल्स हटवाने और फर्श की मरम्मत कराने की बात कही है।
तस्वीर में रायपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के फर्श का निरीक्षण करते हुए अधिकारी और स्थानीय लोग नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर काल्पनिक है और एआई द्वारा केवल संदर्भ के लिए बनाई गई है।
गंगापुर (भीलवाड़ा)। रायपुर कस्बे में हिंदू आस्था से जुड़ा मामला सामने आया है। बोराणा मार्ग स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर के एक भवन में फर्श निर्माण के लिए देवी-देवताओं की तस्वीरों और धार्मिक प्रतीकों वाली टाइल्स का इस्तेमाल किया गया है। मरीजों और उनके परिजनों की आवाजाही वाले स्थान पर भगवानों की तस्वीरों वाली टाइल्स पैरों तले होने को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत होने की बात कही जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, फर्श में भगवान शिव-पार्वती, श्रीकृष्ण, माताजी, गणेश जी, भगवान राम, लक्ष्मण एवं माता सीता की तस्वीरों वाली टाइल्स लगाई गई हैं। इसके साथ ही स्वास्तिक, लाभ-शुभ, ॐ सहित वैदिक मंत्रों और धार्मिक प्रतीकों वाली टाइल्स भी फर्श में दिखाई दे रही हैं।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जैसे सार्वजनिक एवं संवेदनशील स्थान पर धार्मिक आस्था से जुड़े चित्रों को फर्श में लगाए जाने का मामला सामने आने के बाद निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि देवी-देवताओं की तस्वीरों को फर्श पर लगाना धार्मिक भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता है और ऐसे निर्माण कार्य में धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरती जानी चाहिए थी।
मामले की जानकारी मिलने पर रायपुर ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी अभिनव मीणा ने मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि संबंधित भवन का निर्माण करीब चार वर्ष पूर्व हुआ था। मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही देवी-देवताओं की तस्वीरों वाली टाइल्स को ससम्मान हटवाकर फर्श की मरम्मत करवाई जाएगी।
अब सवाल यह है कि सार्वजनिक भवन के निर्माण में ऐसी टाइल्स लगाने की अनुमति किस स्तर पर दी गई और निर्माण के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों ने इसकी जांच क्यों नहीं की। धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस मामले में कार्रवाई के साथ यह स्पष्ट होना भी जरूरी है कि ऐसी लापरवाही के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी।