भीलवाड़ा: जोगी समाज ने विवाह और मृत्युभोज के लिए तय किए नए नियम
भीलवाड़ा के चांदरास में जोगी समाज की महापंचायत में फिजूलखर्ची रोकने और सामाजिक अनुशासन के लिए 9 कड़े नियम लागू किए गए हैं।
भीलवाड़ा के चांदरास में आयोजित महापंचायत में समाज के प्रबुद्ध जन और पटेल सामाजिक सुधारों पर चर्चा करते हुए।
भीलवाड़ा जिले की माण्डल तहसील स्थित ग्राम पंचायत चांदरास में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिसने सामाजिक सुधार की दिशा में एक नई बहस छेड़ दी है। जिले के पांच गांवों—लादूवास, चांदरास, जोगरास, कापड़िया और फतहपुरा के जोगी समाज ने एक महापंचायत का आयोजन किया। इस बैठक में समाज के प्रबुद्ध जनों और पांचों गांवों के पटेलों ने सर्वसम्मति से समाज में व्याप्त कुरीतियों और फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने के लिए नौ कठोर नियम लागू करने का संकल्प लिया। यह निर्णय न केवल समाज की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लिया गया है, बल्कि इसे सामाजिक अनुशासन की दिशा में एक साहसी कदम माना जा रहा है।
बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार, अब सगाई की रस्म पर होने वाले 20 से 25 हजार रुपये के खर्च को घटाकर मात्र 5,000 रुपये निर्धारित कर दिया गया है। इसी प्रकार, लड़के पक्ष की ओर से शादी के दौरान होने वाले 40,000 रुपये के खर्च को कम करके 10,000 रुपये और पडला प्रथा के खर्च को 5,000 से घटाकर 2,000 रुपये कर दिया गया है। विवाह संबंधी रिश्तों की गरिमा बनाए रखने के लिए यह प्रावधान किया गया है कि यदि कोई पक्ष बिना किसी ठोस कारण के रिश्ता तोड़ता है, तो पांच पटेलों द्वारा जांच के उपरांत दोषी पर 40,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
सामाजिक मर्यादाओं को सुरक्षित रखने के लिए पंचायत ने अत्यंत कड़े नियम बनाए हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी विवाहित महिला को भगा ले जाता है, तो उसे एक महीने के भीतर वापस लौटाने पर 1,25,000 रुपये का जुर्माना देना होगा, जबकि महिला को वापस न लौटाने की स्थिति में यह दंड राशि बढ़ाकर 2,50,000 रुपये कर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, समाज में रात्रि विवाहों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है और अब सभी मांगलिक कार्यक्रम दिन में या सूर्यास्त से पहले संपन्न करने होंगे। मृत्युभोज में फिजूलखर्ची रोकने हेतु मिठाई के निर्माण को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है और अब केवल दाल, पुरी और लपसी जैसे पारंपरिक व्यंजनों की ही अनुमति होगी।
अनुशासन सुनिश्चित करने हेतु यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी मांगलिक या आध्यात्मिक आयोजन के दौरान शराब पीकर हुड़दंग करने वाले व्यक्ति पर 1,200 रुपये का जुर्माना और समाज के समक्ष सार्वजनिक माफी अनिवार्य होगी। साथ ही, किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में सर्वप्रथम पांच पटेलों के पास जाकर समाधान खोजना अनिवार्य होगा, और उनके निर्णय के विफल होने पर ही पुलिस प्रशासन का रुख किया जा सकेगा। घुमन्तु जिला सहसंयोजक भंवर नाथ सहित समाज के वरिष्ठ नागरिकों ने चेतावनी दी है कि इन नियमों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध कठोर सामाजिक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यह महापंचायत आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नई और मर्यादित सामाजिक व्यवस्था की नींव रखने के रूप में देखी जा रही है।