भीलवाड़ा में 20 लाख की लूट का खुलासा: कर्मचारी ने रची थी साजिश

भीलवाड़ा पुलिस ने नेशनल फुट कंपनी के कर्मचारी और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया। आरोपी ने स्वयं पर हमले का नाटक कर लूट की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

Update: 2026-07-01 14:45 GMT

भीलवाड़ा के पॉश शास्त्रीनगर इलाके में बीते दिनों हुई ₹20 लाख की सनसनीखेज लूट का मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं निकला। पुलिस की तत्परता ने महज 24 घंटे के भीतर इस वारदात की ऐसी परतें खोलीं, जिसने न केवल शहरवासियों को हैरान कर दिया, बल्कि विश्वास और धोखे के अंतर को भी स्पष्ट कर दिया। जांच में यह सामने आया कि लूट की यह पूरी साजिश किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि पीड़ित व्यापारी की फर्म में कार्यरत एक विश्वासपात्र कर्मचारी ने रची थी, जिसने मोटी रकम हासिल करने के लिए स्वयं पर हमले का झूठा स्वांग रचा।

मामले की शुरुआत 29 जून 2026 की दोपहर को हुई, जब नेशनल फुट कंपनी के मालिक चंद्रप्रकाश चांदवानी ने अपने कर्मचारी रघुवीर सिंह सांखला उर्फ राजवीर को ₹20 लाख की बड़ी नकद राशि बैंक में जमा कराने के लिए भेजा था। कुछ देर बाद, राजवीर ने अपने मालिक को सूचित किया कि शास्त्रीनगर के सेठ मुरलीधर मानसिका स्कूल के निकट दो नकाबपोश बदमाशों ने उसे एक्टिवा से गिरा दिया और रुपयों से भरा बैग व मोबाइल लूटकर फरार हो गए। दिनदहाड़े हुई इस वारदात से इलाके में हड़कंप मच गया और तुरंत कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया गया।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने तत्काल प्रभाव से एक विशेष टीम का गठन किया। पुलिस ने शास्त्रीनगर से लेकर व्यापारी के कार्यालय तक के विस्तृत रूट का तकनीकी विश्लेषण किया और सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कर्मचारी द्वारा बताई गई कहानी में विरोधाभास सामने आने लगे। एएसपी पारस जैन और डीएसपी सज्जन सिंह राठौड़ के निर्देशन में हुई कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी रघुवीर सिंह सांखला अंततः टूट गया और उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि ₹20 लाख की भारी भरकम राशि को देखकर कर्मचारी की नीयत डोल गई थी। उसने इस साजिश को अंजाम देने के लिए अपने सगे भाई श्री नारायण सिंह सांखला और दोस्त विशाल साहु को साथ लिया। योजना के अनुसार, इन लोगों ने लूट का ड्रामा रचा और खुद पर हमला करने का नाटक किया ताकि किसी को शक न हो। पुलिस ने तीनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया है। वर्तमान में पुलिस टीम लूटी गई पूरी राशि की बरामदगी के प्रयासों में जुटी हुई है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कानून की नजर से बचना असंभव है, और अपराधी चाहे कितनी भी चतुराई से योजना क्यों न बनाए, अंततः सत्य की जीत होती है।

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