भीलवाड़ा कोर्ट का बड़ा फैसला: दादी की हत्या और पोती पर जानलेवा हमले के दोषी को उम्रकैद
भीलवाड़ा की अदालत ने करीब पांच साल पुराने दादी-पोती पर जानलेवा हमले के मामले में आरोपी आबिद हुसैन उर्फ बल्लू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
भीलवाड़ा में दादी-पोती पर जानलेवा हमले के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी आबिद हुसैन उर्फ बल्लू को अदालत ले जाती हुई पुलिस। इस तस्वीर में आरोपी और सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा में करीब पांच साल पुराने दादी-पोती पर जानलेवा हमले के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (महिला उत्पीड़न) ने फैसला सुनाते हुए आरोपी आबिद हुसैन उर्फ बल्लू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। बनेड़ा कस्बे में घर में घुसकर महिला और उसकी नौ वर्षीय पोती पर धारदार हथियार से हमला करने के मामले में अदालत ने प्रतापनगर, चित्तौड़गढ़ निवासी आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोषी पर कुल 35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बनेड़ा के घाटी के बालाजी रोड निवासी नरेंद्र पुत्र रमेश सांसी ने 15 जुलाई 2021 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि 14 जुलाई 2021 की रात उनकी मां गुरगुल और नौ वर्षीय बेटी तनीषा घर के कमरे में सो रही थीं। इसी दौरान आबिद हुसैन ने घर में घुसकर दोनों पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया। हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गईं।
घटना के बाद घायलों को उपचार के लिए पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बनेड़ा ले जाया गया। वहां से उन्हें महात्मा गांधी अस्पताल, भीलवाड़ा रेफर किया गया। उपचार के दौरान गुरगुल की मृत्यु हो गई। इसके बाद मामले में दर्ज रिपोर्ट के आधार पर न्यायिक कार्रवाई आगे बढ़ी।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक अदिति सेठिया ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 27 गवाहों के बयान दर्ज कराए और 102 महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए। न्यायिक कार्यवाही के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आबिद हुसैन उर्फ बल्लू को दोषी ठहराया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (महिला उत्पीड़न) के विद्वान न्यायाधीश ने दोषी को भारतीय दंड संहिता की पांच धाराओं के तहत सजा सुनाई। धारा 302 के तहत हत्या के अपराध में आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास के अपराध में भी आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
इसी तरह, धारा 324 के तहत धारदार हथियार से चोट पहुंचाने के अपराध में तीन वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। धारा 201 के तहत साक्ष्य मिटाने के अपराध में तीन वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 406 के तहत रात में घर में जबरन घुसने के अपराध में पांच वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी अर्थदंड की राशि जमा नहीं कराता है, तो उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। करीब पांच साल पुराने इस मामले में आए फैसले के साथ दादी की हत्या और उनकी नौ वर्षीय पोती पर जानलेवा हमले से जुड़े प्रकरण में न्यायिक कार्यवाही का अहम पड़ाव पूरा हुआ है।