खरैरी ग्राम पंचायत में सूचना नहीं देने पर हाईकोर्ट सख्त, वीडीओ, सरपंच समेत पंचायत विभाग को नोटिस
भरतपुर के बयाना स्थित ग्राम पंचायत खरैरी में सूचना नहीं देने के मामले में हाईकोर्ट ने वीडीओ, सरपंच और पंचायत विभाग को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा।
भरतपुर जिले की पंचायत समिति बयाना की ग्राम पंचायत खरैरी में सूचना के अधिकार से जुड़े एक अहम मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने सुनवाई करते हुए ग्राम पंचायत खरैरी के वीडीओ, सरपंच सहित पंचायत विभाग को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब तलब किया है। न्यायालय ने सूचना उपलब्ध नहीं कराने के मामले को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद नियत की है।
प्रकरण के अनुसार, याचिकाकर्ता बादल शर्मा, वरिष्ठ कार्यालय सहायक, राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर ने 15 जनवरी 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन में वर्ष 2021 से 2026 तक ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों का विवरण, उनके लिए स्वीकृत एवं व्यय की गई राशि, कार्य कराने वाली एजेंसी तथा पंचायत की 18 पंजिकाओं (रजिस्टरों) के लेखे-जोखे की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं।
याचिका के अनुसार, ग्राम पंचायत खरैरी के लोक सूचना अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी ने कानून में निर्धारित 30 दिन की अवधि बीत जाने के बाद भी न तो कोई सूचना उपलब्ध कराई और न ही कोई जवाब दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं सरपंच के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत की, लेकिन वहां भी न कोई निर्णय हुआ और न ही मांगी गई सूचना उपलब्ध कराई गई।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने राजस्थान राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की। सूचना आयुक्त सुरेश चन्द गुप्ता ने 1 जून 2026 को पारित आदेश में यह कहते हुए अपील का निस्तारण कर दिया कि मांगी गई सूचना व्यापक प्रकृति की है और इसमें कोई बड़ा जनहित नहीं है। उल्लेखनीय है कि सुनवाई के दौरान प्रतिवादी लोक सूचना अधिकारी आयोग के समक्ष उपस्थित तक नहीं हुए और न ही कोई जवाब प्रस्तुत किया। इसके बावजूद वीडीओ और सरपंच को केवल चेतावनी देकर अपील का निस्तारण कर दिया गया।
राज्य सूचना आयोग के इसी आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने राजस्थान उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रमेश्वर पिलानियाँ ने पैरवी करते हुए न्यायालय में तर्क दिया कि जनता के धन से कराए गए कार्यों तथा सार्वजनिक अभिलेखों से संबंधित सूचना को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8 या 9 के किसी भी अपवाद के बिना अस्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग ने सूचना उपलब्ध नहीं कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय केवल चेतावनी देकर अपील का निस्तारण कर दिया, जो कानून की मूल भावना के विपरीत है।
सुनवाई के दौरान राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी किए और तीन सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई अब तीन सप्ताह बाद होगी।