भुसावर में शारदीय नवरात्र का समापन, शीतला माता मंदिर में 51 किलो प्रसादी वितरित
भरतपुर जिले के भुसावर में 19 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र के समापन पर देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। हिंडौन सड़क मार्ग स्थित शीतला माता मंदिर में गोविन्दा प्रजापत के नेतृत्व में 51 किलो प्रसादी वितरित की गई।
भरतपुर जिले के भुसावर में शारदीय नवरात्र के समापन अवसर पर हिंडौन मार्ग स्थित शीतला माता मंदिर के बाहर राहगीरों और श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित करते स्थानीय भक्त।
भरतपुर जिले के ऐतिहासिक शहरों में शामिल भुसावर में सोमवार, 19 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र के समापन अवसर पर धार्मिक आयोजन हुए। शहर सहित उपखंड मुख्यालय क्षेत्र के ग्रामीण अंचल के विभिन्न देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भक्तों ने माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मनोकामनाएं मांगीं। इस दौरान हिंडौन सड़क मार्ग स्थित शीतला माता मंदिर में 51 किलो सामग्री से निर्मित प्रसादी का वितरण किया गया।
नवरात्र के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने विभिन्न देवी मंदिरों में पहुंचकर माता के दर्शन किए और पूजा-अर्चना के बाद अपनी हाजिरी लगाई। घरों में भी कन्या पूजन का आयोजन किया गया। कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनके पैर धोए गए और उन्हें भोजन प्रसादी ग्रहण करवाई गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धानुसार दान-दक्षिणा देकर कन्याओं को विदा किया।
भुसावर के शैतान पाड़ा देवी मंदिर, जुलाहापाड़ा स्थित देवी मंदिर, शीतला माता मंदिर, कोठी वाले हनुमानजी मंदिर और पंजाबी हनुमान जी मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिला भक्त मंडलों ने भजन-कीर्तन किए। ढोलक, झांझ और मंजीरे की थाप पर माता के भजन गाकर भक्तों ने अरदास लगाई और अपनी मनोकामनाएं मांगीं। मंदिरों में माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
वहीं, हिंडौन सड़क मार्ग स्थित शीतला माता मंदिर में माता के भक्त गोविन्दा प्रजापत के नेतृत्व में भक्त मंडल के संयुक्त तत्वावधान में प्रसादी वितरण का आयोजन किया गया। इस दौरान 51 किलो सामग्री से निर्मित प्रसादी आने-जाने वाले राहगीरों को वितरित की गई। श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण कर माता से अपने परिवार में सुख, शांति और समृद्धि के साथ क्षेत्र में खुशहाली की कामना की।
शारदीय नवरात्र के समापन पर मंदिरों में पूजा-अर्चना, कन्या पूजन, भजन-कीर्तन और प्रसादी वितरण के आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सेवा भावना के प्रतीक बने।