अमरावती महावितरण कार्यालय के बाहर एक महिला हाथ में माइक लेकर अधिकारियों से बात कर रही है।

अमरावती। महावितरण की अनियमित बिजली आपूर्ति और मनमाने कामकाज के विरोध में 10 अक्टूबर को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने किसानों के साथ भव्य मोर्चा निकालकर धरना आंदोलन किया। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के ओबीसी सचिव विपुल भडांगे के नेतृत्व में निकाले गए इस मोर्चे के दौरान किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर महावितरण अधिकारियों को निवेदन सौंपा और समस्याओं के तत्काल निराकरण की मांग की।

अकालग्रस्त स्थिति के बावजूद महावितरण की ओर से किसानों को अनियमित रूप से बिजली आपूर्ति किए जाने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महावितरण के मनमाने कामकाज के कारण किसानों की समस्याएं बढ़ने को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महाराष्ट्र प्रदेश के ओबीसी सचिव विपुल भडांगे ने किसानों की मांगों और समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखने के लिए भव्य मोर्चे और धरना आंदोलन का आयोजन किया।

मोर्चा महावितरण कार्यालय पहुंचने के बाद किसानों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखने और निवेदन सौंपने का प्रयास किया। हालांकि, निवेदन स्वीकार करने के लिए कार्यकारी अभियंता कासट के बाहर नहीं आने पर किसानों का धैर्य जवाब देने लगा। इसके बाद किसानों ने उप अभियंता के केबिन में प्रवेश करने का प्रयास किया। मोर्चे में शामिल किसानों के बढ़ते आक्रोश और उनके एकजुट होने के बाद आखिरकार अभियंता को बाहर आना पड़ा।

इस दौरान किसानों ने अपनी-अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं और महावितरण कंपनी से उनका निराकरण करने की मांग की। किसानों ने अनियमित बिजली आपूर्ति और महावितरण के कामकाज से हो रही परेशानियों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

इस आंदोलन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महाराष्ट्र प्रदेश के सचिव विपुल भडांगे, मोर्शी शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूषण कोकाटे, पूर्व जिला परिषद सदस्य मुरली नाना डहाणे, संजयजी पांडव, महिला कांग्रेस की तालुका अध्यक्ष अल्पजाताई बडाशे, रमाताई इंगले सहित बड़ी संख्या में महिला किसान उपस्थित रहीं।

कांग्रेस की ओर से महावितरण कार्यालय को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि किसानों की मांगें पूरी नहीं की गईं, तो आने वाले समय में और तीव्र आंदोलन किया जाएगा। किसानों की बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं के समाधान और उनकी मांगों पर कार्रवाई को लेकर इस आंदोलन के जरिए महावितरण प्रशासन पर दबाव बनाया गया।

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