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चीन को छूट, भारत पर टैरिफ का बोझ ; ट्रंप की दोहरी नीति?
By EditorialPublished on
भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद : अमेरिका की विदेश और व्यापार नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। रूस से तेल खरीदने के बावजूद जहां चीन को ट्रंप प्रशासन ने राहत दी, वहीं भारत पर अतिरिक्त टैरिफ का बोझ डाल दिया गया। इस दोहरे रवैये ने न केवल भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ाया है बल्कि वॉशिंगटन की रणनीति पर भी नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

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भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का बड़ा फैसला लिया है। वहीं, रूस से तेल खरीदने के बावजूद चीन पर इतनी सख्ती नहीं दिखाई गई। यही वजह है कि इस फैसले ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच संबंधों में नई खटास पैदा कर दी है।
भारत पर टैरिफ, चीन पर नरमी :
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है और यह अमेरिका की रणनीति के खिलाफ है। इसी कारण भारत पर अतिरिक्त बोझ डालते हुए टैरिफ को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया। दूसरी ओर, चीन भी रूस से तेल खरीदता है, लेकिन उसे अमेरिका से राहत मिल गई।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस मसले पर सफाई देते हुए कहा कि चीन पर टैरिफ बढ़ाने से वैश्विक तेल बाजार पर सीधा असर पड़ेगा। उनके मुताबिक, चीन रूस से तेल खरीदकर पहले उसे रिफाइन करता है और फिर वर्ल्ड मार्केट में बेचता है। अगर चीन पर सख्ती की गई तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे यूरोप और एशिया समेत पूरी दुनिया प्रभावित होगी।
रुबियो का बयान और अमेरिकी रणनीति :
रुबियो ने रविवार (17 अगस्त) को 'फॉक्स न्यूज' से बातचीत में कहा – “अगर चीन पर सेकेंडरी टैरिफ लगाया गया तो वैश्विक तेल कीमतें बढ़ जाएंगी। चीन पहले तेल रिफाइन करेगा और फिर उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचेगा। इससे तेल खरीदने वाले देशों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी और बाजार में अस्थिरता आ जाएगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि यूरोपीय देश इस नीति को लेकर नाखुश हैं। उनके मुताबिक, सीनेट में चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी, लेकिन वैश्विक दबाव के चलते इसे फिलहाल रोक दिया गया।
भारत के लिए मुश्किलें क्यों बढ़ीं ?
भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद का सबसे बड़ा कारण रूस से भारत की ऊर्जा निर्भरता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। भारत ने अपना रुख नहीं बदला और इसी वजह से टैरिफ 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया।
इस बढ़े हुए टैरिफ से भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है, खासकर उन सेक्टर्स पर जो अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत-अमेरिका के बीच तनाव और गहरा सकता है।
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चीन को क्यों मिली राहत ?
भारत के उलट, चीन को ट्रंप प्रशासन से राहत मिली। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका चीन को पूरी तरह नाराज़ नहीं करना चाहता क्योंकि ऐसा करने से वैश्विक बाजार में असंतुलन आ सकता है। रुबियो ने भी माना कि चीन पर सख्त टैरिफ लगाने से यूरोपीय देश भी नाखुश होंगे और इससे अमेरिका का कूटनीतिक दबाव बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद अब एक बड़े भू-राजनीतिक मुद्दे में बदल चुका है। जहां भारत अतिरिक्त टैरिफ का बोझ झेल रहा है, वहीं चीन को नरमी का फायदा मिल रहा है। आने वाले समय में यह विवाद दोनों देशों के रिश्तों पर बड़ा असर डाल सकता है।
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