लोहड़ी केवल पर्व नहीं, बल्कि पंजाब की आत्मा है, जो अग्नि, प्रकृति, खेती और सामूहिक आनंद को एक सूत्र में बांधती है

मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाई जाने वाली लोहड़ी सूर्य के उत्तरायण होने और नई रबी फसल के स्वागत का प्रतीक है
अलाव में तिल, गुड़ और रेवड़ी अर्पित कर लोग सूर्य और अग्नि देव को समृद्धि व सुरक्षा के लिए धन्यवाद देते हैं
लोहड़ी के गीतों में गूंजता दुल्ला भट्टी का नाम वीरता, सामाजिक न्याय और कमजोरों की रक्षा का प्रतीक है
नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं की पहली लोहड़ी परिवार, आशीर्वाद और परंपराओं के संगम का पर्व होती है