वन में खड़े त्रिदेव स्वरूप भगवान दत्तात्रेय, वेदों का प्रतीक चार कुत्ते और कामधेनु गाय के साथ दिव्य आभा में दर्शाए गए हैं।

दत्तात्रेय जयंती पर सजे मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना में शामिल होते हुए।
मंदिर प्रांगण में भक्तों द्वारा भजन-कीर्तन और दत्तात्रेय उपदेशों पर धार्मिक प्रवचन होता हुआ।
भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं को प्रकृति के विभिन्न रूपों के प्रतीकात्मक चित्रण के रूप में दर्शाया गया है।
जयंती पर भक्तों द्वारा भोजन वितरण और सेवा कार्य करते हुए, दत्तात्रेय की करुणा का संदेश जीवंत होता है।
दत्तात्रेय के संदेशों से प्रेरित भक्त ध्यान में लीन होकर आत्मिक शांति प्राप्त करता हुआ।