नई दिल्ली:

उत्तर भारत इस समय मौसम के दो चरम छोरों का गवाह बन रहा है। जहाँ एक ओर ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में शीतकालीन जैसा अहसास अभी भी बरकरार है, वहीं दूसरी ओर मैदानी राज्यों में गर्मियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आने वाले कुछ दिन उत्तर भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं क्योंकि पहाड़ों और मैदानों के बीच तापमान का अंतर काफी बढ़ जाएगा।

पहाड़ी राज्यों का हाल: बर्फबारी और बारिश का अलर्ट

जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में पिछले 24 घंटों से पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का असर देखा जा रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, यह प्रभाव 1 अप्रैल 2026 यानि आज भी जारी रह सकता है।

  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख: गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम जैसे ऊंचे इलाकों में हल्की से मध्यम बर्फबारी की रिपोर्ट है। इसके कारण श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात की गति धीमी हुई है।
  • हिमाचल प्रदेश: लाहौल-स्पीति और किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है, जबकि मनाली और शिमला जैसे पर्यटन केंद्रों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है।
  • उत्तराखंड: केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के आसपास बर्फबारी की खबरें हैं, जबकि निचले इलाकों जैसे देहरादून और ऋषिकेश में बादल छाए रहने से मौसम सुहावना बना हुआ है।

पहाड़ों में इस बेमौसम बर्फबारी और बारिश के कारण भूस्खलन (Landslides) का खतरा बढ़ गया है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने पर्यटकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

मैदानी इलाकों में चढ़ता पारा: गर्मी की शुरुआत

पहाड़ों की ठंडक के विपरीत, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मैदानी क्षेत्रों में सूरज के तेवर तीखे होते जा रहे हैं। बादलों की आवाजाही कम होते ही धूप का असर बढ़ गया है।

  • तापमान में वृद्धि: दिल्ली-एनसीआर में अधिकतम तापमान 34°C से 36°C के बीच दर्ज किया जा रहा है। आने वाले तीन से चार दिनों में इसके 38°C तक पहुंचने की संभावना है।
  • उत्तर प्रदेश और राजस्थान: लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में दोपहर के समय लू (Heat Wave) जैसी स्थिति महसूस होने लगी है। राजस्थान के चूरू और बाड़मेर में पारा 40°C के करीब पहुंच गया है।

मैदानी इलाकों में शुष्क हवाएं चलने के कारण नमी के स्तर में कमी आई है, जिससे त्वचा और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव और कारण

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के ऊपर से गुजर रहा है। इसकी सक्रियता केवल पहाड़ों तक सीमित है, जिसके कारण वहां बारिश हो रही है। मैदानों तक पहुंचते-पहुंचते यह हवाएं शुष्क हो जाती हैं, जिससे वहां गर्मी बढ़ती है। जब पहाड़ों पर बारिश होती है, तो वहां से आने वाली ठंडी हवाएं मैदानों को थोड़ी राहत देती हैं, लेकिन इस बार हवा की दिशा बदलने के कारण मैदानों में गर्मी का प्रभाव अधिक है।

कृषि और फसलों पर असर

मौसम का यह दोहरा रवैया किसानों के लिए चिंता का विषय है।

  • पहाड़ों में सेब की फसल: हिमाचल और उत्तराखंड में अचानक हुई बर्फबारी और ओलावृष्टि से सेब के बगीचों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि इस समय पेड़ों में फूल आने का समय होता है।
  • मैदानों में गेहूं की कटाई: उत्तर प्रदेश और हरियाणा में गेहूं की फसल पक कर तैयार है। बढ़ता तापमान कटाई के लिए तो अच्छा है, लेकिन अगर अचानक बारिश या तेज हवाएं चलती हैं, तो तैयार फसल के गिरने का डर रहता है।

वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं

गर्मी बढ़ने के साथ-साथ दिल्ली और आसपास के शहरों में वायु गुणवत्ता (AQI) फिर से 'खराब' श्रेणी की ओर बढ़ रही है। धूल भरी हवाएं चलने के कारण सांस के मरीजों को परेशानी हो सकती है। डॉक्टरों का सुझाव है कि बढ़ती गर्मी को देखते हुए लोग हाइड्रेटेड रहें और दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच सीधी धूप में निकलने से बचें।

अगले एक हफ्ते का पूर्वानुमान

IMD के अनुसार, 2 अप्रैल के बाद पहाड़ों में भी मौसम साफ होने लगेगा। इसके बाद पूरे उत्तर भारत में गर्मी का एक बड़ा दौर शुरू होगा। अप्रैल के पहले सप्ताह के अंत तक दिल्ली सहित कई मैदानी राज्यों में तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री ऊपर जा सकता है। हिमालयी राज्यों में भी बर्फ पिघलने की प्रक्रिया तेज होगी, जिससे नदियों के जलस्तर में मामूली वृद्धि देखी जा सकती है।

संक्षेप में कहें तो उत्तर भारत इस समय एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। पहाड़ों में जहाँ अभी भी जैकेट और गर्म कपड़ों की जरूरत है, वहीं मैदानों में कूलर और एसी चलने शुरू हो गए हैं। प्रकृति का यह संतुलन आने वाले दिनों में गर्मी की तीव्रता बढ़ने का स्पष्ट संकेत दे रहा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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