भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने उत्तर और मध्य भारत के बड़े हिस्से को झुलसा रही भीषण गर्मी के बीच एक बड़ी राहत का संकेत दिया है। पिछले कई दिनों से रिकॉर्ड तोड़ तापमान और असहनीय उमस का सामना कर रहे देश के उत्तरी राज्यों की ओर एक तीव्र पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) तेजी से आगे बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस नए मौसम तंत्र के सक्रिय होने से आने वाले दिनों में न केवल आसमान में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी, बल्कि तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश होने की प्रबल संभावना है, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा सकती है।

देश का एक बड़ा हिस्सा इस समय प्रचंड लू की चपेट में है। दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई शहरों में दिन का तापमान लगातार पैंतालीस डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। इस बार की गर्मी की सबसे गंभीर स्थिति यह है कि रात के तापमान में भी कोई खास गिरावट दर्ज नहीं की जा रही है, जिससे लोगों को सूर्यास्त के बाद भी गर्मी से कोई रिकवरी नहीं मिल पा रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्म रातें मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होती हैं क्योंकि इससे शरीर को खुद को ठंडा करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है।

इस बीच, २१ मई को मौसम उपग्रह इनसैट-3डीएस (INSAT-3DS) द्वारा ली गई थर्मल इन्फ्रारेड तस्वीरों से पता चलता है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उससे सटे उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर एक विशाल क्लाउड मास और चक्रवाती परिसंचरण विकसित हो चुका है। सैटेलाइट इमेज में घने सफेद बादलों की पट्टियों के रूप में दिखाई दे रहा यह सिस्टम लगातार पूर्व की ओर हिमालयी क्षेत्र और उत्तरी मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त, अरब सागर से आने वाली नमी और उत्तर-पूर्वी भारत तथा बंगाल की खाड़ी में बनते बादलों के कारण इस तंत्र को और अधिक मजबूती मिल रही है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों के दौरान आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और छिटपुट बारिश की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। हालांकि, बारिश की सटीक तीव्रता को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन कुछ मैदानी इलाकों में धूल भरी आंधी और छिटपुट ओलावृष्टि की भी पूरी आशंका है। मौसम विभाग के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि भले ही यह बारिश देश से हीटवेव को पूरी तरह समाप्त न करे, परंतु इससे रात और दिन के तापमान में एक बड़ी गिरावट जरूर आएगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को अनिद्रा और बेचैनी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

न केवल उत्तर भारत बल्कि सैटेलाइट डेटा के अनुसार, अरब सागर और दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में भी मानसूनी गतिविधियां धीरे-धीरे अनुकूल हो रही हैं, जिससे आने वाले समय में देश के अन्य हिस्सों में भी मौसम का मिजाज बदलने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के इस दौर में लगातार लंबे समय तक खिंचने वाले ये हीटवेव और मौसम का अप्रत्याशित व्यवहार एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है, जिससे निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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